इमरान सरकार की खुली कलई, कट्टरपंथियों के दबाव में मंदिर निर्माण के लिए धन जुटाने से खड़े किए हाथ

    दिनांक 13-जुलाई-2020   
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इमरान खान अपने देश के अल्पसंख्यकों के अधिकारों के प्रति कितने सजग हैं, इसकी कलई पाकिस्तान की नेशनल एसेंबली में खुल गई। इस्लामाबाद में कृष्ण मंदिर के निर्माण को लेकर जारी विवादों पर चर्चा के दौरान मजहबी मामलों के मंत्री नूरुल हक कादरी ने इसके लिए पैसे जुटाने से हाथ खड़े कर दिए।
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इमरान खान अपने देश के अल्पसंख्यकों के अधिकारों के प्रति कितने सजग हैं, इसकी कलई पाकिस्तान की नेशनल एसेंबली में खुल गई। इस्लामाबाद में कृष्ण मंदिर के निर्माण को लेकर जारी विवादों पर चर्चा के दौरान मजहबी मामलों के मंत्री नूरुल हक कादरी ने इसके लिए पैसे जुटाने से हाथ खड़े कर दिए। उन्होंने कहा कि असली मुद्दा मंदिर निर्माण का नहीं, इसके लिए पैसे कहां से आएंगे, यह अहम सवाल है। हालांकि, इस मामले में एक अन्य मंत्री ने कहा है कि यदि मंदिर निर्माण नहीं हुआ तो सरकार के बारे में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान के अल्पसंख्यकों के अधिकारों के प्रति गलत संदेश जाएगा।

उल्लेखनीय है कि पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद के सेक्टर एच-9 में एक भव्य कृष्ण मंदिर सह सामुदायिक केंद्र प्रस्तावित है। इसके लिए इमरान खान सरकार ने चार कनाल जमीन आवंटित की है। मंदिर निर्माण पर अनुमाति 50 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इसके लिए 10 करोड़ रुपये की पहली किस्त जल्द जारी करने का सरकार की ओर से ऐलान किया गया है। मगर ये पैसे अब तक जारी नहीं किए गए हैं। न ही कट्टरपंथी आवंटित जगह पर मंदिर निर्माण करने दे रहे हैं। मंदिर निर्माण इस्लामाबाद हिंदू पंचायत की देख-रेख में हो रहा है। सरकार से फंड नहीं मिलने के बावजूद पंचायत अपने पैसे से चारदीवारी खड़ी करने का काम कर रही थी, जिसे कट्टरपंथी जमायतों ने न केवल रोक दिया बल्कि अर्धनिर्मित चारदीवारी भी ढहा दी।

इस घटना के बाद से पाकिस्तन का सियासी माहौल गर्म है। मंदिर निर्माण के समर्थन में जहां कुछ लोग आंदोलनरत हैं, वहीं मजहबियों का गुट इसकी राह में रोड़े अटका रहा है। इसी सिलसिले में इस्लामाबाद हाई कोर्ट में तीन याचिकाएं दायर की गई हैं। इसके आधार पर कोर्ट ने यह कहते हुए मंदिर निर्माण रुकवा दिया कि इसमें इस्लामाबाद की विकास एजेंसी के नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है।

इसी मुदृदे पर गत दिनों नेशनल एसेंबली में चर्चा के दौरान मजहबी मामलों के मंत्री नूरुल हक कादरी ने एक तरह से स्पष्ट कर दिया कि देश में अल्पसंख्यकों पर बढ़ते अत्याचार की घटना पर पर्दा डालने के लिए भले मंदिर निर्माण का ऐलान कर दिया गया, पर इस योजना को पूरा कराना उसके बस की बात नहीं। मंत्री ने नेशनल एसेंबली में इस मुदृदे पर चर्चा के दौरान बताया कि अल्पसंख्यकों के अधिकारों का संरक्षण सत्तारूढ़ पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ के एजेंडे में शामिल है। मंदिर निर्माण के लिए जब कुछ अल्पसंख्यक सांसद उनसे धन की व्यवस्था करने को लेकर मिले तो उन्हें स्पष्ट कर दिया गया कि सरकार के पास वर्तमान पूजास्थलों के नवीनीकरण के लिए इतना बजट नहीं जिससे नए मंदिर का निर्माण किया जा सके।

उन्होंने संसद को बताया कि चूंकि मंदिर के निर्माण में जनता का पैसा लगेगा। इसलिए सांसदों के अनुरोध पर उन्होंने इस मामले से प्रधानमत्री कार्यालय को अगाह कर दिया। मगर उसकी ओर से अब तक कोई जवाब नहीं आया है, न ही धन की व्यवस्था करने के मामले में कोई प्रगति हुई है। इसके अलावा यह जानने के लिए कि जनता का पैसा मंदिर निर्माण पर खर्च हो सकता है अथवा नहीं इस पर राय लेने के लिए इस मसले को ‘काउंसिल ऑफ इस्लामिक ऑडियोलॉजी’ के पास भेजा गया है। सवाल है कि यदि मंदिर निर्माण को लेकर इतनी समस्याएं थीं तो केंद्र की इमरान खान सरकार ने इसकी घोषणा करने से पहले तमाम बाधाओं को दूर करना जरूरी क्यों नहीं समझा ? कट्टरपंथी सवाल उठा रहे हैं कि इस्लामिक नजरिए से उनके पैसे का इस्तेमाल मंदिर निर्माण पर खर्च नहीं किया जा सकता। इस बारे में विरोध जताने के लिए ही उन्होंने  इस्लामाबाद हाई कोर्ट में याचिकाएं दायर की हैं।
 
हालांकि इस मसले पर मानवाधिकार मंत्री शिरीन मजारी के विचार अलग हैं। उन्होंने मंदिर निर्माण की वकालत करते हुए कहा कि अल्पसंख्यकों को उनके पूजा स्थलों और संविधान के तहत उन्हें दिए गए अधिकारों से वंचित नहीं किया जा सकता। इससे दुनिया में गलत संदेश जाएगा। नेशनल एसेंबली में अपनी बात रखते हुए कहा कि मंदिर निर्माण नहीं होने से दुनिया में अल्पसंख्यकों के अधिकारों को लेकर गलत संदेश जाएगा। मानवाधिकार मंत्री ने पीएमएल-एन नेता ख्वाजा आसिफ के इस मामले में उठाए गए सवाल पर चिंता प्रकट करते हुए कहा कि सोशल मीडिया पर अल्पसंख्यकों के खिलाफ योजनाबद्ध अभियान चलाया जा रहा है, जो ठीक नहीं। हम हिंदुओं और उनके अधिकारों को खतरे में नहीं डाल सकते। हिंदुओं के विरुद्ध दुष्प्रचार करने वालों के खिलाफ सबूत मिलने पर कार्रवाई की जाएगी।