एलएसी पर चल रहे विवाद के बीच डीआरडीओ ने सेना को उपलब्ध कराए अत्याधुनिक “भारत” ड्रोन

    दिनांक 22-जुलाई-2020   
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पूर्वी लद्दाख क्षेत्र में चल रहे विवाद को देखते हुए भारतीय सेना को सटीक निगरानी के लिए ड्रोन की आवश्यकता थी। इस जरूरत को पूरा करने के लिए डीआरडीओ ने सेना को ड्रोन उपलब्ध कराया है, जिसका नाम “भारत ड्रोन” रखा गया है
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भारत-चीन के बीच जारी सीमा विवाद के बीच रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन ने भारतीय सेना को स्वदेश में विकसित 'भारत' ड्रोन दिये हैं। यह ड्रोन पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर अधिक ऊंचाई वाले इलाकों और पर्वतीय क्षेत्रों में सटीक निगरानी सुनिश्चित करने में सक्षम हैं। इन ड्रोन को डीआरडीओ की चंडीगढ़ स्थित प्रयोगशाला ने विकसित किया है।

सूत्रों के मुताबिक इन ड्रोन को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से लैस किया गया है, जिससे यह दोस्तों और दुश्मनों के बीच फर्क करके उसी हिसाब से काम करेगा। इसके अलावा इन्हें इस तरह से तैयार किया गया है कि ये बहुत ज्यादा ठंडे मौसम में भी काम करने में सक्षम हैं। साथ ही ये ड्रोन अत्याधुनिक नाइट विजन सुविधा से भी लैस हैं। यह घने जंगल में छिपे इंसानों का पता लगा सकते हैं। यह ड्रोन अभियान के दौरान रियल टाइम वीडियो ट्रांसमिशन उपलब्ध कराते हैं। ऐसे में सीमा पर भारत के लिए यह ड्रोन बहुत फायदेमंद साबित हो सकता हैं।

“भारत” सीरीज के ये ड्रोन दुनिया के सबसे हल्के और सक्रिय निगरानी ड्रोन में शामिल किये जा सकते हैं। डीआरडीओ के सूत्रों ने बताया कि छोटा मगर शक्तिशाली ड्रोन किसी भी स्थान से अत्यधिक सटीकता के साथ काम कर सकता हैं। इसकी यूनिबॉडी डिजायन और एडवांस रिलीज टेक्नोलॉजी इसे निगरानी अभियानों के लिए अधिक उपयुक्त बनाता है। बता दें कि इन ड्रोन को रडार भी डिटेक्ट नहीं कर सकते हैं।