हिन्दू आस्था पर आघात

    दिनांक 17-जुलाई-2020
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चेन्नै संवाददाता

तमिलनाडु में पिछले दिनों एक के बाद एक ऐसी अनेक घटनाएं प्रकाश में आई हैं जिनमें राज्य के अधिकारियों ने मजहबी उन्मादियों के फर्जी विरोध पर मंदिरों को तोड़ा है तो ईसाई मिशनरियों के प्रभाव में मंदिरों की जमीन पर अवैध चर्च बनाने की छूट दी
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वज्रगिरी पहाड़ी पर स्थित 15 सौ साल पुराना शिवालय (ऊपर) जिसकी जमीन पर कब्जा करके चर्च ने
पूरी पहाड़ी पर पक्का रास्ता बनाकर सलीब खड़े कर लिए थे (बाएं)     (फाइल चित्र)


तमिलनाडु में मजहबी कट्टरपंथी और चर्च पोषित तत्वों का आतंक इतना बढ़ गया है पिछले लंबे वक्त से ये अकारण हिन्दुओं के खिलाफ बेवजह की मुसीबतें खड़ी करते आ रहे हैं। मीडिया और सेकुलर जमातों द्वारा इन 'अल्पसंख्यकों' के प्रति जबान न खोलने की नीति बहुसंख्यकों का शांति से जीना मुश्किल कर रही है। इन बदलती सामाजिक स्थितियों को समझने के क्रम में राज्य में हो रहे जनसांख्यिक परिवर्तनों पर नजर डालना जरूरी है। 2011 की जनगणना से अब तक तमिलनाडु में ईसाइयों और मुस्लिमों की आबादी और उनके रिहायशी क्षेत्रों का प्रसार काफी बढ़ गया है। 2011 की जनगणना के अनुसार तमिलनाडु में 44 लाख ईसाई थे जो पूरे राज्य की जनसंख्या का लगभग छह प्रतिशत थे। देश में कुल ईसाइयों में से लगभग 15 प्रतिशत तमिल ईसाई हैं। राज्य के कन्याकुमारी जिले में ईसाइयों की संख्या में तेज से बढ़ोतरी हुई है और 2011 से अब तक वहां जिले की कुल आबादी में ईसाइयों की हिस्सेदारी 30.7 प्रतिशत से बढ़कर 46.8 प्रतिशत हो गई है। राज्य के कांचीपुरम और तिरुवल्लूर जिलों में भी इनकी संख्या में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। इसके अलावा, राज्य में सबसे सघन मुस्लिम आबादी रामनाथपुरम जिले में है जहां वे कुल आबादी का लगभग 15.4 प्रतिशत हैं। इन्हीं जिलों में ईसाइयों की आबादी भी तुलनात्मक रूप से ज्यादा है। इन समुदायों की उपस्थिति तंजौर-तिरुचिरापल्ली क्षेत्र में तुलनात्मक रूप से ज्यादा है।

बढ़ता गया तनाव
आबादी में बढ़ोतरी के साथ ही संबंधित क्षेत्रों में ईसाई और मुस्लिम समुदायों का सामुदायिक प्रभाव बढ़ा है और हिंदू समुदाय के लोगों, उनकी सम्पत्तियों और मंदिरों पर उनके हमले भी उल्लेखनीय रूप से बढ़े हैं। इस बात की पुष्टि करने वाली अनेक घटनाएं घट चुकी हैं। हिंदू समुदाय के हितों और आस्थाओं पर चोट करने वाली एक बड़ी घटना चेंगलपट्टु जिले के अचारपक्कम कस्बे में घटी। चेन्नै से लगभग 95 किलोमीटर दूर वज्रगिरि पहाड़ी अचारपक्कम के बाद ही शुरू होती हैं। अचारपक्कम के निकट इसी वज्रगिरि के शिखर पर एक जीर्ण-शीर्ण इमारत और एक चमचमाते नए चर्च को देखा सकता है। जीर्ण-शीर्ण दिखने वाला भवन वास्तव में 1500 साल पुराना शिव मंदिर है। भगवान शिव यहां श्री पशुपतिनाथ के रूप में अपनी सहधर्मिणी मरगादम्बिगाई के साथ विराजमान हैं। 1969 से ईसाई मिशनरी इस पहाड़ी पर मनमाने तरीके से तोड़—फोड़ करते हुए ‘मजाईमलाई माता अरुलतालम’ का भव्य चर्च बनाते गए थे। पूरी पहाड़ी पर जगह-जगह सलीब गाड़ दिए गए थे और नीचे से ऊपर तक लगभग सभी पत्थरों पर बाइबिल से संबंधित दृश्य उकेर दिए थे। इतना ही नहीं, इन तत्वों ने शिखर पर स्थित मंदिर का प्रवेश द्वार बंद कर वहां चर्च का एक आर्च बनवा दिया। इसके परिणामस्वरूप मंदिर जाने वाले हर व्यक्ति को चर्च परिसर से होकर जाना पड़ता था। ये देखकर चर्च वालों ने चर्च के अंदर से मंदिर को जाने वाले रास्ते को कांटे डलवाकर बंद कर दिया। कुछ श्रद्धालुओं ने मंदिर तक जाने का अस्थायी रास्ता बनाया तो ईसाई मिशनरियों ने उसे भी कूड़ा-कचरा डालकर बंद कर दिया। इन मिशनरियों की कुत्सित मंशा किसी न किसी तरह से मदिर का रास्ता बंद करके उस परिसर को भी अपने कब्जे में कर लेने की थी। किंतु, कुछ हिंदू नेताओं के हस्तक्षेप से पहाड़ी पर ईसाइयों द्वारा किए गए अवैध कब्जों को अंतत: हटा दिया गया।

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कन्याकुमारी में भारत माता की प्रतिमा (बाएं ) को ढकते हुए पुलिसकर्मी, जिसे हिन्दू संगठनों के कड़े
एतराज के बाद पहले की स्थिति में बहाल किया गया। 


ऐसी ही एक अन्य घटना मार्च 2018 में घटी थी। इसका संबंध मदुरै जिले में एक चर्च द्वारा तिरुपरनकुंदरम के श्री सुब्रमण्यास्वामी मंदिर की जमीन पर अवैध कब्जे से था। यह अवैध कब्जा मंदिर की 100 करोड़ से अधिक मूल्य की सम्पत्तियों पर किए गए अतिक्रमणों का हिस्सा था। जून 2019 में सामने आए तंजौर के एक मामले में एक चर्च ने एक निर्मला नगर के निवासियों द्वारा एक गणेश मंदिर बनाने का काम रुकवा दिया था। यह मंदिर ऐसे भूखंड पर बनाया जाना था जिसे मद्रास उच्च न्यायालय ने निर्मला नगर के निवासियों के लिए आरक्षित घोषित किया था। इसके बावजूद, चर्च ने उक्त भूखंड को अपनी निजी सम्पत्ति बताते हुए मंदिर निर्माण में बाधा डाली।

ईसाई ही नहीं, मुस्लिम समुदाय भी बहुसंख्यकों के विरुद्ध हरकतें करने में पीछे नहीं है। फरवरी 2019 में एक कट्टरपंथी इस्लामी संगठन के लोगों ने इलाके में कन्वर्जन संबंधी गतिविधियों का विरोध करने वाले पट्टालि मक्कल काची (पीएमके) के 42 वर्षीय कार्यकर्ता वी. रामालिंगम की पीट-पीटकर हत्या कर दी थी। इसके बाद, जुलाई 2019 में कट्टरपंथी मुस्लिमों के एक समूह ने पुदुकोट्टाई जिले में हिंदू मुन्नानी के नेता मुरुगनाधम पर हमला किया था। हमले की वजह थी मुरुगनाधम का इलाके में कट्टरपंथी मुसलमानों द्वारा जबरन और अवैध रूप से कराए जा रहे कन्वर्जन के खिलाफ अभियान चलाना। मार्च 2020 में भी ऐसी ही घटना सामने आई जब मजहबी कट्टरपंथियों ने कोयंबटूर में हिंदू मुन्नानी के जिला सचिव एम. आनंद उर्फ आनंद नारायणन (33) पर हमला किया। पुलिस ने इस सिलसिले में एस. नूर मोहम्मद (30) और अजहरुद्दीन को गिरफ्तार किया है। यह हमला तब किया गया था जब आनंद नारायणन गांधीपुरम में सीएए के समर्थन में आयोजित एक रैली में भाग लेकर लौट रहे थे।

अल्पसंख्यकों के तुष्टीकरण के मामले में कभी-कभी पुलिस अपने राजनीतिक आकाओं को भी पीछे छोड़ देती है। मई 2020 में कन्याकुमारी पुलिस ने ईसाई मिशनरियों को खुश करने के लिए पुलियुर गांव में भारत माता की प्रतिमा को ढकवा दिया क्योंकि यह पड़ोस के ईसाइयों की भावनाओं को कथित तौर पर 'आहत' कर रही थी। उल्लेखनीय है कि कन्याकुमारी के अगथीश्वरम तालुक के पुलियुर गांव का इस्साकी अम्मन मंदिर 200 साल पुराना है। निजी भूमि पर बने इस मंदिर परिसर में हाल ही में परिसर के स्वामी परिवार ने तिरंगी साड़ी में लिपटी भारत माता की एक प्रतिमा स्थापित की थी। किंतु, अचानक एक दिन वहां के पुलिस उपाधीक्षक भास्करन ने पुलिस के जवानों को प्रतिमा ढकने को कहा। भास्करन ने संबंधित परिवार के लोगों को मौखिक रूप से कहा कि वे भारत माता की मूर्ति की पूजा न करें। पुलिस अधिकारियों की मनमानी का ऐसा ही एक अन्य मामला तेनकासी जिले में सामने आया था। जिले की कडायम पंचायत स्थित सम्मनकुला गांव में नादर समुदाय के लोगों का 'कट्टप्पा साथी मदन मंदिर' है। नादर समुदाय इन्हें अपने परिवार के देवता मानते हैं। इसी के बगल के गांव अजगप्पापुरम में 'अझिपाची मदन' मंदिर है जिसकी पूजा उस गांव के दलित समुदाय के लोग करते हैं। जून 2020 में राजस्व अधिकारियों ने कुछ कट्टरपंथी मुस्लिमों के कहने पर बिना कोई जानकारी दिए इन मंदिरों को तोड़ दिया। वास्तविक तथ्यों और राजस्व रिकार्डों की जांच-पड़ताल किए बिना ही इन अधिकारियों ने इन मंदिरों को ध्वस्त करवा दिया। तथ्य यह है कि ये मंदिर पट्टे पर प्राप्त किए गए भूखंडों पर कई वर्षों से अस्तित्व में थे।

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तेनकासी जिले में यूं जेसीबी मशीन से ध्वस्त कर दिया गया मंदिर 

जिन स्थानों पर अल्पसंख्यक समुदायों का प्रभाव अधिक है, वहां वे हर बात को अपने पक्ष में मोड़ने के प्रयास भी करते हैं। 22 जून 2020 को जे. फीनिक्स नाम के आदमी को सीने में दर्द की शिकायत पर कोविलपट्टी के सरकारी अस्पताल के एक डॉक्टर को दिखाया गया। उसी सरकारी अस्पताल में कुछ समय बाद उसकी मृत्यु हो गई। इस व्यक्ति (फीनिक्स) के पिता जयराज को भी बुखार था और उन्हें भी उसी अस्पताल में ले जाया गया था, जहां थोड़े ही समय बाद 23 जून को उन्होंने सांस की बीमारी के चलते दम तोड़ दिया। ये दोनों ही मृतक भारतीय दंड संहिता की धाराओं 188, 269, 294 (बी), 353 और 506 (2) के तहत किए अपराधों के लिए न्यायिक हिरासत में थे। लेकिन इन मौतों पर ईसाइयों के वर्चस्व वाले व्यापारी संघ का दावा है कि ये 'हिरासत में हुई मौतें' हैं।

चर्च की जबरदस्ती
माइलादुथुराई जिले में एक छोटा सा गांव है आद्यामंगलम। इस गांव में राजुलु नामक व्यक्ति ने अपनी 5.5 एकड़ जमीन एक चर्च को बेची थी। बिक्री के समय साफ समझौता किया गया था कि जमीन के जिस हिस्से पर एक छोटा-सा मंदिर है, उसे नहीं छेड़ा जाएगा। इस स्थान पर हाल ही में हुई खुदाई में एक शिवलिंग और मंदिर के कुछ अन्य पुरावशेष मिले हैं। लोगों ने इस शिवलिंग की पूजा-अर्चना की व्यवस्था कर ली तो चर्च अधिकारियों ने इसका विरोध करते हुए कहा कि वे भूमि के एक हिस्से में कब्रिस्तान और एक में स्कूल बनाने वाले हैं।

ये और ऐसी अनेक दूसरी घटनाएं तमिलनाडु में कट्टरपंथी तत्वों के बढ़ते प्रभाव को स्पष्ट रूप से सिद्ध करती हैं। इनके बारे न अखबारों में खास कुछ छपता है, न राज्य सरकार कोई ठोस कार्रवाई करती है। स्थानीय स्तर पर कुछ जागरूक हिन्दू इनके विरुद्ध आवाज उठाते भी हैं तो उनका मुंह बंद कराने के प्रयास किए जाते हैं।