नमाज पढ़ने की आड़ लेकर हिन्दू परिवार की शादी बिगाड़ी, मारपीट की

    दिनांक 16-जुलाई-2020
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संजीव कुमार
 

बिहार के मधुबनी जिलान्तर्गत जयनगर के देवधा में एक अति पिछड़ा वर्ग के दुखी पंडित के घर में लड़के की शादी थी। घर में गीत—संगीत बज रहा था। पास के मुसलमानों को इस पर आपत्ति हुई। पुरुषों की गैरमौजूदगी में मजहबी भीड़ ने गरीब कुम्हार के घर पर धावा बोल दिया और महिलाओं तथा बच्चों को पीटा और गालियां दी। घर के एक पुरुष सदस्य को बेरहमी से पीटा और साउंड सिस्टम को तहस-नहस कर दिया। पूजा-पाठ के लिए रखी पूजन सामग्री को लात मारकर अपवित्र किया और इधर-उधर बिखेर दिया। जब तक उस परिवार के अन्य पुरुष आते तब तक मजहबी भीड़ मस्जिद में चली गई और मस्जिद की छत से पत्थरबाजी करने लगी।

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दुखी पंडित के घर में 10 जुलाई को शादी को लेकर चहल पहल थी। बिहार के मधुबनी जिलान्तर्गत जयनगर के देवधा के इस गरीब कुम्हार के घर कई मेहमान आये थे। घर के लड़के की शादी थी। वर पक्ष के लोग कन्या पक्ष के यहां जाने की तैयारी कर रहे थे। मांगलिक गीत बज रहे थे। गरीब कुम्हार ने अपने सामर्थ्य से सारा इंतजाम किया था। तभी अचानक मुसलमानों का एक झुंड आ धमका। शांतिप्रिय कहे जानेवाले इस सम्प्रदाय को इस अति पिछड़ा वर्ग के गरीब की खुशी नहीं दिखी। उन्हें तो बस अपनी दबंगीयत दिखानी थी। धमकी भरे शब्दों में कहा कि बाजा बंद करो। गरीबों के गाने के कारण उन्हें नमाज़ पढ़ने में दिक्कत आ रही है। स्पीकर की आवाज़ काफी कम कर दी गई लेकिन नीयत में खोट थी। शांतिप्रिय समुदाय का कहर कुम्हारों पर टूट पड़ा। जो सामने दिखा उसे पीटा गया। स्पीकर तोड़ दिया गया। घर को तहस नहस किया गया। महिलाओं के साथ बदसलूकी की गई। पूजा के सामान को अपमानित किया गया। इतने पर भी मन नहीं भरा तो मस्जिद से पत्थरबाजी भी की गई।

देवधा मध्य पंचायत के वार्ड संख्या-5 में बड़ी मस्जिद से कुछ दूरी पर दुखी पंडित का घर है। यहां विवाह होने के कारण गीत—संगीत बज रहा था। लड़के के यहां  बारात निकलने की तैयारी शुरू थी कि अचानक उस परिवार की प्रसन्नता पर मजहबी उन्मादी भीड़ टूट पड़ी। गीत सुबह से ही बज रहा था और दोपहर 1 बजे विवाह वाले व्यक्ति के घर के नजदीक स्थित मस्जिद से दूसरे समुदाय के कुछ लोग आए और अचानक रौबदार आवाज में गीत बन्द करने का दवाब बनाने लगे और कहने लगे कि आज शुक्रवार है और जुमा की नमाज है, इसीलिए गीत बन्द करो। गीत बन्द करने का दवाब बनाने पर एक व्यक्ति ने आवाज कम कर दी। इतने पर मजहबी भीड़ ने एकाएक उस परिवार के लोगों पर हमला कर दिया और घर में घुसकर महिलाओं के साथ बदतमीजी और मारपीट की। इतना ही नहीं विवाह की तैयारी के लिए बाजार से खरीददारी कर लाये सामान को बिखेरते हुए तोड़फोड़ की और सामान भी लूटने लगे। घर में विवाह का माहौल होने के कारण महिलाएं थीं और बच्चे खेल रहे थे। अधिकतर पुरुष सदस्य विभिन्न कार्यों, बारात जाने की व्यवस्था के कारण बाहर थे।

पुरुषों की गैरमौजूदगी में मजहबी भीड़ ने एक समुदाय के घर पर धावा बोल दिया और महिलाओं तथा बच्चों को पीटा और गालियां दी, बदसलूकी की। घर के एक पुरुष सदस्य को बेरहमी से पीटा और साउंड सिस्टम को तहस-नहस कर दिया। पूजा-पाठ के लिए रखी पूजन सामग्री को लात मारकर अपवित्र किया और इधर-उधर बिखेर दिया। जब तक उस परिवार के अन्य पुरुष आते तब तक मजहबी भीड़ मस्जिद में चली गई और मस्जिद के ऊपर छत से पत्थरबाजी करने लगी। अचानक मस्जिद की छत से कटृटरपंथियों द्वारा की जा रही पत्थरबाजी से यह प्रतीत हुआ कि यह सब योजनाबद्ध तरीके से किया गया हो। इस घटना में दो लोग 21 वर्षीय रमेश और एक महिला गंभीर रूप से घायल हुए हैं। सभी घायलों को जयनगर अनुमंडलीय अस्पताल पहुंचाया गया।

घटना की जानकारी मिलने पर प्रशासन से जुड़े लोग पहुंचे। बातचीत कर घटना मामले को किसी तरह शांत कराया, लेकिन आरोपितों की गिरफ्तारी नहीं की गई। दरअसल, यह घटना एक झलक है बिहार में कटृटरपंथियों की अराजकता की। ऐसी कई घटनाएं पहले भी घट चुकी हैं। इसी मोहल्ले में पिछले साल भी लाउड स्पीकर बजाने को लेकर मुसलमानों द्वारा मारपीट की गई थी। लेकिन ऐसी घटनाओं का हश्र वही ढाक के तीन पात। 'पंथनिरपेक्षता' और साम्प्रदायिक सौहार्द जैसी लच्छेदार बातों की आड़ में अपराधी बचते रहे हैं।