बाबासाहेब को जाता है दामोदर वैली प्रोजेक्ट श्रेय

    दिनांक 08-जून-2020
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हम लगातार आपको बाबासाहेब के जीवन से जुड़े कुछ अनछुए प्रसंगों को बताने का प्रयास कर रहे हैं। आगे भी यह प्रयास जारी रहेगा। ये प्रसंग “डॉ. बाबासाहब आंबेडकर राइटिंग्स एंड स्पीचेज”, “पाकिस्तान ऑर पार्टीशन ऑफ इंडिया”, “द सेलेक्टेड वर्क्स ऑफ़ डॉ. बी. आर. आंबेडकर”, “द डिक्लाइन एंड फॉल ऑफ़ बुद्धिज़्म” आदि पुस्तकों से लिए गए हैं. बाबासाहेब को जानें भाग 51:-

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वर्ष 1942 में डॉ. आंबेडकर वायसराय की कार्यकारी परिषद के सदस्य थे। यह एक मंत्री स्तर का पद था जिसका उल्लेख ‘डॉ.आंबेडकर रोल आन इकोनॉमिक प्लानिंग’ पुस्तक में मिलता है। इसमें उन्होंने पांच कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया है जिसमें दो दामोदर वैली प्रोजेक्ट, एक महानदी एवं दो इलेक्ट्रिक पावर के लिए थीं। इसके अलावा बिहार व पश्चिम बंगाल को प्रभावित करने वाले कई बहुउद्देश्यों वाले दामोदर वैली प्रोजेक्ट में उनका अमूल्य योगदान था। बाढ़ नियंत्रण, सिंचाई, पेयजल एवं विद्युत उत्पादन इस प्रोजेक्ट के मुख्य हेतु थे। आंबेडकर के अथक प्रयासों से ही दामोदर वैली बिल को दिसंबर 1947 में संविधान सभा में लाया जा सका और फरवरी 1948 में पारित किया गया। दो-दो राज्यों व केन्द्र सरकार के बीच डॉ. आंबेडकर के अद्भुत कार्य निष्पादन से ही चार वर्ष से कम समय में यह प्रोजेक्ट पूरा हो सका और ‘रिवर आफ शर’ मानी जाने वाली दामोदार नदी बिहार व प़ बंगाल के लिए वरदान बनी। आजाद भारत का यह सफलतम प्रोजेक्ट था जिसकी सफलता का श्रेय डॉ. आंबेडकर को जाता है।