हिन्दू लड़की प्रज्ञा देबनाथ को कन्वर्ट कर बनाया आयशा जन्नत और फिर बना दिया जिहाद का चारा

    दिनांक 20-जुलाई-2020   
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ढाका पुलिस के एक ऑफिसर के हवाले से यह बात सामने आई है कि आयशा जन्नत मोहोना का असली नाम प्रज्ञा देबनाथ था लेकिन जब वह कक्षा 9 में पढ़ती थी तो इलाके के एक मौलवी के संपर्क में आ गयी। मौलवी ने उसका ब्रेनवाश कर इस्लाम में कन्वर्जन कर दिया। इस सबके बीच कब वह सक्रिय रूप से जेएमबी के साथ आतंकी गतिविधियों में शामिल करा दी गयी, किसी को पता तक न चला
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गत दिनों बांग्लादेश का सबसे खूंखार आतंकवादी संगठन- जमात-उल-मुजाहिद्दीन बांग्लादेश (जेएमबी)  की महिला विंग की प्रमुख आयशा जन्नत मोहोना को ढाका पुलिस की काउंटर टेररिज्म एंड ट्रांसनेसनल क्राइम (सिटीटीसी) की इकाई ने गिरफ्तार किया है। ज्ञात रहे कि आयशा पश्चिम बंगाल के हुगली जिले के धनियाखाली थाना के पश्चिम केशवपुर ग्राम की रहने वाली है।

ढाका पुलिस के एक ऑफिसर के हवाले से यह बात सामने आई है कि आयशा जन्नत मोहोना का असली नाम प्रज्ञा देबनाथ था लेकिन जब वह कक्षा 9 में पढ़ती थी तो इलाके के एक मौलवी के संपर्क में आ गयी। मौलवी ने उसका ब्रेनवाश कर इस्लाम में कन्वर्जन करा दिया। इस सबके बीच कब वह सक्रिय रूप से जेएमबी के साथ आतंकी गतिविधियों में शामिल करा दी गयी, किसी को पता तक न चला।

 जेएमबी में शामिल होने के बाद आयशा की शादी ओमान में रहने वाले एक मुस्लिम से टेलीफोनिक के जरिये कराई गई। शादी के बाद वह जिहादी आयशा को जेएमबी की गतिविधियों के लिए मोटी रकम भेजता था, जिस रकम को आयशा पश्चिम-बंगाल में हिन्दू युवा लड़कियों में इस्लाम का प्रचार करने व  जेएमबी की महिला विंग की गतिविधियों में शामिल करने के लिए खर्च करती थी। साथ ही साथ जेएमबी के लिए पश्चिम-बंगाल से धन की उगाही करना, मजहबी शिक्षा की व्यवस्था कराना और फिर मजहबी शिक्षा के बाद मुस्लिम युवकों को जेएमबी की जिहादी गतिविधियों के लिए तैयार करना था।

सबसे बड़ी बात यह है की आयशा जन्नत जब कक्षा 9 में थी तब से 2016 तक पश्चिम-बंगाल के बांग्लादेश सीमा से लगे हुए इलाकों में संचालित मदरसों में गुप्तरूप से उनके संपर्क में रहकर जेएमबी की जिहादी गतिविधियों को चलाती रही. आयशा के गाँव वालों का कहना है कि पढ़ने में तेज आयशा 24 सितंबर को कोलकाता गयी तब से वापस नहीं आई और अपनी मां को फोन से बोल दिया कि उसने इस्लाम मजहब को अपना लिया है और बांग्लादेश में एक मुस्लिम युवक से निकाह कर लिया है। जेएमबी की महिला विंग ने आयशा जन्नत को 2016 में पहली बार ढाका भेज दिया, तब से आयशा का लगातार ढाका व पश्चिम-बंगाल आना जाना लगा रहा।


गौरतलब है कि 8 फ़रवरी, 2020 को ढाका पुलिस ने जेएमबी की महिला विंग की प्रमुख को ढाका से ही गिरफ्तार किया था, तब से आयशा जन्नत मोहोना जेएमबी की महिला विंग की प्रमुख का कार्य देख रही थी. आयशा ढाका व ढाका से लगे हुए क्षेत्रों में व पश्चिम-बंगाल के मुर्शिदाबाद, मालदा, 24 उत्तर व दक्षिण परगना, दिनाजपुर, नदिया, बीरभूमि व बर्धमान जिलों में स्थिति मदरसों में जाकर इस्लामिक/मजहबी शिक्षा देना, मुस्लिम युवक व युवतियों को जिहाद के लिए मानसिक रूप से तैयार करना व अपनी ऑनलाइन मज़हबी गतिविधियों से हिन्दू लड़कियों को इस्लाम के प्रति प्रेरित करना, उसके प्रमुख कार्यों में से एक था. आयशा ने यह बात स्वयं ढाका पुलिस के सामने स्वीकार की है।

आयशा जन्नत की ढाका पुलिस द्वारा गिरफ़्तारी से पश्चिम-बंगाल में जेएमबी की जड़े कितनी गहरी हैं ,यह बात उजागर हुई है. अभी कुछ महीने पहले ही जेएमबी का नंबर तीन व पश्चिम-बंगाल का मुख्य सरगना अब्दुल करीम जो कि 2014 में हुए बर्धमान स्थित खगरागढ़ में हुए बमकांड व 2016 में गया में हुए बमकांड का मुख्य अभियुक्त था को मुर्शिदाबाद से गिरफ्तार किया गया। इसी तरह मार्च में कोलकाता पुलिस ने एक मुस्लिम युवती तानिया को गिरफ्तार किया था जो आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के लिए कार्य करती थी.


कितना खतरनाक है आतंकी संगठन-जेएमबी
 बांग्लादेश का सबसे खूंखार आतंकवादी संगठन अफ़ग़ानिस्तान के अलकायदा का ही एक धड़ा है. बांग्लादेश में जेएमबी का मुख्य कार्य अलकायदा की तर्ज पर इस्लामिक स्टेट का निर्माण करना है. इस्लामिक स्टेट के निर्माण के लिए वह पश्चिम-बंगाल व बांग्लादेश में युवक व युवतियों में मजहबी शिक्षा देना, उनको जिहाद के लिए तैयार करना है. इतना ही नहीं जो भी इस्लामिक स्टेट के निर्माण में बाधा बने उसको मौत के घाट उतार देना भी इसके कुत्सित कार्यों में एक है. उल्लेखनीय है कि बांग्लादेश में अब तक 300 से भी ज्यादा आतंकवादी गतिविधियों में जेएमबी का प्रत्यक्ष हाथ पाया गया है.