क्या दरभंगा बम विस्फोट स्लीपर सेल की साजिश ?

    दिनांक 09-जून-2020
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संजीव कुमार

बिहार के दरभंगा में बीते 5 जून को भयानक विस्फोट हुआ। इस विस्फोट की तीव्रता कुछ अलग ही कहानी कहती है। कुछ लोग इस विस्फोट को स्लीपर सेल के लिए कुख्यात दरभंगा माडृयूल से जोड़कर देख रहे हैं। हालांकि पुलिस इसकी जांच में जुटी है
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बिहार में बीते 5 जून को भयानक विस्फोट हुआ। इस विस्फोट की तीव्रता इतनी अधिक थी कि मोहम्मद नजीर का पक्का मकान ध्वस्त हो गया। तीन किलोमीटर की दूरी तक इस धमाके की आवाज सुनी गई। यह विस्फोट स्लीपर सेल के लिए कुख्यात दरभंगा में हुआ। हालांकि पहले तो इसे पटाखे से हुआ विस्फोट माना जा रहा है लेकिन इसकी तीव्रता कुछ अलग ही कहानी कहती है। कुछ लोगों का मानना है कि वास्तव में बम विस्फोट हुआ था और इस बात को खारिज नहीं किया जा सकता कि कहीं इसका कनेक्शन स्लीपर सेल से तो नहीं ?

विश्वविद्यालय थाना क्षेत्र के आजमनगर मोहल्ला स्थित मोहम्मद नजीर नदाफ के घर लगभग  यह विस्फोट हुआ। विस्फोट की तीव्रता इतनी अधिक थी कि पूरा इलाका दहल उठा। तीन किलोमीटर के दायरे में धमाके की आवाज सुनाई दी। नजीर का मकान ध्वस्त हुआ साथ ही कई घरों को भी क्षति पहुंची। उसके परिवार के तीन बच्चे गंभीर रूप से घायल हो गये। बच्चों को मलबे से निकालकर स्थानीय दरभंगा मेडिकल काॅलेज अस्पताल भेजा गया। जख्मी बच्चों में शमशाद, शाहिल और नजराना है। शमशाद की स्थिति नाजुक बनी हुई है। घटना के बाद नजीर और उसकी पत्नी अफसान फरार हो गये। लेकिन, कुछ ही समय के बाद पुलिस ने नजीर को उसकी पत्नी और पुत्र गुलाब नदाफ के साथ पकड़ लिया। नजीर के पड़ोस में रहने वाले पीके रानी, प्रेमलाल महतो, संजीव महतो, महेश साह आदि के घर भी गिर गये। आस-पास के कई मकान क्षतिग्रस्त हो गए। दूर तक कई घरों की खिड़कियों के शीशे चूर-चूर हो गये। नजीर के घर के समीप दो बड़े पेड़ भी गिर गये। पहले तो लोगों को समझ में नहीं आया कि वास्तव में हुआ क्या है ? लेकिन, थोड़ी देर में ही सच्चाई सामने आ गई। आक्रोशित लोग जब नजीर के घर के सामने पहुंचे तो वहां सुतली लपेटे कई बम मिले। केन बम में इस्तेमाल होने वाले दो प्लेट भी मिले।

इस विस्फोट को लेकर कई तरह की चर्चाएं चल रही है। यह बात सब लोग कह रहे हैं कि मोहम्मद नजीर पटाखे का कारोबारी था। वर्षों से आजमनगर मुहल्ला बारूद के ढेर पर था। मोहम्मद नजीर अवैध रूप से पाटाखों का कारोबार करता था। इस घनी आबादी वाले इलाके में कई वर्षों से यह गोरखधंधा चल रहा था। स्थानीय आवश्यकता को देखते हुए यहां अवैध रूप से पटाखे बनाये जाते थे। रियाइशी इलाके में पटाखे बनाने की छूट नहीं मिलती है। लेकिन मोहम्मद नजीर अवैध रूप से पटाखा बनाता था। प्रश्न यह है कि पटाखों से हुआ धमाका इतना तीव्र नहीं होता कि किसी का मकान ही पूरी तरह ध्वस्त हो जाये। दरभंगा नगर पुलिस अधीक्षक योगेन्द्र कुमार भी मानते हैं कि नजीर बिना लाइसेंस के पटाखे बेचता था। उसके घर से पटाखा बनाने का सामान भी मिला है। लेकिन विस्फोट की तीव्रता को देखते हुए प्रशासन के कान भी खड़े हैं। जिलाधिकारी डाॅक्टर त्यागराजन एसएम ने जांच कराने के लिए एडीएम के नेतृत्व में तीन सदस्यीय टीम बनाई है जिसमें-सदर एसडीओ और सदर एसडीपीओ भी शामिल हैं। पुलिस यह भी जांच करेगी कि वहां पटाखा ही बनाया जा रहा था या कुछ और गतिविधियां चल रही थीं। मामले की जांच एसएफएल टीम भी करेगी।
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वैसे दरभंगा का नाम आतंकवाद से बुरी तरह से जुड़ा हुआ है। भारत के आतंकी गतिविधियों में दरभंगा माड्यूल जरूर शामिल रहता है। कुछ दिन पहले आतंकी संगठन इंडियन मुजाहिद्दीन का सह संस्थापक यासिन भटकल की गिरफ्तारी हुई थी। दरभंगा माॅड्यूल को बढ़ाने में भटकल और फसी मोहम्मद की महत्वपूर्ण भूमिका रही। दरभंगा माॅड्यूल को स्लीपर सेल के साथ ही जोड़कर देखा जा सकता है। दरभंगा के युवकों को आतंकवाद से जोड़ने के लिए भटकल ने इस माॅड्यूल को विकसित किया था। इसमें युवाओं को पहले आतंकवाद की तरफ प्रेरित किया जाता है फिर उन्हें आतंकवाद का प्रशिक्षण दिया जाता है। प्रशिक्षण के बाद इन्हें वापस दरभंगा भेज दिया जाता था। घर पर रहते हुए भी इन्हें प्रत्येक महीने अच्छी पगार मिलती थी। आवश्यकता पड़ने पर कुछ महीने पहले इन्हें वापस बुला लिया जाता था और भारत में कोई भी आतंकी घटना को अंजाम देने के लिए इनका इस्तेमाल किया जाता था।

अगर एनआईए की रिपोर्ट को देखा जाए तो भटकल ने सबसे पहले उडुपी के भटकल नामक स्थान में कुछ युवाओं के साथ अपने इत्र की दुकान पर संपर्क बनाये थे। यह वर्ष 2001 की बात है। उन लोगों को अपनी बातों में फंसाकर भटकल ने आतंकवाद के लिए प्रेरित किया। वर्ष 2002 में भटकल फसी के कहने पर दरभंगा आया था। उसके बाद वह यहां लगातार आने लगा। भटकल को यहां के युवाओं में अपने आतंकवाद को बढ़ाने का अच्छा मौका लगा। कटृटरपंथी एवं भगोड़े जाकिर नाइक की लिखित पुस्तकें और पोस्टर भी दरभंगा आतंक माॅड्यूल में खूब इस्तेमाल किये गये।

2010 से 2014 के बीच 14 इंडियन मुजाहिद्दीन के आतंकी दरभंगा से गिरफ्तार किये गये। सबसे मजे की बात यह थी कि हर गिरफ्तारी का संबंध दारूल किताब सुन्ना लाइब्रेरी से भी था। ऐसा कहा जाता था कि इस लाइब्रेरी से ही इंडियन मुजाहिद्दीन दरभंगा माॅड्यूल को अंजाम देता था। पटना के गांधी मैदान में भाजपा के भावी प्रधानमंत्री के तौर नरेन्द्र मोदी ने 27 अक्टूबर, 2013 को एक रैली की थी। इस ऐतिहासिक रैली में लगातार बम धमाके हुए। इस आतंकी घटना को भी दरभंगा माॅड्यूल के तहसीन ने अंजाम दिया था। इंडियन मुजाहिद्दीन के लिए दरभंगा सबसे सुरक्षित स्थान था। इस माॅड्यूल में सब कुछ शामिल है; अवैध घुसपैठिए, वोट बैंक पाॅलिटिक्स और सांप्रदायिक तनाव। पुणे और उत्तर प्रदेश में जब भटकल का माॅड्यूल फेल कर गया तब उसने दरभंगा माॅड्यूल पर ही विश्वास किया।

पुणे और आजमगढ़ में पुलिस की सतत निगरानी थी जबकि, दरभंगा एक लो प्रोफाइल क्षेत्र है। बिहार में वोट बैंक पाॅलिटिक्स के कारण दरभंगा माॅड्यूल हमेशा सुरक्षित माना गया। भटकल भी गिरफ्तारी के पूर्व लंबे समय तक इस इलाके में छिपा हुआ था। हकीकत में दरभंगा आतंकवाद के लिए नई फसल उपलब्ध कराता है। यह स्लीपर सेल के लिए जाना जाता है। हालांकि वोट बैंक पाॅलिटिक्स के कारण कोई भी इस पर खुलकर बोलने से परहेज करता है। ऐसे में नजीर के यहां हुए धमाके को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है।