पाकिस्तानः हिंदू व्यापारियों को उजाड़ने की साजिश, आए दिन हो रहे हमले

    दिनांक 10-जुलाई-2020   
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पाकिस्तान में अब हिंदुओं का व्यापार छीनने का षड़यंत्र चल रहा है। हिंदू व्यापारियों पर बार—बार हमले किए जा रहे हैं, ताकि भयाक्रांत होकर घर बैठ जाएं। इस क्रम में हथियारबंद गुंडों ने सुक्कुर में एक हिंदू व्यापारी को गोलियां से छलनी कर दिया।

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पाकिस्तान में अब हिंदुओं का व्यापार छीनने का षड़यंत्र चल रहा है। हिंदू व्यापारियों पर बार—बार हमले किए जा रहे हैं, ताकि भयाक्रांत होकर घर बैठ जाएं। इस क्रम में हथियारबंद गुंडों ने सुक्कुर में एक हिंदू व्यापारी को गोलियां से छलनी कर दिया। वह इस समय अस्पताल के बेड पर पड़ा जिंदगी और मौत के बीच झूल रहा है।

मानिक लाल का पाकिस्तान के सिंध प्रांत के सुक्कुर शहर में अच्छा खासा व्यापार है। गत दिनों अचानक हथियारबंद मजहबियों ने उनके व्यापारिक प्रतिष्ठान पर हमला बोल दिया और ताबड़-तोड़ गोलियां चलानी शुरू कर दीं। वे मुंह पर कपड़ा लपेटे हुए थे। वे कौन थे ? स्थानीय पुलिस इसका अब तक पता नहीं लगा पाई है। मानिक लाल को छह से अधिक गोलियां लगी हैं। इस समय अस्पताल में उनका इलाज चल रहा है। उनकी हालत घटना के कई घंटे बाद गंभीर बनी हुई है।
 
इससे पहले घोटकी में सत्तन कुमार पर कट्टरपंथियों ने हमलाकर कर बुरी तरह घायल कर दिया था। इसके चलते उन्हें भी कई दिनों तक अस्पताल में रहना पड़ा था। हमलावर उनकी जमीन पर अवैध कब्जा करने की नियत से आए थे। विरोध करने पर उनकी बेरहमी से पिटाई कर दी गई। इसी तरह उमरकोट में हिमोन भील को हथियारबंद लोगों ने गोली मार कर मौत की नींद सुला दी। वह भी अपने इलाके में छोटा-मोटा व्यापार करता था।
 
आश्चर्य की बात है कि इन मामलों में अब तक किसी हमलावर की गिरफ्तारी नहीं हुई है। स्थानीय हिंदू सवाल उठा रहे हैं कि आखिर उनके मामले में पुलिस क्यों ढिलाई बरत रही है ? अपराधियों को क्यों नहीं पकड़ा जा रहा है ? पाकिस्तान की मुख्यधारा की मीडिया भी ऐसी घटनाओं को लगातार नजरंदाज कर रही है।

हिंदू व्यापारी मारे जा रहे हैं, उनपर जान लेवा हमले हो रहे हैं, उनके जमीन-व्यापार छीने जा रहे हैं, फिर भी मेनस्ट्रीम मीडिया इन खबरों को जगह नहीं दे रही है। सोशल मीडिया प्लेटफार्म नहीं होता तो ऐसी घटनाओं का पता ही नहीं चलता। हिंदुओं ने अपने उपर होने वाले हमले को लेकर सिंध प्रांत और केंद्र सरकार से सुरक्षा की गुहार लगाई है। उन्होंने सत्तारूढ़ दल के एमपी तथा मानवाधिकार मामलों के संसदीय सचिव लालचंद मल्ही से भी इस मामले में हस्तक्षेप कर सुरक्षा की गुहार लगाई है।