संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद चिंतित, अफगानिस्तान में तालिबान को सत्ता सौंपी तो अलकायदा के बीच होगा टकराव

    दिनांक 05-जून-2020   
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संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने सचेत किया है कि तालिबान को अफगानिस्तान की सत्ता सौंपी गई तो खूंखार आतंकवादी संगठन ‘अल कायदा’ और तालिबान के बीच खूनीसंघर्ष हो सकता है। परिषद ने यह निष्कर्ष अफगानिस्तान में सरकार की स्थापना को लेकर तालिबानियों की ओर से संयुक्त राष्ट्र को सौंपी गई रिपोर्ट के आधार निकाला है।
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संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने सचेत किया है कि तालिबान को अफगानिस्तान की सत्ता सौंपी गई तो खूंखार आतंकवादी संगठन ‘अल कायदा’ और तालिबान के बीच खूनीसंघर्ष हो सकता है। परिषद ने यह निष्कर्ष अफगानिस्तान में सरकार की स्थापना को लेकर तालिबानियों की ओर से संयुक्त राष्ट्र को सौंपी गई रिपोर्ट के आधार निकाला है। तालिबानियों ने यह रिपोर्ट हाल में संयुक्त राष्ट्र को सौंपी है। इसे मौजूदा अफगानिस्तान सरकार और यहां तैनात यूएन असिस्टांस मिशन ने अपनी देख-रेख में तैयार कराया है। पाकिस्तान के अखबार ‘डान’ की मानें तो यह रिपोर्ट सुरक्षा परिषद को सौंपने के बाद जब अध्ययन किया गया तो अल कायदा के आतंकियों के बीच टकराव की संभावनाओं का खुलासा हुआ।
 
इस रिपोर्ट में तालिबान ने अफगानिस्तान की केंद्र व राज्य सरकार तथा जिला प्रशासन की रूप-रेखा, विभागों के अधिकारों एवं कर्तव्यों का विशेष तौर से उल्लेख किया है। मगर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने रिपोर्ट के अध्ययन के बाद इसे तालिबानी छाया वाली सरकार करार दे दिया है। इसके आधार पर ही तालिबान का अल कायदा सहित दूसरे आतंकवादी संगठनों से निकट संबंध होने तथा सरकार में दखलंदाजी को लेकर केंद्र और निचले नेतृत्व के बीच टकराव के संकेत दिए गए हैं।
  
उल्लेखनीय है कि फरवरी में अफगानिस्तान की सत्ता तालिबानियों को सौंपने को लेकर हुए अमेरिका एवं तालिबान के बीच समझौते में अल कायदा को विशेष तौर से उखाड़ फेंकने का जिक्र किया गया था। संयुक्त राष्ट्र की मानें तो इन शर्तों पर अमेरिका समझौते को राजी हुआ है। साथ ही समझौते में तालिबानियों के बीच किसी तरह की फूट नहीं होने और समझौते को लेकर बनाई गई निगरानी समिति के आदेशों का पालन की भी शर्तें रखी गई हैं। सुरक्षा परिषद का मानना है कि अफगानिस्तान में हिंसा में कमी लाने में तालिबान ने अपने लड़ाकों पर नियंत्रण रखा है। 2020 में राजनीतिक प्रभाव दिखाने के लिए ये अब तक हिंसा से भी दूर रहे हैं। मगर सर्दियों में अफगानिस्तान में सरकार के फेर-बदल के दौरान अलकायदा के आतंकी बड़ा बखेड़ा खड़ा कर सकते हैं, ऐसी आशंका जताई जा रही है।
 
संयुक्त राष्ट्र में सौंपी गई रिपोर्ट के अनुसार, तालिबान अफगानिस्तान में सत्ता हथियान की तैयारी जुटा है और सर्दियों में नई सरकार काम करने लगेगी। दूसरी तरफ, सर्दी के मौसम को अफगानिस्तान में हिंसा का मौसम माना जाता है। तालिबान बदख्शां, बागलान, बल्ख, बाम्यान, काबुल, कपिसा, कुंदुज, समंगन और तखान प्रांतों में नई नियुक्तियों, शासन और सैन्य संरचना के पुनर्गठन को लेकर चर्चा कर चुके हैं। इस दौरान भी सत्ता में बदलाव के साथ हिंसा के संकेत मिल चुके हैं। बताते हैं कि हिंसा की आशंका को देखते हुए ही आतंकवादी संगठन हक्कानी नेटवर्क के एक वरिष्ठ सदस्य और तालिबान के डिप्टी सिराजुद्दीन हक्कानी के भाई अब्दुल अजीज अब्बासी ने गजनी, वर्दक और परवन प्रांतों में तालिबान बलों के लिए हथियार और गोला-बारूद की आपूर्ति के आदेश दे दिए हैं।
 
इस वर्ष फरवरी के मध्य में कई हिंसक घटनाओं में शामिल मुल्ला अब्दुल रहमान उर्फ पीर आगा को तालिबानियों ने हाशिए पर धकेल दिया है। इसको लेकर भी अलकायदा के छोटे-बड़े आतंकियों के बीच टकराव की एक जमीन तैयार हो रही है। पीर आगा खुद को तालिबान सरकार में गवर्नर बनने का सपना देख रहा था। यह तालिबान के हिंसा फैलाने वाले गुट का नेतृत्व कर चुका है। इसके इस्लामिक स्टेट से भी संबंध बताए जाते हैं। इसे एक प्रांत के गवर्नर पद का दावेदार माना जा रहा था, पर इसकी जगह मुल्ला मोहम्मद एसा को वहां का गर्वनर बनाने की तैयारी कर ली गई है।

 उल्लेखनीय है कि मुल्ला मोहम्मद उमर की मौत के बाद तालिबानी कई धड़ों में बंट गए है। उन्होंने अपना-अपना पृथक गुट बना लिया है। हालाकि वे अमेरिका से बातचीत और समझौते के दौरान ऐसा जाहिर करते रहे हैं कि उनके बीच कोई फूट नहीं हैं, सभी एक हैं। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का कहना है कि उनके बीच इस कदर फूट है कि इसके राजनीतिक कार्यालय में भी साफ दिखता है, विशेष रूप से अब्दुल गनी ब्रदर्स और शेर मोहम्मद अब्बास के समूह के बीच। तालिबान का दोहा में राजनीतिक कार्यालय है। संयुक्त राष्ट्र और इसके अफगान वार्ताकारों ने आरोप लगाया है कि तालिबान नेतृत्व ने रिपोर्ट में समझौते के आधार पर तैयारियों का पूरा विवरण नहीं दिया है। विशेष रूप से अल कायदा और विदेशी आतंकवादी संगठनों के रिश्तों को लेकर।