मंदिर पर कोहराम

    दिनांक 17-जुलाई-2020   
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इस्लामाबाद में बनने वाले श्रीकृष्ण मंदिर के विरोध में जिहादी कट्टरपंथियों ने ऐसा कोहराम मचाया कि उस मंदिर का निर्माण कार्य रुक गया। इस्लामाबाद उच्च न्यायालय ने मंदिर विरोधी सारी याचिकाओं को खारिज कर दिया है, इसके बावजूद कट्टरवादी विरोध कर रहे हैं

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कुछ लोगों ने निर्माणाधीन श्रीकृष्ण मंदिर की चारदीवारी ढहा दी। इसके बाद एक कट्टरवादी उसके मलवे पर चढ़कर अजान देता हुआ दिखाई दे रहा है।


पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में बनने वाले श्रीकृष्ण मंदिर सह समुदायिक भवन का काम फिलहाल रुक गया है। उल्लेखनीय है कि पाकिस्तानी मीडिया और वहां के जिहादी इस मंदिर के विरुद्ध सरकार पर दबाव बनाए हुए थे। कुछ दिन पहले तक मंदिर निर्माण को लेकर सक्रिय इस्लामाबाद की सीडीए यानी ‘कैपिटल डेवलपमेंट अथॉरिटी’ भी अब पीछे हट गई है। सीडीए ने उच्च न्यायालय में झूठा हलफनामा दायर कर कहा है, ‘‘कृष्ण मंदिर के निर्माण के लिए अब तक इस्लामाबाद हिंदू पंचायत ने भवन योजना (बिल्डिंग प्लान) और नक्शा जमा नहीं कराए हैं।’’ सीडीए के प्रवक्ता मजहर हुसैन का कहना है, ‘‘भवन योजना और नक्शा जमा कराए बगैर इस्लामाबाद में किसी तरह का निर्माण संभव नहीं है।’’ वहीं, इस्लामाबाद हिंदू पंचायत के अध्यक्ष प्रीतम दास का दावा है, ‘‘19 जून को भवन योजना संबंधित विभाग और मजहबी मामलों के केंद्रीय मंत्री पीर नूरूल हक कादरी के कार्यालय में जमा करा दिया गया है।’’

वहां से हरी झंडी मिलने के बाद 23 जून को सत्तारूढ़ दल पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ के सांसद लालचंद माल्ही और पीर नूरूल हक की मौजूदगी में मंदिर की आधारशिला रखी गई। इसके दो दिन बाद माल्ही प्रधानमंत्री इमरान खान से मिलकर इसका पूरा ब्योरा भी दे आए थे। बावजूद इसके मीडिया और जिहादियों का रवैया नहीं बदला है। वे पाकिस्तान में मंदिर निर्माण को लेकर ऐसा माहौल बना रहे हैं, मानो यह कोई अवैध और मुसलमान-इस्लाम विरोधी कार्य है। एक मस्जिद के इमाम ने कहा है, ‘‘मंदिर बना तो इसमें शामिल लोगों की हत्या कर लाश कुत्तों के आगे डाल दिया जाएगा।’’ पाकिस्तानियों को भड़काने में यूट्यूब पर चलने वाले न्यूज चैनल भी कम नहीं हैं। ‘उमर टीवी’ चला रहा है कि इस्लामाबाद में मंदिर की जगह आलीशान ‘बाबरी मस्जिद’ बनानी चाहिए।

दाग धोने की कोशिश

उल्लेखनीय है कि पाकिस्तान में हिंदुओं पर बढ़ते अत्याचारों के आरोप को धोने के लिए कुछ दिन पहले इमरान खान ने इस्लामाबाद में कृष्ण मंदिर के निर्माण की घोषणा की थी। इसके लिए पहले चरण में 10 करोड़ रुपए देने की भी घोषणा की गई थी। दरअसल, 26 दिसंबर, 2017 को सीडीए के अध्यक्ष शेख अंसार अजीज की अध्यक्षता में हुई एक बैठक में इस्लामाबाद में मंदिर निर्माण के लिए जमीन आवंटित करने का निर्णय लिया गया था। बाद में कुछ तकनीकी खामियों के चलते इस पर रोक लगा दी गई थी। अब इस्लामाबाद के सेक्टर एच-9 में इसके निर्माण की न केवल इजाजत दी गई, बल्कि हिंदू पंचायत को जमीन भी दी गई। इस जगह भव्य कृष्ण मंदिर के अलावा श्मशान घाट, सामुदायिक भवन, लंगरखाना, धर्मशाला आदि के निर्माण की योजना है।

पाकिस्तान सरकार के इस फैसले की प्रशंसा करते हुए लालचंद माल्ही कहते हैं, ‘‘इस्लामाबाद में हिंदुओं के लिए ऐसे भवन का होना बहुत जरूरी है। राजधानी में बड़ी संख्या में रोजाना किसी न किसी काम से बलूचिस्तान, सिंध प्रांत सहित देश के अन्य हिस्सों से हिंदू आते हैं। इसके अलावा शहर में करीब 3,000 हिंदू भी रहते हैं। मगर उनके लिए यहां ऐसा कोई स्थल नहीं है, जहां वे ठहर सकें या पूजा-पाठ कर सकें।’’ इस्लामाबाद में एक भव्य प्राचीन मंदिर है, जिसका अधिग्रहण पुरातत्व विभाग बहुत पहले ही कर चुका है। सैदनपुर गांव में एक छोटी प्रतीकात्मक मूर्ति स्थापित है, जहां सभी के लिए पूजा-पाठ संभव नहीं। इस्लामाबाद में कोई श्मशान घाट भी नहीं है। यहां किसी हिंदू के निधन पर उसके शव को सिंध या बलूचिस्तान ले जाना पड़ता है। पाकिस्तान में हिंदुओं की कुल आबादी 80 हजार है। ये अधिकतर दक्षिण सिंध के मीरपुरखास, थारपारकर, घोटकी आदि में रहते हैं। इस क्षेत्र में हिंदुओं के अनेक मंदिर हैं, जिनमें से अधिकांश को जिहादियों ने ध्वस्त कर दिया है।


मंदिर निर्माण के समर्थन में प्रदर्शन
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गत दिनों मंदिर निर्माण के समर्थन में काफी संख्या में लोगों ने इस्लमाबाद प्रेस क्लब के सामने मैदान में इकट्ठा होकर प्रदर्शन किया। लोग अपने हाथों में ‘मंदिर बनाओ’ लिखे बैनर लिए हुए थे। प्रदर्शनकारियों ने पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना के एक भाषण का हवाला देते हुए कहा कि वे चाहते थे कि मुल्क में अल्पसंख्यकों को भी उतना ही महत्व मिले, जितना मुसलमानों को मिलता है। हिंदू भी अपने धर्मस्थलों पर बिना किसी संकोच और भय के पूजा-पाठ कर सकें।



पाकिस्तान में 1947 के बाद पहली दफा किसी मंदिर के निर्माण होने की बात सुनने को मिली थी, लेकिन जिहादी तत्वों को यह पसंद नहीं है। इस मंदिर का विरोध पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री तथा वर्तमान में पंजाब विधानसभा के अध्यक्ष परवेज इलाजी भी कर रहे हैं। जबकि उन्हें अल्पसंख्यकों के अधिकारों की वकालत करने वाला माना जाता है। उनका कहना है कि जब देश में पहले से कई मंदिर हैं तो उनका जीर्णोद्धार कराने की बजाए किसी नए मंदिर का निर्माण उचित नहीं है।

मजहबी कट्टरवादी ‘जमायत’ ने तो इसे सऊदी के मदीना शहर से जोड़ दिया है। इसका कहना है कि मदीना में मस्जिद तामीर से पहले वहां मौजूद तमाम बुत ढहा दिए गए थे। इसके उलट इमरान खान सरकार इस्लाम के नाम बसे इस्लामाबाद में मूर्ति स्थापित करना चाहती है। मंदिर निर्माण के खिलाफ पाकिस्तान में देवबंदी शिक्षा देने वाली संस्था जामिया अर्शिया मदरसा ने मोर्चा खोल दिया है। उसकी ओर से एक फतवा भी जारी किया गया है। संस्थान से दो दशक  से जुड़े मुफ्ती मुहम्मद जकरिया ने इस्लाम के विभिन्न पहलुओं का हवाला देते हुए कहा है कि उनका मजहब दूसरे धर्मस्थलों की देखभाल व संचालन की इजाजत तो देता है, पर इसके लिए नए निर्माण की मनाही है। इस फतवे की हिमायत में पाकिस्तान के कई और मुफ्तियों के बयान आए हैं। इस मुद्दे पर भारत का भगोड़ा जाकिर नायक का कहना है, ‘‘इस्लाम से बेहतर कोई और मजहब नहीं, इसलिए हम कैसे दूसरे मत-पंथों को बढ़ावा दे सकते हैं?’’ 

भड़काने की कोशिश
बहरहाल, मजहबी कट्टरवादियों के लगातार बयानबाजी का असर है कि गत दिनों कुछ लोगों ने मंदिर की निर्माणाधीन चारदीवारी ढहा दी। यही नहीं, दीवार के मलवे पर चढ़कर अजान भी दिया गया, जिसका वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। जिहादी मंदिर निर्माण के विरोध में मरने-मारने पर उतारू हैं। सोशल मीडिया के जरिए चेतावनी प्रसारित की जा रही है कि किसी भी कीमत पर इस्लामाबाद में मंदिर नहीं बनने दिया जाएगा। इसकी राह में रोड़ा अटकाने के लिए तनवीर अख्तर नामक एक वकील और कुछ अन्य लोगों ने इस्लामाबाद उच्च न्यायालय में अनेक याचिकाएं दाखिल की थीं। इनका कहना था कि 70-80 के दशक में इस्लामाबाद बसाने के लिए बनाए गए ‘मास्टर प्लान’ में मंदिर निर्माण की कोई जगह निर्धारित नहीं थी। ऐसे में किस कानून के तहत इसकी मंजूरी दी गई, वह भी ऐसे वक्त में जब देश कोरोना संक्रमण से बुरी तरह जूझ रहा है? हालांकि उच्च न्यायालय के न्यायाधीश आमिर फारूक को बताया गया है कि सीडीए के अध्यक्ष और इसके बोर्ड के सदस्य इसकी अनुमति दे सकते हैं। सीडीए के इस प्रावधान के तहत मंदिर के अलावा पारसियों एवं ईसाइयों को भी पूजास्थल बनाने के लिए 20 हजार वर्ग फीट जमीन आवंटित की गई है। कृष्ण मंदिर के निर्माण पर 50 करोड़ रुपए की लागत आएगी। प्रीतम दास कहते हैं कि अभी उन्हें सरकार की ओर से पैसा नहीं मिला है। चारदीवारी का निर्माण पंचायत के पैसे से कराया जा रहा था, जिसे कुछ जिहादियों ने ढहा दिया।

मंदिर निर्माण के विरोध में दायर की गइं याचिकाएं 7 जुलाई को खारिज हो गई हैं। अदालत का कहना था कि विरोधी पक्ष की ओर से जो दलीलें दी गई हैं, वे सुनवाई लायक नहीं हैं। इसके बावजूद जिहादियों के तेवर ढीले नहीं पड़े हैं। सोशल मीडिया पर ‘मोदी के राज में बनेगा इस्लामाबाद में मंदिर’ का नारा देकर लोगों को भड़काया जा रहा है।      (लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं)