पलायन को मजबूर हुए मजदूरों के कन्वर्जन में लगा चर्च, खूंटी में 20 से अधिक गांवों में कई लोगों को लालच देकर बनाया गया ईसाई

    दिनांक 08-जून-2020   
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इस कोरोना काल में भी चर्च कन्वर्जन के काम में लगा है। झारखंड स्थित खूंटी जिले के 20 से अधिक गांवों में कई लोगों को लालच देकर ईसाई बनाया गया।
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 खूंटी जिले के गांव जाबरा में अपनी झोपड़ी के बाहर अपने बेटे मंगल मुंडा के साथ बैठी सुग्गी मुंडा।
ईसाई मिशनरी ऐसे ही परिवारों को लालच से ईसाई बनाती हैं।


ईसाई मिशनरी से जुड़े लोग इस वैश्विक महामारी के समय भी भोले—भाले लोगों को ईसाई बनाने में लगे हैं। ताजा मामला झारखंड के खूंटी जिले का है। खूंटी के कुछ लोगों ने बताया कि दिल्ली, मुम्बई, लुधियाना, गुरुग्राम, अमदाबाद, बेंगलूरु आदि शहरों से जो मजदूर वापस अपने घर आए हैं, उन्हें ईसाई मिशनरी के लोग भड़का रहे हैं। इसके पीछे दो उद्देश्य हैं- कन्वर्जन और भारत सरकार के विरुद्ध लोगों के मन में वैमनस्य पैदा करना। इसके लिए ये लोग मजदूरों से कह रहे हैं,‘‘देखो, भारत सरकार के कारण तुम लोगों को कितनी दिक्कतें हुईं।

हजारों किलोमीटर पैदल चलना पड़ा और कई दिन तक भूखे रहना पड़ा।’’ लोगों ने यह भी बताया कि मिशनरी से जुड़े लोग दिन-रात उन गांवों में जा रहे हैं, जहां प्रवासी मजदूर वापस आए हैं। उनके बीच चंगाई सभा करते हैं और लोगों से कहते हैं, ‘‘प्रभु यीशु की शरण में आने से न तो कोरोना होगा और न ही भूख से मरोगे।’’ यह भी कहा जाता है, ‘‘यदि पहले ही यीशु की शरण में आ जाते तो रोजी-रोटी के लिए घर-परिवार से हजारों किलोमीटर दूर जाने की जरूरत ही नहीं पड़ती।’’ कुछ लोगों से यह भी कहा जाता है, ‘‘निकट भविष्य में कोई काम भी नहीं मिलने वाला है। हां, चर्च के संपर्क में रहने से कोई न कोई काम मिल जाएगा।’’

उनकी इन बातों से कुछ लोग बहुत प्रभावित हो रहे हैं और यही लोग ईसाई बन रहे हैं। सूत्रों के अनुसार मिशनरी से जुड़े लोगों ने अब तक 20 गांवों के लगभग 800 परिवारों से संपर्क किया है। इस काम में खूंटी के एक निजी विद्यालय ‘ग्रेस हर्ट स्कूल’ का संचालक बड़ी भूमिका निभा रहा है, जिसका नाम है प्रमोद कुमार। बताया जाता है कि प्रमोद के पिता भोला कहार अनुमंडल कार्यालय, खूंटी में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी थे। करीब 20 साल पहले वे चर्च के चक्कर में पड़े और अंतत: ईसाई बन गए। उन्होंने भी एक समय काफी लोगों को ईसाई बनाया था। अब यह काम उनका बेटा प्रमोद कर रहा है। प्रमोद की देखरेख में एक मारुति वैन प्रतिदिन खूंटी जिले के विभिन्न गांवों में मजदूरों की सहायता करने के नाम पर उनके घर जाते हैं और जो इनकी बातों में आ जाते हैं, उन्हें ईसाई बना लेते हैं।

एक अपुष्ट खबर यह भी सामने आ रही है कि ‘लॉकडाउन’ के दौरान जरूरतमंदों को भोजन कराने के नाम पर कई ईसाई संगठनों ने झारखंड सरकार से मोटी रकम ली है। चर्च और वर्तमान झारखंड सरकार के बीच जिस तरह के रिश्ते हैं, उसे देखते हुए इस बात में दम लग रहा है। उल्लेखनीय है कि हेमंत सोरेन ने मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने से ठीक पहले रांची के सबसे बड़े चर्च के प्रमुख से भेंट की थी। चर्च ने भी चुनाव के समय खुलकर अपने लोगों से कहा था कि वे हेमंत सोरेन की सरकार बनाने के लिए वोट करें। इन बातों को देखते हुए कहा जा सकता है कि वर्तमान झारखंड सरकार चर्च के इशारे पर काम कर रही है और चर्च इसका जमकर फायदा उठा रहा है।