राजस्थान: पार्टी में बिखराव को नजरअंदाज कर सत्ता बचाने के कुचक्र में फंसी कांग्रेस

    दिनांक 16-जुलाई-2020   
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कांग्रेस पार्टी की राजस्थान सरकार में करीब सप्ताह भर पूर्व शुरू हुआ सियासी संग्राम थमने का नाम नहीं ले रहा है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत व सचिन पायलट के बीच अब आरोपों का दौर चरम पर है।

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कांग्रेस पार्टी की राजस्थान सरकार में करीब सप्ताह भर पूर्व शुरू हुआ सियासी संग्राम थमने का नाम नहीं ले रहा है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत व सचिन पायलट के बीच अब आरोपों का दौर चरम पर है। गहलोत दावा कर रहे हैं कि सचिन ने सरकार गिराने के लिए भाजपा के साथ मिलकर षडय़ंत्र रचा, जिसके उनके पास पुख्ता सबूत हैं। वहीं सचिन का आरोप है कि झूठे आरोपों में देशद्रोह का नोटिस देने समेत कई मामलों में गहलोत उनकी छवि धूमिल करने का प्रयास कर रहे हैं। सियासी घमासान के बीच पायलट व उनके समर्थित विधायकों की बात अनसुनी कर रहे कांग्रेस आलाकमान की रहस्यमयी चुप्पी सवालों के घेरे में है। चर्चा है कि गहलोत के दबाव में पार्टी के आला नेता पायलट को तवज्जो नहीं दे रहे और न ही उनकी पीड़ा सुनने को तैयार हो रहे। ऐसे में सचिन गुट के जाट नेता विश्वेन्द्रसिंह, रमेश मीणा, भंवरलाल शर्मा, मुरारीलाल मीणा ने बयान जारी कर आर-पार की जंग का ऐलान कर दिया है। हालांकि पायलट द्वारा भाजपा ज्वाइन करने से इनकार करने के बाद कांग्रेस द्वारा उन्हें मनाने के प्रयास तेज हो गए हैं।

राजस्थान में कई दिनों से चल रहा सियासी घमासान अब निर्णायक मोड़ पर आता जा रहा है। प्रदेश ही नहीं बल्कि पूरे देश की निगाह सचिन पायलट के अगले कदम पर है। वहीं हर किसी के मन में यह सवाल भी बार-बार आ रहा है कि आखिर इतनी फजीहत के बाद भी सचिन कांग्रेस पार्टी को छोड़ क्यों नहीं रहे हैं। जबकि मुख्यमंत्री गहलोत ने सीधे सचिन पर सरकार गिराने का आरोप तक लगा दिया। यही नहीं गहलोत ने उनके पीसीसी चीफ के कार्यकाल के बारे में भी एक राष्ट्रीय चैनल पर यह तक बोल दिया कि, पीसीसी चीफ कार्यकाल की परतें मैं अभी खोलना नहीं चाहता। इतने गम्भीर आरोपों के बाद भी आखिर क्या मजबूरी है कि सचिन पायलट का कांग्रेस से मोह खत्म नहीं हो पा रहा है। जानकारों का मानना है कि इसके पीछे की कई सम्भावनाएं हैं...जिनमें कांग्रेस छोड़ने पर सदस्यता जाने, तीसरी पार्टी बनाने, समर्थित विधायकों का भाजपा ज्वाइन से इनकार करने, सरकार गिराने के लिए पर्याप्त संख्याबल नहीं होने व कांग्रेस में रहकर ही गहलोत पर वार करने जैसे कई मुद्दे शामिल हैं।

अशोक गहलोत द्वारा लगाए गए खरीद-फरोख्त के आरोपों के बाद बर्खास्त किए गए पूर्व मंत्री रमेश मीणा ने कहा कि गहलोत यह बताएं कि हमें जब बसपा से कांग्रेस में लेकर आए थे, तब उन्होंने कितने रुपए में खरीदा था। इसके साथ ही दौसा विधायक मुरारीलाल मीणा ने कहा कि गहलोत अपने आप को जादूगर कहते हैं। यह बात बिल्कुल सत्य है, क्योंकि जादू दिखाने वाला जनता को भ्रमित कर झूठा नाटक रचता है। अब वही काम गहलोत कर रहे हैं। वहीं दूसरी ओर कांग्रेस के दर्जनभर नेता खुलकर पायलट के समर्थन में आ गए हैं। पूर्व केन्द्रीय मंत्री जतिन प्रसाद, मिलिंद देवड़ा, दीपेन्द्र हुड्डा, प्रिया दत्त, कपिल सिब्बल, संजय निरूपम, अभिषेक मनु सिंघवी, संजय झा ने कांग्रेस हाईकमान से सचिन पायलट की मांगों पर विचार करने का दबाव बनाया है। ऐसे में अब 10 जनपथ भी पशोपेश में पड़ गया है।

कई राज्यों में हुए ऐसे सियासी घटनाक्रमों से एक बात तो साफ हो गई है कि कांग्रेस अपने अस्तित्व के अंतिम दौर से गुजर रही है। अंतिम दौर इसलिए कि नई पीढ़ी के करिश्माई नेता इन्हें नजर नहीं आ रहे हैं। राजस्थान कांग्रेस के अनुभव और युवा नेताओं की जंग में कोई भी जीते, एक बात साफ है कि कांग्रेस का हारना तय है, उस विचार का हारना तय है। वह अलग बात है कि कहीं अशोक गहलोत या कहीं पायलट के चेहरे के नाम पर जनता ने अब तक उसे बचा कर रखा है। ऐसे में गहलोत और सचिन पायलट के बीच चल रहे सियासी घमासान का नतीजा जो भी आएगा, वह जल्द सबके सामने होगा। लेकिन जो बगावत का कुचक्र कांग्रेस में चल पड़ा है, इसको किस चक्र से काटा जाएगा, यह अभी दूर-दूर तक नजर नहीं आ रहा।