विस्तारवाद नहीं, विकासवाद

    दिनांक 15-जुलाई-2020   
Total Views |

चीन के विस्तारवादी रवैए और गलवान में उसके सीमा अतिक्रमण के बाद भारत के सैनिकों द्वारा दिखाए शौर्य से पूरा देश गौरवान्वित है। उस मुठभेड़ में घायल भारतीय सैनिकों का हाल-चाल पूछने और सीमा की चौकसी की जानकारी लेने गत 3 जुलाई को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी लेह गए थे। वहां उन्होंने 14वीं कोर को संबोधित करते हुए विस्तारवादी चीन को चुनौती दी थी। उन्होंने कहा कि आज पूरा विश्व भारत के विकासवाद को सराह रहा है। यहां प्रस्तुत हैं प्रधानमंत्री के उसी संबोधन के संपादित अंश

032_1  H x W: 0
लेह में सैनिकों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी
 

सिंधु के आशीर्वाद से लद्दाख की धरती पुण्य हुई है। वीर सपूतों के शौर्य और पराक्रम की गाथाओं को ये धरती अपने-आपमें समेटे हुए है। लेह-लद्दाख से लेकर करगिल और सियाचिन तक, रेजांग ला की बर्फीली चोटियों से लेकर गलवान घाटी के ठंडे पानी की धारा तक, हर चोटी, हर पहाड़, जर्रा-जर्रा, हर कंकड़-पत्थर भारतीय सैनिकों के पराक्रम की गवाही देता है। 14 वीं कोर की जांबाजी के किस्से तो हर तरफ हैं। दुनिया ने आपका अदम्य साहस देखा है, जाना है। आपकी शौर्य गाथाएं घर-घर में गूंज रही हैं और भारत माता के दुश्मनों ने आपकी फायर भी देखी है और आपकी फ्यूल भी।

लद्दाख का तो ये पूरा हिस्सा, ये भारत का मस्तक, 130 करोड़ भारतीयों के मान-सम्मान का प्रतीक है। ये भूमि भारत के लिए सर्वस्व त्याग करने के लिए हमेशा तैयार रहने वाले राष्ट्रभक्तों की धरती है। इस धरती ने कुशक बकुला रिनपोछे जैसे महान राष्ट्रभक्त देश को दिए हैं। ये रिनपोछे जी हैं, जिन्होंने दुश्मन के नापाक इरादों पर स्थानीय लोगों को लामबंद किया। रिनपोछे की अगुआई में यहां अलगाव पैदा करने की हर साजिश को लद्दाख की राष्ट्रभक्त जनता ने नाकाम किया है। ये उन्हीं के प्रेरक प्रयासों का परिणाम था कि देश को, भारतीय सेना को लद्दाख स्काउट नाम से इंफेंट्री रेजीमेंट बनाने की प्रेरणा मिली। आज लद्दाख के लोग हर स्तर पर, चाहे वह सेना हो या सामान्य नागरिक के कर्तव्य हों, राष्ट्र को सशक्त करने के लिए अद्भुुत योगदान दे रहे हैं।

वीरों की धरती
हमारे यहां कहा जाता है-
खड्गेन आक्रम्य भुंजीत:, वीर भोग्या वसुंधरा
यानी वीर अपने शस्त्र की ताकत से ही धरती की, मातृभूमि की रक्षा करते हैं। ये धरती वीर-भोग्या है, वीरों के लिए है। इसकी रक्षा-सुरक्षा का हमारा समर्थन और सामर्थ्य, हमारा संकल्प हिमालय जितना ही ऊंचा है। ये सामर्थ्य और ये संकल्प, इस समय आपकी आंखों में मैं देख सकता हूं। आपके चेहरों पर ये साफ-साफ नजर आता है। आप उसी धरती के वीर हैं जिसने हजारों वर्षों से अनेक आक्रांताओं के हमलों का, अत्याचारों का मुंहतोड़ जवाब दिया है। और ये हमारी पहचान है, हम वो लोग हैं जो बांसुरीधारी कृष्ण की पूजा करते हैं। हम वही लोग हैं जो सुदर्शन चक्रधारी कृष्ण को भी आदर्श मान करके चलते हैं। इसी प्रेरणा से आक्रमण के बाद भारत और सशक्त होकर उभरा है।


032_1  H x W: 0

विस्तारवाद ने मानवता का सबसे ज्यादा अहित किया, मानवता का विनाश करने का प्रयास किया। इतिहास गवाह है कि विस्तारवादी ताकतें मिट गई हैं या मुड़ने के लिए मजबूर हो गई हैं। विश्व का हमेशा यही अनुभव रहा है और इसी अनुभव के आधार पर अब इस बार फिर पूरे विश्व ने विस्तारवाद के खिलाफ मन बना लिया है। आज विश्व विकासवाद को समर्पित है और विकास की खुली स्पर्धा का स्वागत कर रहा है।
-प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी


राष्ट्र की, दुनिया की, मानवता की प्रगति के लिए शांति और मित्रता हर कोई स्वीकार करता है, हर कोई मानता है, यह बहुत जरूरी है। लेकिन हम ये भी जानते हैं कि शांति निर्बल कभी नहीं ला सकते। कमजोर शांति की पहल नहीं कर सकते। वीरता ही शांति की पूर्व शर्त होती है। भारत आज जल, थल, नभ और अंतरिक्ष तक अगर अपनी ताकत बढ़ा रहा है तो उसके पीछे का लक्ष्य मानव कल्याण ही है। भारत आज आधुनिक अस्त्र-शस्त्र का निर्माण कर रहा है। हम दुनिया की आधुनिक से आधुनिक तकनीक भारत की सेना के लिए ला रहे हैं तो उसके पीछे की भावना भी यही है। भारत अगर आधुनिक इन्फ्रास्ट्रक्चर का निर्माण तेजी से कर रहा है तो उसके पीछे का संदेश भी यही है।

विश्व युद्ध हो या फिर शांति की बात, जब भी जरूरत पड़ी है विश्व ने हमारे वीरों का पराक्रम भी देखा है और विश्व शांति के उनके प्रयासों को महसूस भी किया है। हमने हमेशा मानवता की, इंसानियत की रक्षा और सुरक्षा के लिए काम किया है, जीवन खपाया है। आप सभी भारत के इसी लक्ष्य को, भारत की इसी परंपरा को, भारत की इसी महान संस्कृति को स्थापित करने वाले अगुआ हैं।

भारत आज जल, थल, नभ और अंतरिक्ष तक अगर अपनी ताकत बढ़ा रहा है तो उसके पीछे का लक्ष्य मानव कल्याण ही है। भारत आज आधुनिक अस्त्र-शस्त्र का निर्माण कर रहा है। हम दुनिया की आधुनिक से आधुनिक तकनीक भारत की सेना के लिए ला रहे हैं तो उसके पीछे की भावना भी यही है। भारत अगर आधुनिक  इन्फ्रास्ट्रक्चर का निर्माण तेजी से कर रहा है तो उसके पीछे का संदेश भी यही है।


महान संत तिरुवल्लुवर जी ने सैकड़ों वर्ष पूर्व कहा था-
शौर्य, सम्मान, मयार्दापूर्ण व्यवहार की परम्परा और विश्वसनीयता, ये चार गुण किसी भी देश की सेना का प्रतिबिम्ब होते हैं। भारतीय सेनाएं हमेशा से इसी मार्ग पर चली हैं।

विकासवाद का युग
विस्तारवाद का युग समाप्त हो चुका है, ये युग विकासवाद का है। तेजी से बदलते हुए समय में विकासवाद ही प्रासंगिक है। विकासवाद के लिए ही अवसर हैं और विकासवाद ही भविष्य का आधार भी है। बीती शताब्दियों में विस्तारवाद ने ही मानवता का सबसे ज्यादा अहित किया, मानवता को विनाश करने का प्रयास किया। विस्तारवाद की जिद जब किसी पर सवार हुई है, उसने हमेशा विश्व शांति के सामने खतरा पैदा किया है। इतिहास गवाह है कि ऐसी ताकतें मिट गई हैं या मुड़ने के लिए मजबूर हो गई हैं। विश्व का हमेशा यही अनुभव रहा है और इसी अनुभव के आधार पर अब इस बार फिर पूरे विश्व ने विस्तारवाद के खिलाफ मन बना लिया है। आज विश्व विकासवाद को समर्पित है और विकास की खुली स्पर्धा का स्वागत कर रहा है।

032_1  H x W: 0
अस्पताल में घायल सैनिकों से भेंट करते हुए प्रधानमंत्री
जब मैं राष्ट्र रक्षा से जुड़े किसी निर्णय के बारे में सोचता हूं तो सबसे पहले दो माताओं का स्मरण करता हूं-पहली, हम सभी की भारतमाता, और दूसरी, वे वीर माताएं जिन्होंने आप जैसे पराक्रमी योद्धाओं को जन्म दिया है, मैं उन दो माताओं को स्मरण करता हूं। मेरे निर्णय की कसौटी यही है। इसी कसौटी पर चलते हुए आपके सम्मान, आपके परिवार के सम्मान और भारत माता की सुरक्षा को देश सर्वोच्च प्राथमिकता देता है। सेनाओं के लिए आधुनिक हथियार हों या आपके लिए जरूरी साजो-सामान, इन सभी पर हम बहुत ध्यान देते रहे हैं। अब देश में बॉर्डर इन्फ्रास्ट्रक्चर पर खर्च करीब-करीब तीन गुना कर दिया गया है। इससे बॉर्डर एरिया डेवलपमेंट और सीमा पर सड़कें, पुल बनाने का काम भी बहुत तेजी से हुआ है। इसका एक बहुत बड़ा लाभ ये भी हुआ है कि अब आप तक सामान भी कम समय में पहुंचता है।

सेनाओं में बेहतर समन्वय के लिए लंबे समय से जिसकी आशा थी उस चीफ आॅफ डिफेंस पद का गठन करने की बात हो या फिर राष्टÑीय युद्ध स्मारक का निर्माण; वन रेंक वन पेंशन का फैसला हो या फिर आपके परिवार की देखरेख से लेकर शिक्षा तक की सही व्यवस्था के लिए लगातार काम, देश आज हर स्तर पर अपनी सेनाओं और सैनिकों को मजबूत कर रहा है।
भगवान गौतम बुद्ध ने कहा है-‘साहस का संबंध प्रतिबद्धता से है। साहस करुणा है। साहस वह है जो हमें निर्भीक और अडिग होकर सत्य के पक्ष में खड़े होना सिखाए। साहस वह है जो हमें सही को सही कहने और करने की ऊर्जा देता है’। देश के वीर सपूतों ने गलवान घाटी में जो अदम्य साहस दिखाया, वह पराक्रम की पराकाष्ठा है। देश को आप पर गर्व है, आप पर नाज है। आपके साथ ही हमारे आईटीबीपी के जवान हों, बीएसएफ के साथी हों, हमारे बीआरओ और दूसरे संगठनों के जवान हों, मुश्किल हालात में काम कर रहे इंजीनियर हों, श्रमिक हों; आप सभी अद्भुत काम कर रहे हैं। हर कोई कंधे से कंधा मिलाकर मां भारती की रक्षा के लिए, मां भारती की सेवा में समर्पित है। आज आप सभी की मेहनत से देश अनेक आपदाओं से एक साथ और पूरी दृढ़ता से लड़ रहा है। आप सभी से प्रेरणा लेते हुए हम मिलकर मुश्किल से मुश्किल चुनौती पर विजय प्राप्त करते रहे हैं, विजय प्राप्त करते रहेंगे। हम सबने जिस भारत के सपने को लेकर, और विशेषरूप से आप सब सरहद पर देश की रक्षा कर रहे हैं, उस सपने का भारत बनाएंगे। आपके सपनों का भारत बनाएंगे। 130 करोड़ देशवासी भी पीछे नहीं रहेंगे, ये मैं आज आपको विश्वास दिलाने आया हूं। हम एक सशक्त और आत्मनिर्भर भारत बनाएंगे, बना करके ही रहेंगे। जब आपसे प्रेरणा मिलती है तो आत्मनिर्भर भारत का संकल्प भी और ताकतवर हो जाता है।