हागिया सोफिया चर्च को मस्जिद में बदलने से मुसलमानों की छवि और खराब हुई

    दिनांक 16-जुलाई-2020
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आर.एल फ्रांसिस
 
तुर्की के राष्ट्रपति तय्यप एर्दोगन ने चर्च से मस्जिद फिर मस्जिद से म्यूजियम बना दी गयी ऐतिहासिक इमारत हाया सोफिया को फिर से मस्जिद बनाने की घोषणा की। हैरानी की बात है कि इस घटना के विरोध में इसकी निंदा में मुस्लिमों की तरफ़ से कोई आवाज़ सुनाई नहीं दी, जबकि समर्थन करती और खुशियां मनाती आवाज़े इंटरनेट पर गूंज रही हैं। हाया सोफिया 1453 से पहले चर्च था यह ऐतिहासिक रूप से प्रमाणित है।
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8 जुलाई, 2020 को तुर्की के राष्ट्रपति तय्यप एर्दोगन ने चर्च से मस्जिद फिर मस्जिद से म्यूजियम बना दी गयी ऐतिहासिक इमारत हागिया सोफिया को फिर से मस्जिद बनाने की घोषणा की। इसके बाद 10 जुलाई को वहां के सुप्रीम कोर्ट ने एर्दोगन के पक्ष में फैसला दिया। इस घटना के बाद दुनिया भर के मुसलमानों में खुशी की लहर दौड़ गयी और पस्ती में डूबी हुई क़ौम को एक विजय का अहसास हुआ। इस घटना के बाद इंटरनेट पर मुस्लिम समुदाय की विजय घोष वाली प्रक्रिया देखने को मिल रही हैं।

हागिया सोफिया तुर्की के इस्तांबुल में स्थित एक शानदार इमारत है। यह दुनिया भर के पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र है। इसकी भव्यता और ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए यूनेस्को ने वैश्विक सांस्कृतिक धरोहर का दर्जा दिया हुआ है।

कुस्तुन्तुनिया में हागिया सोफिया चर्च को 532 ई. में बनवाना शुरू किया गया था। तुर्की के रोमन सम्राट जस्टीनियन की योजना एक ऐसा विशाल और शानदार चर्च बनवाने की थी जैसा न कभी बना हो न कभी बन सके। 537 ई. में यह इमारत बन कर तैयार हुई। यह इमारत न केवल स्थापत्य कला की बेमिसाल संरचना थी, बल्कि अपने पूरे इतिहास में यह राजनीतिक सत्ता का प्रतीक भी बनी रही। लगभग 900 साल तक यह ईस्टर्न ऑर्थोडॉक्स चर्च का मुख्यालय बनी रही। 13वीं सदी तक इस पर अधिकार को लेकर ईसाइयों के दो संप्रदायों में ही लड़ाइयां होती रही थीं। कुछ समय (1204 से 1261 ई. तक) के लिए यह कैथोलिक चर्च भी रहा। 1261 में यह फिर से ऑर्थोडॉक्स चर्च हो गया।

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एर्दोगन ने पिछले साल चुनाव के दौरान ही इसे फिर से मस्ज़िद बनाने का वादा किया था। उनको तुर्की के ऐसे मतदाताओं का भारी समर्थन प्राप्त है जो इस्लामिकवाद से प्रेरित हैं और जो 1453 में बाइज़ेंटाइन साम्राज्य पर ऑटोमन साम्राज्य की विजय को ईसाइयत पर इस्लाम की विजय और हाया सोफिया को इस विजय के प्रतीक के रूप में देखते हैं।

पोप फ़्रांसिस ने हागिया सोफ़िया को वापस मस्जिद में बदलने के तुर्की सरकार के फ़ैसले पर दुख जताया है, उन्होंने वेटिकन से यह बयान दिया। पोप फ़्रांसिस दुनिया के उन बड़े पांथिक और राजनीतिक नेताओं में से एक हैं जिन्होंने तुर्की के इस निर्णय की निंदा की है। वर्ल्ड काउंसिल ऑफ़ चर्च ने तुर्की के राष्ट्रपति अर्दोआन से यह निर्णय पलटने की गुज़ारिश की है। रूस में स्थित चर्च, जो दुनिया के सबसे बड़े रूढ़िवादी ईसाई समुदाय का महत्वपूर्ण पांथिक स्थल है, उसने कहा कि तुर्की की अदालत ने हागिया सोफ़िया पर आदेश देते समय उनके पक्ष का ज़रा भी ध्यान नहीं रखा । ग्रीस ने भी इसकी आलोचना की है, साथ ही यूनेस्को ने कहा है कि वर्ल्ड हैरिटेज कमेटी अब इस इमारत की स्थिति की समीक्षा करेगी।

हैरानी की बात है कि इस घटना के विरोध में इसकी निंदा में मुस्लिमों की तरफ़ से कोई आवाज़ सुनाई नहीं दी, जबकि समर्थन करती और खुशियां मनाती आवाज़े इंटरनेट पर गूंज रही हैं। हागिया सोफिया 1453 से पहले चर्च था यह ऐतिहासिक रूप से प्रमाणित है। जब मुस्तफा कमाल अतातुर्क ने मस्जिद बना दिये गए चर्च को 1934 में म्यूजियम में बदला तब विवाद को समाप्त करने का उनका बहुत ही समझदारी भरा क़दम था। मगर तुर्की के राष्ट्रपति तय्यप एर्दोगन ने कमाल अतातुर्क के सारे किये कराए पर अपने निजी स्वार्थ में पानी फेर दिया और दुनिया भर में मुसलमानों की जो खराब छवि बन गयी है उसको और खराब कर दिया। उनके इस काम से मुसलमानों की जो बुनियादी समस्यायें हैं वो हल होने की जगह और बढ़ गईं।

एर्दोगन अपनी नीतियों की असफलताओं तथा खो रहे अपने जनाधार से परेशान हैं। उनकी ‘जस्टिस एंड डेवलपमेंट पार्टी’ (एकेपी) 2002 में तुर्की राज्य को और अधिक समावेशी और लोकतांत्रिक राज्य बनाने के आह्वान के साथ सत्ता में आई थी। लेकिन उसकी विदेश नीतियों के कारण सीरिया और लीबिया में जिहादी तत्व और मजबूत हुए हैं। एर्दोगन अपनी नाकामयाबी छिपाने के लिये इस तरह की हरकतें कर रहे हैं और वो इस तरह की हरकतों से दुनिया भर के मुसलमानों के ख़लीफ़ा बनाना चाहते हैं।