पाकिस्तान: बेटी पर बुरी नजर रखने वाले एक मौलवी पर बनी फिल्म ‘जिंदगी तमाशा’ को रिलीज नहीं होने दे रहे कटृटरपंथी

    दिनांक 17-जुलाई-2020   
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केंद्रीय तथा सिंध व पंजाब प्रांत के फिल्म सेंसर बोर्ड से पास फिल्म ‘जिंदगी तमाशा’ को सिनेमाघरों में दिखाने पर ईंट से ईंट बजाने की धमकियां दी जा रही हैं। निर्माता-निर्देश और फिल्म के अदाकारों की जान पर आफत आई हुई है। उन्हें घरों से निकलने नहीं दिया जा रहा। कट्टरपंथियों ने उन्हें मौत के घाट उतारने की धमकी दी है।

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पाकिस्तान के अल्पसंख्यकों की परेशानियों का सबसे बड़ा सबब कट्टरपंथी जमातें अब शरिया कानून के लिहाज से देश को हांकने की फिराक में हैं। ऐसे ही लोगों ने राजधानी इस्लामाबाद के सेक्टर एच-9 में प्रस्तावित कृष्ण मंदिर के निर्माण की राह में रोड़ा अटका रखा है और अब ये बेटी पर बुरी नजर रखने वाले एक मौलवी पर बनी फिल्म ‘जिंदगी तमाशा’ को प्रदर्शन नहीं होने दे रहे। इन सब के बीच इमरान खान सरकार मुंह सिले बैठी हुई है।

केंद्रीय तथा सिंध व पंजाब प्रांत के फिल्म सेंसर बोर्ड से पास इस फिल्म को सिनेमाघरों में दिखाने पर ईंट से ईंट बजाने की धमकियां दी जा रही हैं। निर्माता-निर्देश और फिल्म के अदाकारों की जान पर आफत आई हुई है। उन्हें घरों से निकलने नहीं दिया जा रहा। कट्टरपंथियों ने उन्हें मौत के घाट उतारने की धमकी दी है। पाकिस्तान के तीनों सेंसर बोर्ड से क्लीयरेंस प्रमाणपत्र मिलने के बाद फिल्म ‘जिंदगी तमाशा’ का प्रीमियर शो बुसान इंटरनेशनल फिल्म्स फेस्टिवेल हो चुका है। मगर कट्टरपंथी इसे देश के सिनेमाघरों में दिखाने नहीं दे रहे हैं। फिल्म को इस वर्ष 24 जनवरी को ही रीलीज होना था। मगर सिनेमाघरों में लगने से दो दिन पहले कट्टरवादियों की पार्टी तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान ने देशभर में पर्चे बांटकर इसके प्रदर्शन के विरोध में देशव्यापी आंदोलन का ऐलान कर दिया। यह पार्टी पाकिस्तान में शरिया कानून लागू करने और ईशनिंदा करने वालों को सजा-ए-मौत की हिमायती है।

इसके संस्थापक खालिद हसन रिज्वी की दलील है कि फिल्म में मजहबी जलसों में खुदा-रसूल का बखान करने के लिए मजहबी गीत पढ़ने वालों का गलत चित्रण किया गया है। इसमें इस्लाम को लेकर भी कई गलत बातें कही गई हैं। यहां तक कि फिल्म में ‘लब्बैक-अल्लाहुम्मा-लब्बैक’ का नारा दिया गया है, जो इनकी पार्टी की पहचान है। इन दलीलों के आधार पर फिल्म का प्रदर्शन रोकने के लिए खालिद हसन रिज्वी की पहल पर प्रधानमंत्री इमरान खान, देश के राष्ट्रपति एवं सेना प्रमुख को चिट्ठी लिखी गई। इसका असर हुआ है कि फिल्म की समीक्षा में कई तरह की कमेटियां बैठा दी गईं। सरकार की पहल पर फिल्म की विशेष स्क्रीनिंग भी की गई। इसके अलावा सीनेट कमेटी फॉर हयूमन राइट ने भी फिल्म की समीक्षा के बाद इसे क्लीनचिट दे दी। बावजूद इसके अभी तक इसके प्रदर्शन के आसार नहीं दिख रहे।

कट्टरपंथी इसके प्रदर्शन पर खून-खराबा होने की आशंका जता चुके हैं, जिसके आधार पर पंजाब और सिंध सरकार ने यह कहते हुए अपने सिनेमाहाल में फिल्म दिखाने से मना कर दिया है कि इससे सूबे में कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ सकती है। यानी कट्टरपंथियों के आगे पूरी सरकार नतमस्तक है। फिल्म के प्रदर्शन में रोड़ा अटकाने के विरोध में फिल्म निर्माता एवं अभिनेता इरफान खूसट ने लाहौर की एक अदलत में याचिका दायर की है, जिसकी एक दौर की सुनवाई हो चुकी है। इसके अलावा फिल्म निर्माता प्रधानमंत्री इमरान खान और पाकिस्तान की अवाम को खुला खत भी लिखकर पूछ चुके हैं कि क्या उन्हें फिल्म का प्रदर्शन रोक देना चाहिए ? हालांकि पाकिस्तान के पंथनिरपेक्षों के एक गुट ने उन्हें कट्टरपंथियों के आगे नहीं झुकने का हौंसला दिया है। यही लोग इस्लामाबाद में कृष्ण मंदिर के निर्माण के पक्ष में जगह-जगह प्रदर्शन कर रहे हैं। बावजूद कृष्ण मंदिर के निर्माण की तरह ही फिल्म के प्रदर्शन का कोई रास्ता खुलता नहीं दिख रहा। सीनेट कमेटी फॉर हयूमन राइट्स के पैनल के अध्यक्ष एवं पीपीपी के सीनेटर मुस्तफा नवाज खोखकर बेबसी से कहते हैं कि यही कट्टरपंथी अपनी अनुचित मांगों को लेकर दो बार इस्लामाबाद को बंधक बना चुके हैं।

अब ये एक ऐसी फिल्म के पीछे पड़े हैं जिसमें इस्लाम या किसी मौलवी के अपमान जैसी कोई बात नहीं है। फिल्म निर्माता के पिता तथा अस्सी की दशक में पाकिस्तान टेलीविजन पर दिखाए जाने वाले धारावाहिक ‘अंधेरा-उजाल’ में यादगार अभिनय करने वाले सरमद सुल्तान खूसट कहते हैं कि बुरा चरित्र किसी का हो सकता है। चाहे कोई मौलवी ही क्यों न हो। ऐसे कई मामले उजागर हो चुके हैं जिसमें मदरसों के मौलवियों की बदचलनी सामने आई है। इसका अर्थ यह कतई नहीं कि सारे मौलवी बदचलन होते हैं। फिल्म में एक बदकिरदार में मौलवी को दिखाया गया है, जिसको इस्लाम और मौलवियों के चरित्र को बिगाड़ने वाली फिल्म बताई जा रही है, जो उचित नहीं है। वह कहते हैं कि फिल्म में काम करने वाले सारे लोग मुसलमान हैं। वे भला ऐसी हरकतें क्यों करना चाहेंगे जिससे अकारण इस्लाम, मुसलमान और मौलवी बदनाम हों। फिलहाल इस्लामिक ऑडियोलॉजी काउंसिल यानी सीआईआई की समीक्षा के बाद ही फिल्म के प्रदर्शन का रास्ता खुल पाए।