प्राकृतिक गैस: विकास का र्इंधन

    दिनांक 15-जुलाई-2020
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अरविंद मिश्रा
केंद्र सरकार ने तरलीकृत प्राकृतिक गैस को आम आदमी तक पहुंचाने के लिए कई कदम उठाए हैं। उम्मीद है कि इससे देश की प्रगति को गति मिलेगी और लोगों को सस्ती ऊर्जा सुलभ होगी
 
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तरलीकृत प्राकृतिक गैस का एक संयंत्र

गत दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आत्मनिर्भर भारत की संकल्पना प्रस्तुत की थी। इसके बाद ‘वर्ल्ड एनर्जी फोरम’ और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी समेत दुनिया के कई अन्य संगठनों ने आत्मनिर्भर भारत की यात्रा में प्राकृतिक गैस की विशेष भूमिका को रेखांकित किया है। यह पर्यावरण अनुकूल टिकाऊ विकास का प्रमुख आधार तो है ही 21वीं सदी के अनुकूल आधारभूत संरचना की आवश्यकता को पूर्ण करने वाला सक्षम संसाधन भी है। इसमें कोई दो मत नहीं कि केंद्र की मोदी सरकार ने देश के ऊर्जा परिदृश्य में प्राकृतिक गैस की हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए कई प्रभावी कदम उठाए हैं। इनमें पहला, पेट्रोलियम एंड नेचुरल गैस रेगुलेटरी बोर्ड (पीएनजीआरबी) द्वारा लिया गया वह फैसला है, जिसमें कहा गया है कि कोई भी कंपनी एलएनजी स्टेशन खोल सकती है। इसके लिए किसी भी प्रकार के सिटी गैस वितरण या अन्य लाइसेंस की आवश्यकता नहीं होगी। देश के परिवहन को प्राकृतिक गैस की ओर प्रोत्साहित करने की दिशा में इसे बड़ा कदम माना जा रहा है। इससे देश में एलएनजी स्टेशन लगाने को लेकर बन रही भ्रम की स्थिति दूर होगी। वहीं निजी कंपनियों के साथ सरकारी कंपनियों के लिए भी एलएनजी स्टेशन स्थापित करने के रास्ते खुल जाएंगे। इस फैसले से गेल को 6,000 किलोमीटर लंबे स्वर्णिम चतुर्भुज एक्सप्रेस-वे के किनारे एलएनजी नेटवर्क स्थापित करने से जुड़ी परियोजना में भी मदद मिलेगी।

ऊर्जा क्षेत्र से जुड़ा दूसरा अहम फैसला देश का पहला ‘गैस ट्रेडिंग एक्सचेंज’ का शुरू होना है। लंबे इंतजार के बाद देश का पहला राष्ट्रीय स्तर पर ‘आॅनलाइन डिलीवरी’ पर आधारित गैस कारोबार मंच, इंडियन गैस एक्सचेंज शुरू हो गया है। इससे भारत में बहुप्रतीक्षित गैस का कारोबारी विनिमय शुरू हो गया। वैसे इसकी परिकल्पना राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार के पहले कार्यकाल में की गई थी। यह एक तरह से मानक गैस अनुबंधों के साथ गैस के कारोबार को सुगम बनाना है। इसे भारत के ऊर्जा इतिहास में एक नए अध्याय के रूप में देखा जाना चाहिए। सरल शब्दों में कहें तो इससे प्राकृतिक गैस की कीमतों को खुले बाजार की प्रतिस्पर्धा के आधार पर तार्किक बनाने में मदद मिलेगी। इससे प्रदूषण रहित प्राकृतिक गैस के वितरण व विनिमय में सार्वजनिक सहभागिता भी बढ़ेगी। हालांकि गैस कारोबार मंच के नियामकीय पहलुओं पर अभी सरकार को ध्यान देना होगा। इस समय न तो सरकार और न ही पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस नियामक बोर्ड ने एलएनजी के लिए कोई नियमन तैयार किया है। कीमतों को लेकर समझौता करने वाले पक्ष मोलभाव कर सकते हैं, जबकि भारत में उत्पादित गैस के मूल्य की अधिसूचना सरकार जारी करेगी। सरकारी कंपनियों द्वारा उत्पादित गैस की निविदा की आपूर्ति का काम सरकारी मानकों के मुताबिक होगा।
 
क्या है एलएनजी
तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) प्राकृतिक गैस का एक तरल रूप है। इसे आमतौर पर जहाजों के माध्यम से बड़ी मात्रा में उन देशों में भेजा जाता है जहां पाइपलाइन का जाना संभव नहीं है। प्राकृतिक गैस को 160 डिग्री सेल्सियस तक ठंडा कर तरल अवस्था में लाया जा सकता है जिससे कि यह गैसीय मात्रा के मुकाबले 1/600वें हिस्से में रखी जा सके। प्राकृतिक गैस से तरलीकृत प्राकृतिक गैस बनाने की प्रक्रिया के दौरान बहुत सारी अशुद्धियां निकल जाती हैं। इसलिए एलएनजी को प्राकृतिक गैस का शुद्धतम रूप माना जाता है।

वर्तमान में पीएनजीआरबी ही गैस की कीमतों को तार्किक व पारदर्शी बनाने की दिशा में कार्य कर रहा है। जाहिर है कि अब पीएनजीआरबी की भूमिका और बढ़ जाएगी। देश की अर्थव्यवस्था को 5 ट्रिलियन डॉलर के स्तर पर ले जाने के लिए आवश्यक है कि प्राकृतिक गैस आधारित ऊर्जा के प्रयोग बढ़ें। इसकी प्रासंगिकता तब और बढ़ जाती है जब यह र्इंधन के अन्य परंपरागत स्रोतों के मुकाबले अधिक किफायती होने के साथ पर्यावरण अनुकूल भी है। यही वजह है कि केंद्र सरकार विगत कुछ वर्षों में देश में एलएनजी नेटवर्क का विस्तार करने में जुटी है। फिलहाल देश में एलएनजी टर्मिनल की मौजूदा क्षमता 39.2 एमएमटीपीए है। अगले दो-तीन वर्ष में इसमें निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ने से बड़ी वृद्धि होगी। खास बात यह है कि देश की भौगोलिक क्षमता की ताकत को पहचानते हुए हमने पूर्वी और पश्चिमी छोर में गैस टर्मिनल स्थापित किए हैं। देश में गैस की आपूर्ति में कोई कमी न हो इस हेतु विश्व के कई देशों के साथ करार किए गए हैं। मध्य-पूर्व, रूस, अमेरिका और आॅस्ट्रेलिया इनमें प्रमुख हैं। इसे भारत की ऊर्जा कूटनीति की सफलता ही कहा जाएगा कि भारत अब प्राकृतिक गैस के लिए मध्य-पूर्व या अमेरिका पर निर्भर रहने के बजाय विश्व के कई देशों के साथ द्विपक्षीय समझौतों पर आगे बढ़ रहा है। मध्य-पूर्व के कई देशों को तो भारत प्राकृतिक गैस के बदले इस्पात का निर्यात भी कर रहा है। प्राकृतिक गैस से जुड़े आर्थिक अवसरों को भुनाने के लिए हमें घरेलू मोर्चे पर इसका वितरण व आपूर्ति तंत्र व्यवस्थित करना होगा। पाइपलाइन के जरिए प्राकृतिक गैस की एक स्थान से दूसरे स्थान तक आपूर्ति अन्य परिवहन साधनों की तुलना में काफी किफायती होती है।

मोदी सरकार ने देश के ऊर्जा परिदृश्य में प्राकृतिक गैस की हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए कई प्रभावी कदम उठाए हैं। इनमें पहला, पेट्रोलियम एंड नेचुरल गैस रेगुलेटरी बोर्ड (पीएनजीआरबी) द्वारा लिया गया वह फैसला है, जिसमें कहा गया है कि कोई भी कंपनी एलएनजी स्टेशन खोल सकती है। इसके लिए किसी भी प्रकार के सिटी गैस वितरण या अन्य लाइसेंस की आवश्यकता नहीं होगी।

वर्तमान में देश में लगभग 16,788 किलोमीटर पाइपलाइन नेटवर्क स्थापित है, जबकि 14,500 किलोमीटर पाइपलाइन के निर्माण को मंजूरी दी जा चुकी है। इससे देश में स्थापित हो रही नेशनल गैस ग्रिड में उन क्षेत्रों को भी शामिल करने में मदद मिलेगी जो अब तक गैस आधारित अर्थव्यवस्था के इस विशाल परियोजना से अछूते हैं। सिटी गैस वितरण (सीजीडी) के 9वें व 10वें दौर की सफलतम निविदा प्रक्रिया के बाद आज हम देख सकते हैं कि मानवीय जीवन में गुणवत्ता लाने में प्रकृतिक गैस की कितनी अहम भूमिका सामने आ रही है। देश के 400 जिलों व 232 भौगोलिक इकाइयों तक इसका विस्तार हो चुका है। देश के आधे से अधिक आबादी को हम सीजीडी के दायरे में ला चुके हैं। शहरी गैस वितरण तंत्र की आनुषांगिक इकाइयों की स्थापना से व्यापक पैमाने पर निवेश के अवसर आएंगे, जिससे रोजगार के मौके भी बढ़ेंगे।

सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में प्राकृतिक गैस के क्षेत्र में आधारभूत संरचना विकसित करने के लिए नीतिगत स्तर पर कई अहम निर्णय लिए हैं। दरअसल, केंद्र सरकार ने 2030 तक अर्थव्यवस्था में प्राकृतिक गैस की हिस्सेदारी 6.2 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत करने का लक्ष्य रखा है। यह तभी सफल हो सकता है, जब आपकी रसोई और औद्योगिक प्रतिष्ठानों तक पाइपलाइन के जरिए स्वच्छ र्इंधन एलएनजी की पहुंच सुनिश्चित हो। इसके साथ-साथ प्राकृतिक गैस की दर भी कम रखना बेहद जरूरी है। स्पष्ट है कि सरकार प्राकृतिक गैस की लागत को कम कर दैनिक जीवन के साथ देश की आर्थिक गतिविधियों में इसकी भूमिका बढ़ाना चाहती है। ऊर्जा सुरक्षा को ध्यान में रखकर किए जा रहे ये प्रयास देश के लिए ऊर्जा और पर्यावरणीय सुरक्षा दोनों ही मोर्चों पर लाभकारी सिद्ध होगा।  (लेखक ऊर्जा मामलों के विशेषज्ञ हैं)