सिर्फ दिल्ली के लोगों के इलाज के फैसले पर केजरीवाल सरकार को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती

    दिनांक 09-जून-2020   
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दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने एक फैसले में कहा था कि दिल्‍ली सरकार के अधीन आने वाले अस्‍पतालों में सिर्फ दिल्‍ली वालों का ही इलाज किया जाएगा। लेकिन अब इस फैसले को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी गई है। याचिका में दिल्‍ली सरकार के फैसले को मौलिक अधिकारों का उल्‍लंघन बताया है
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पिछले दिनों दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने एक फैसले में कहा था कि दिल्‍ली सरकार के अधीन आने वाले अस्‍पतालों में सिर्फ दिल्‍ली वालों का ही इलाज किया जाएगा। मुख्यमंत्री द्वारा ऐसा कहने के बाद से ही इस मामले पर उनकी चहुंओर निंदा होने लगी। नागरिकों से लेकर राजनीतिक दलों ने दिल्ली सरकार के खिलाफ न केवल मोर्चा खोला बल्कि इस आदेश को लेकर उनकी तीखी आलोचना की। हालांकि इस विरोध के बाद दिल्ली के उपराज्यपाल अनिल बैजल ने दिल्ली सरकार के फैसले को पलटकर कोविड—19 के मरीजों का इलाज दिल्ली के अस्पतालों में जारी रखने का आदेश दिया है। लेकिन अभी भी कुछ बीमारियों के इलाज को लेकर संशय बना हुआ है। ऐसे में अब दिल्ली सरकार के इस फैसले को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी गई है। याचिका में दिल्‍ली सरकार के फैसले को मौलिक अधिकारों का उल्‍लंघन बताते हुए सर्वोच्च न्यायालय के अधिवक्ता सार्थक चतुर्वेदी ने सर्वोच्च न्यायालय में यह मांग की है कि 7 जून, 2020 को जारी आदेश को पूर्ण रूप से खारिज किया जाए।

दरअसल दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने एक आदेश जारी कर दिल्ली से बाहर के लोगों के इलाज को दिल्ली के अस्पतालों में रुकवा दिया था। याचिकाकर्ता के अनुसार कोविड 19 के अलावा अन्य मरीजों के बारे में कुछ भी साफ नहीं है, लिहाज़ा हमने न्यायालय में दाखिल अपनी याचिका में दिल्ली सरकार के इलाज न करने वाले आदेश को निरस्त करने की मांग की है। इस मामले पर याचिकाकर्ता सार्थक चतुर्वेदी बताते हैं कि दिल्ली सरकार का आदेश भारतीय संविधान की धारा 21 प्राण और दैहिक स्वतंत्रता के संरक्षण का साफ—साफ उल्लंघन है।

भारत का संविधान प्रत्येक नागरिक के जीवन जीने और निजी स्वतंत्रता को सुनिश्चित करता है। ऐसे में यह आदेश भारतीय संविधान की धारा 14, 15, 19 व 21 को दरकिनार कर दिया गया है। साथ ही निजी अस्पतालों से यह कहना कि दिल्ली के लोगों को ही इलाज मुहैया कराया जाए, यह न केवल भारतीय संविधान के विरुद्ध है, बल्कि एपिडेमिक एक्ट भी दिल्ली सरकार को इस तरह के आदेश जारी करने की स्वतंत्रता नहीं देता है ।

उल्लेखनीय है कि अरविंद केजरीवाल सरकार ने बीती 7 जून को घोषणा की थी कि दिल्‍ली सरकार के अधीन आने वाले अस्‍पतालों में कोरोना के लिए आवंटित बेड दिल्‍ली निवासियों के लिए सुरक्षित रहेंगे। पर इस फैसले को पलटते हुए उपराज्यपाल ने कोविड—19 मरीजों के इलाज की मंजूरी दे दी है, लेकिन बाकी अन्य बीमारियों को लेकर अभी भी संशय बरकरार है।