पश्चिम बंगाल में फांसी के फंदे से झूलता मिला भाजपा विधायक का शरीर, परिजनों ने जताई हत्या की आशंका

    दिनांक 13-जुलाई-2020   
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पश्चिम बंगाल में भाजपा के एक विधायक देबेन्द्र नाथ रॉय का मृत शरीर एक फंदे से झूलता हुआ पाया गया। ज्ञात हो कि भाजपा विधायक रॉय रविवार को ही अपने पैतृक गाँव बिंडोल पहुंचे थे। परिजनों का आरोप है कि रविवार रात 1 बजे कुछ युवक उन्हें बुलाने आए थे। इसके बाद से उनकी कोई जानकारी नहीं मिल पाई। घटना के बाद से राज्य में क़ानून-व्यवस्था पर सवाल उठने शुरू हो गए हैं

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पश्चिम बंगाल में भाजपा के एक विधायक का शरीर संदिग्ध अवस्था में एक फंदे से झूलता पाया गया। इस घटना के बाद से राज्य में क़ानून-व्यवस्था पर सवाल उठने शुरू हो गए हैं। दरअसल घटना सुदर्शनपुर स्थित रायगंज की है, जहां हेमताबाद के भाजपा विधायक देबेन्द्र नाथ रॉय का मृत शरीर एक फंदे से झूलता हुआ पाया गया। ज्ञात हो कि भाजपा विधायक रॉय रविवार को ही अपने पैतृक गाँव बिंडोल पहुंचे थे। परिजनों का आरोप है कि रविवार रात 1 बजे कुछ युवक उन्हें बुलाने आए थे। इसके बाद से उनकी कोई जानकारी नहीं मिल पाई। सोमवार की सुबह 7 बजे कुछ स्थानीय लोगों ने उन्हें फंदे से झूलता हुआ पाया। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस ने बताया कि विधायक का मृत शरीर बंद चाय की एक दुकान के सामने झूलता हुआ मिला। फ़िलहाल पोस्टमॉर्टम की प्रक्रिया पूरी की जा रही है। पुलिस ने अभी तक हत्या या आत्महत्या के बारे में कुछ भी नहीं कहा है।

इस घटना पर केंद्रीय राज्यमंत्री एवं पश्चिम बंगाल से सांसद देबश्री चौधरी ने उनकी मौत की जाँच की मांग की है। उन्होंने कहा कि भाजपा विधायक देबेन्द्र नाथ रॉय की मौत संदेहास्पद है, क्योंकि बंगाल में भाजपा के कार्यकर्ताओं को मारकर लटका दिया जाता है। इससे पहले भी त्रिलोचन महतो के साथ हुई घटना हम सब देख ही चुके हैं। इसलिए मैं मांग करती हूं कि इस घटना की सीबीआई जांच कराई जाए, ताकि सच सामने आ सके और इस हत्या के पीछे कौन से तत्व हैं, उनके चेहरे उजागर हो सकें। साथ ही मैं इस घटना पर कुछ लोगों ने इतना जरूर कहूंगी कि एक दो विधायकों को मारने से कोई फायदा नहीं होगा।

अब पश्चिम बंगाल के लोगों ने मन बना लिया है कि वह इस सरकार को हटाएगी। उन्होंने बंगाल प्रशासन पर सवाल उठाते हुए कहा कि राज्य का शासन—प्रशासन एक विधायक को सुरक्षा नहीं दे पाता है। ऐसे में समझा जा सकता है कि यहां की स्थिति क्या है। आज राज्य में बड़ी विकृत मानसिकता काम कर रही है, जिसके बारे में जितना कहा जाए वह कम है। बंगाल की मुख्यमंत्री ने भाजपा के सभी सांसदों पर पाबंदी लगाकर रखी हुई है, ताकि वह बाहर जाकर जनता की सेवा न कर पाएं। लोगों से मिल न पाएं। ऐसा करके तृणमूल पार्टी के लोग राज्य की जनता को दिखाना चाहते हैं कि देखिए, जो भी राज्य के लोगों के लिए करती हैं वह ममता बनर्जी ही करती हैं, बाकी लोग नहीं करते। जबकि हकीकत कुछ और ही होती है। हकीकत में देखा जाए तो राज्य की स्थितियां बड़ी ही नाजुक हैं और सारी चीजें राज्य सरकार के नियंत्रण से बाहर जा चुकी हैं। इसके पीछे स्पष्ट कारण है कि राज्य की मुख्यमंत्री हर जगह मैं शब्द को ही लाती हैं। जिन दिन वह हम शब्द लाने लगेंगी, उस दिन से राज्य में चहुंओर विकास होने लगेगा। राज्य की जनता को ज्यादा से ज्यादा सुरक्षा और विकास मिलने लगेगा। लेकिन वह तो अपने विरोधियों को देखना ही नहीं चाहती हैं।
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मृतक विधायक के घर जाकर केंद्रीय मंत्री देबश्री चौधरी ने शोक संतृप्त परिवार के प्रति सांत्वना व्यक्त की एवं स्थानीय लोगों से चर्चा की।
इसी तरह भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव एवं पश्चिम बंगाल के प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय ने विधायक की मौत पर पर राज्य सरकार को घेरते हुए इसे निंदनीय और कायरतापूर्ण कृत्य बताया। उन्होंने एक ट्वीट कर लिखा— ममता बनर्जी के राज में भाजपा नेताओं की हत्या का दौर थम नहीं रहा। सीपीएम छोड़कर भाजपा में आये हेमताबाद के विधायक श्री देबेंद्र नाथ रॉय की हत्या कर दी गई। उनका शव फांसी पर लटका मिला। क्या इनका गुनाह सिर्फ भाजपा में आना था ? उन्होंने आगे लिखा लोकतंत्र को कैसे कुचला जाता है पश्चिम बंगाल की ममता सरकार इसका जीवंत उदाहरण है। राजनीतिक मतभेदों को हिंसक तरीके से दबाया जा रहा है। लेकिन, लोकतंत्र का ये मख़ौल ज्यादा दिन का नहीं है! आखिर ममता राज का फैसला तो जनता ही करेगी।
 विधायक की हुई है हत्या
विधायक की पत्नी और पूर्व पंचायत प्रमुख चांदीमा रॉय ने भी अपने पति की साजिशन हत्या की आशंका जताई। उनका कहना है कि यह हत्या है और हमारे पति को साजिश के तहत लटका दिया गया।
गौरतलब है कि यह पहला मौका नहीं है जब पश्चिम बंगाल में भाजपा कार्यकर्ताओं—नेताओं की संदिग्ध मौत सामने आई हो, इससे पहले भी राज्य के अलग—अलग हिस्सों से इसी तरह की घटनाएं प्रकाश में आती रही हैं। ऐसे में ममता बनर्जी शासन और प्रशासन पर सवाल उठना जायज है।