पश्चिम बंगाल: कट्टरवाद के खिलाफ डटकर मोर्चा लेने वाले तपन घोष का अवसान

    दिनांक 13-जुलाई-2020   
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श्री तपन घोष का पूरा जीवन हिन्दू कार्य व हिंदुओं को एकजुट करने के लिए था। बंगाल में हजारों हजार हिन्दुओं के लिए वे प्रेरणा स्रोत थे। उन्होंने राज्य में अराजक ताकतों और कट्टरवादी शक्तियों से जमकर मोर्चा लेते हुए हिन्दू समाज को संगठित करने का काम किया

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पश्चिम-बंगाल के जाने-माने प्रखर हिन्दू नेता तपन घोष का 12 जुलाई की शाम 7 बजे कोलकाता के मेडिका हॉस्पिटल में देहांत हो गया। 28 जून को कोरोना पॉजिटिव होने के कारण इलाज के लिए उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था. ऑक्सीजन की कमी के चलते फेफड़े ठीक से कार्य नहीं कर पा रहे थे, जिससे उन्हें सांस लेने में काफी दिक्कत हो रही थी। उनके निधन की खबर आते ही देश ही नहीं अपितु दुनिया भर में रह रहे हिन्दुत्वनिष्ठ कार्यकर्ताओं में शोक की लहर दौड़ गयी।

उल्लेखनीय है कि 1982 से लेकर 1992 तक अभाविप में पश्चिम-बंगाल प्रान्त संगठन मंत्री का दायित्व निभाते हुए वह पूर्णकालिक बने। इसके बाद कार्य योजनानुसार 1997 में उन्हें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में भेजकर 24 परगना का विभाग प्रचारक बनाया गया। संघ को जमीनी स्तर पर मजबूत करने के साथ ही सीमा क्षेत्र में होने वाली आसामाजिक गतिविधियों की रोकथाम के लिए उन्होंने हर स्तर पर प्रयास किया। वह लगातार पश्चिम-बंगाल और बांग्लादेश में हिन्दुओं के ऊपर होने वाले अत्याचारों को लेकर मुखर रहे। 2001 में सुंदरबन के सोनाखाली में 4 स्वयंसेवकों को मार दिया गया था, तब तपन घोष जी ने यह लड़ाई लड़ी और दिल्ली तक इसकी आवाज पहुंचाई।सांगठनिक व हिन्दू कार्य को देखते हुए श्री घोष को 2001 से 2005 तक उत्तर क्षेत्र के बजरंगदल के संयोजक का दायित्व देकर दिल्ली भेज दिया गया। उसके बाद 2005 से 2007 तक उनको पूर्व क्षेत्र के संयोजक का भी दायित्व दिया गया। पड़ोसी देश बांग्लादेश में हिंदुओं पर होने  वाले अत्याचारों से वह व्यथित रहते थे और उनके अधिकारों के लिए हर दम आवाज बुलंद करते थे। 2001 में हिन्दुओं के ऊपर हो रहे अत्याचार से बचाने के लिए बांग्लादेश की कई यात्राएं की और हिन्दुओं के जनजागरण के लिएअद्भुत कार्य किया। 

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 पश्चिम-बंगाल में हिन्दू जागरण के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण कार्य करने वाले श्री तपन घोष इतने ओजस्वी वक्ता थे कि उनकी एक आवाज से हजारों हिन्दू एकत्र हो जाते थे। राज्य में उनके बढ़ते हुए प्रभाव से डरकर वर्तमान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने उनके भाषणों पर रोक लगा दी थी।

कोलकाता विश्वविधालय से भौतिक विज्ञान (H) में गोल्ड मेडलिस्ट स्व. घोष ने हिंदुत्व के कार्य को गति देने के लिए 2007 में स्वतंत्र स्वावलम्बी  “हिन्दू संहति” नाम के स्वयं के संगठन का गठन किया। यह संगठन अल्प समय में ही पश्चिम बंगाल में विराट संगठन के रूप में खड़ा हो गया। हिंदुत्व व हिन्दू जनजागरण के लिए हिन्दू संहति ने किसी भी सीमा में जाकर कार्य किया।

दिल्ली में बजरंग दल का कार्य हो,2005 में बुड्ढा अमरनाथ यात्रा में उनकी संगठन क्षमता, नौजवानों को प्रभावित करने की योग्यता वह भी जम्मू कश्मीर स्थित पुंछ जैसे अपरिचित क्षेत्र में या फिर बजरंग दल के प्रशिक्षण वर्गों का पाठ्यक्रम निर्धारण हो, उनकी अद्भुत कार्यक्षमता का हर जगह दर्शन हुआ। 2008 में कांग्रेस सरकार द्वारा बजरंग दल सहित अनेक हिंदू संगठनों के कार्यकर्ताओं को जब "भगवा आतंकवाद"के नाम पर क्रूरतम तरीके से प्रताड़ित किया गया तो श्री घोष ने उसका सामना जिस साहस से किया और संगठन पर आंच नही आने दी वह अतुलनीय था। ऐसे देव दुर्लभ कार्यकर्ता, कुशल संगठक, वक्ता, लेखक संघर्षकर्ता का यूं असमय चला जाना हिन्दुत्वनिष्ठ कार्यकर्ताओं को खल गया।

स्व. तपन घोष का पूरा जीवन हिन्दू कार्य व हिंदुओं को एकजुट करने के लिए था। बंगाल में हजारों हजार हिन्दुओं के लिए वे प्रेरणा स्रोत थे। उनके निधन की खबर आते ही राज्य के हिंदुओं में शोक की लहर दौड़ गयी। हरेक उनके दिवंगत होने से स्तब्ध था।