दोहरी मार के शिकार पाकिस्तानी हिन्दू

    दिनांक 09-जून-2020   
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पाकिस्तान में हिंदुओं को उनकी जमीन, दुकान और मकान से बेदखल करने के लिए गहरा षड्यंत्र चल रहा है। उनकी महंगी जमीन पर कब्जा करने के लिए उन पर आएदिन हमले किए जा रहे हैं
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सिंध प्रांत में घोटकी के एक अस्पताल में भर्ती सत्तन कुमार। इनकी जमीन पर कब्जा करने के उद्देश्य से इन पर जानलेवा हमला किया गया था।

पचास वर्षीय सत्तन कुमार पाकिस्तान के सिंध प्रांत के घोटकी शहर में छोटा-मोटा व्यापार करते हैं। शहर के मुख्य मार्ग पर उनका जमीन का एक टुकड़ा है, जिसका मूल्य इस समय करोड़ों में है। इसी जमीन के टुकड़े के चलते गत दिनों उन पर जानलेवा हमला किया गया था। फिलहाल स्थानीय अस्पताल में उनका इलाज चल रहा है।

इलाके के भू-माफिया और कट्टरवादियों का एक गुट काफी दिनों से उनकी जमीन पर नजरें गड़ाए है। सत्तन कुमार कहते हैं कि पहले तो उन्हें डरा-धमका कर उनकी जमीन हथियाने का प्रयास किया। जब वे उनके आगे नहीं झुके तो पिछले दिनों मोहम्मद हक नवाज अपने गुर्गों के साथ उनके घर आ धमका और उक्त बेशकीमती जमीन सौंपने के लिए दबाव देने लगा। मगर जब सत्तन कुमार नहीं माने तो उसने और उसके लोगों ने उन्हें और उनके परिजनों की बुरी तरह पिटाई कर दी।

सत्तन ने स्थानीय पुलिस और तमाम बड़े सियासी नेताओं को इसकी जानकारी दी है। इसके बावजूद उन्हें और उनके परिजन को कोई मदद नहीं मिली है। उनकी जान को खतरा बना हुआ है। आशंका है कि मोहम्मद हक उनकी जमीन को जबरन हथियाने के लिए कभी भी फिर उन पर हमला कर सकता है।

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पेड़ पर लटका चंदोमल का शव। पाकिस्तान में हिन्दुओं की हत्याएं आएदिन हो रही हैं
 
पहले हिंदू लड़कियों के अपहरण और कन्वर्जन के ही मामले देखने-सुनने में आते थे।
अब हिन्दुओं को प्रताड़ित करने के लिए मजहबी कट्टरवादियों ने भी नए तरीके ढूंढ लिए हैं।
कोरोना संक्रमण के दौरान जहां उन्हें भोजन-पानी का लालच देकर
इस्लाम कबूलवाने का प्रयास किया गया, वहीं अब हिंदुओं
की संपत्ति हड़पने की साजिश शुरू हो गई है।
-मुकेश मेघवाड़, सामाजिक कार्यकर्ता, पाकिस्तान


बता दें कि पाकिस्तान में हिंदुओं की संपत्ति हथियाने का भू-माफिया और मजहबियों के गठजोड़ ने एक नया खेल शुरू कर दिया है। वह खेल है डराना-धमकान। चंूकि पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों से अधिक गैररसूखदार और निर्बल-निरीह कोई और कौम नहीं है, इसलिए वे ही इस समय भू-माफिया और कट्टरवादियों के सर्वाधिक निशाने पर हैं। यहां तक कि कोरोना संक्रमण काल में भी हिंदुओं को प्रताड़ित करने का यह खेल बंद या कमजोर नहीं हुआ है, बल्कि पिछले दो महीने में इसमें वृद्धि ही हुई है। भू-माफिया के दबाव में जो नहीं आते, उन्हें तरह-तरह से प्रताड़ित किया जाता है। पिछले दिनों चर्च और ईसाइयों के कब्रिस्तान पर कब्जा करने के लिए भारी तोड़-फोड़ की गई थी। दीवारें ढहा दी गई थीं और दरवाजा उखाड़ कर फेंक दिया गया था। कब्रिस्तान की जमीन समतल करने के लिए उस पर ट्रैक्टर चला दिया गया। 11 मई को सिंध प्रांत के मतारी में जब हिंदू बिरादरी भूमि माफिया के दबाव में नहीं आई तो उनके घरों में आग लगा दी गई। हिंदुओं के करीब 25 मकान जलकर खाक हो गए। इसमें कई लोग बुरी तरह झुलस गए थे और कई की मृत्यु की भी खबर है। हाल के दिनों में पेड़ व खाली पड़े मकानों में हिंदुओं की लाशें रहस्यमय परिस्थितियों  में टंगे मिलने की घटनाओं में भी वृद्धि हुई है। ‘पाकिस्तान हिंदू काउंसिल’ का मानना है कि इन मौतों के पीछे भी जमीन हड़पने की साजिश है। गत दिनों थट्टा शहर में एक बिना छत वाले कच्चे मकान में बांस के सहारे दो सगे भाइयों के शव लटके मिले। परिजन का आरोप है कि कुछ लोग उनके मकान पर कब्जा करने के लिए निरंतर दबाव बनाए हुए थे, जिससे बचने के लिए दोनों भाइयों ने खुद को ही समाप्त कर लेना बेहतर समझा। इससे पहले उमरकोट के टेकम दास घर में लटके पाए गए थे।
 
मिट्ठू मियां का शैतानी दिमाग
पिछले दिनों पाकिस्तान की एक और घटना बहुत चर्चा में रही। घटना पीर अब्दुल हक उर्फ मिट्ठू मियां से जुड़ी है। महहबी उन्मादी मिट्ठू मियां पाकिस्तान में हिंदू लड़कियों के अगवा व कन्वर्जन के लिए कुख्यात है। कहा जाता है कि पूरे पाकिस्तान में जितनी भी हिंदू महिलाएं या लड़कियां अपह्त या कन्वर्ट होती हैं, उसके पीछे मिट्ठू मियां का ही शैतानी दिमाग काम करता है। यह काम वह बरसों से कर रहा है। अब खबर है कि वह अपनी छवि सुधारने में लगा है। इसके लिए उसने एक ऐसे व्यक्ति की मदद ली है, जो कभी कन्वर्जन के खिलाफ आवाज बुलंद करने वालों में अग्रणी रहा है। इस व्यक्ति का नाम है ‘रेहान अल्लाहवाला’। वह इन दिनों मीडिया के जरिए यह साबित करने की कोशिश में है कि मिट्ठू मियां पर हिंदू लड़कियों के अपहरण, कन्वर्जन के तमाम आरोप ‘निराधार’ हैं।
 

हाल में सिंध के संघार में चंदोमल मेघवाड़ का शव एक पेड़ से लटका मिला। उनके शरीर पर प्रताड़ित किए जाने के गंभीर निशान मिले हैं। उन निशानों को देखकर आसानी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि किसी बात को मनवाने के लिए पहले चंदोमल को प्रताड़ित किया गया। इसके बावजूद जब वे नहीं झुके तो उन्हें मारकर पेड़ से लटका दिया गया गया। पाकिस्तान के सामाजिक कार्यकर्ता मुकेश मेघवाड़ कहते हैं, ‘‘पहले हिंदू लड़कियों के अपहरण और कन्वर्जन के ही मामले देखने-सुनने में आते थे। अब इस समुदाय को प्रताड़ित करने के लिए कट्टरवादियों ने और भी नए तरीके ढूंढ लिए हैं। कोरोना संक्रमण के दौरान जहां उन्हें भोजन-पानी का लालच देकर इस्लाम कबूलवाने का प्रयास किया गया, वहीं अब हिंदुओं की संपत्ति हड़पने की साजिश शुरू हो गई है।’’ बंटवारे के समय जो हिंदू पाकिस्तान में रह गए थे। 70 वर्ष बाद आज उनके जमीन-मकान की कीमत करोड़ों में पहुंच गई है, जिन्हें हथियाने के लिए कट्टरवादियों और मजहबियों के गठजोड़ ने अभियान छेड़ रखा है।
पाकिस्तान में हिंदुओं के साथ वह सब कुछ हो रहा है, जिसका शब्दों में वर्णन नहीं किया जा सकता है। मां-बाप के सामने किसी हिंदू लड़की को उठा लिया जाता है, उसके साथ बलात्कार किया जाता है और किसी अधेड़ पुरुष से निकाह कर दिया जाता है। जो लोग विरोध करते हैं, उन्हें अपनी जान से हाथ धोना पड़ता है।
ऐसे ही हिंदुओं की जमीन पर कब्जा करने के लिए छल, कपट और हत्या का सहारा लिया जाता है। इन घटनाओं का एक ही मकसद होता है कि पाकिस्तान से हिंदुओं को भगाना। हिंदुओं के साथ होने वाले इन अत्याचारों पर न तो कोई मानवाधिकार संगठन कुछ बोलता है और न ही वहां की सरकार कुछ करती है।     (लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं)