'लव जिहाद' का केंद्र बनता जा रहा मेरठ, मां-बेटी का शव दफ़न कर घर में ही रह रहा था शमशाद

    दिनांक 23-जुलाई-2020   
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गत दो माह में मेरठ जिलेमें लव जिहाद के चार प्रकरण सामने आए, जिसमें मुसलमान युवकों ने हिन्दू नाम बता कर लड़की से जान-पहचान बढ़ाई थी। दो प्रकरण में हिन्दू लड़कियों की हत्या कर दी गई। तीसरे प्रकरण में मुस्लिम युवक अश्लील वीडियो बनाकर ब्लैकमेल करने लगा और चौथे प्रकरण में मुस्लिम युवक, हिन्दू लड़की को गर्भवती छोड़कर फरार हो गया
 
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उत्तर प्रदेश का मेरठ जिला ‘लव जिहाद’ का केंद्र बनता जा रहा है। विगत दो माह में ‘लव जिहाद’ की चौथी घटना प्रकाश में आई है। शमशाद नाम के एक युवक ने हिन्दू नाम बताकर प्रिया को अपने प्रेम जाल में फंसाया। प्रिया की दस वर्षीय बेटी थी। करीब 5 वर्ष तक शमशाद और प्रिया साथ-साथ रहे। इसी बीच जब महिला को शमशाद की असलियत का पता चला तब वह विरोध करने लगी। शमशाद ने मां–बेटी की हत्या करने के बाद शव को घर के अन्दर  ही दफ़न कर दिया। दोनों शव दफ़न करने के बाद शमशाद उसी घर में रह रहा था। जब पुलिस ने गहनता से जांच शुरू की तो शमशाद फरार हो गया। घर की खुदाई करने पर मां-बेटी के शव बरामद हुए।

गाजियाबाद के लोनी की रहने वाली प्रिया शादीशुदा थी और उसकी एक बेटी भी थी। वह अपने पति से अलग रहती थी। इसी बीच मेरठ जनपद के परतापपुर थाना अंतर्गत भूडभराल में रहने वाले शमशाद ने प्रिया से सोशल मीडिया के माध्यम से जान–पहचान बढ़ाई। सोशल मीडिया पर निकटता बढ़ाने के बाद शमशाद ने प्रिया से मुलाक़ात की। शमशाद को यह मालूम था कि अगर उसने अपना असली नाम बताया तो प्रिया, उस पर भरोसा नहीं करेगी। शमशाद ने प्रिया को अपना हिन्दू नाम बताकर अपने प्रेम जाल में फंसा लिया। दोनों करीब 5 वर्ष तक एक साथ रहे। हाल ही में प्रिया को यह पता चल गया था कि जिसके साथ वह रही है उसका असली नाम शमशाद है। उसने अपने प्रेम जाल में फंसाने के लिए हिन्दू नाम का सहारा लिया था। 

प्रिया की सहेली ने प्रिया और उसकी दस वर्ष की बेटी के गायब होने की सूचना पुलिस को दी थी। इस बीच पुलिस ने शमशाद से पूछताछ की  मगर शमशाद ने पुलिस को सही जानकारी नहीं दी। जब शमशाद को लगा कि वह पकड़ा जाएगा तो वह फरार हो गया। शमशाद बिहार का मूल निवासी है। शमशाद के फरार होने के बाद पुलिस ने जब उसके घर की खुदाई कराई तब उसके घर के अन्दर से दो कंकाल बरामद हुए।


लव जिहाद– प्रकरण—2 
उत्तर प्रदेश के मेरठ का निवासी शाकिब ने अपना नाम अमन बता कर हिन्दू लड़की को प्रेम जाल में फंसाया और फिर उसे घर से भगा लाया। दोनों मेरठ में आकर रहने लगे। कुछ दिन बीतने के बाद लड़की को जैसे ही पता लगा कि अमन नाम का युवक मुसलमान है। वह विरोध करने लगी। शाकिब को लग गया कि वह नहीं मानेगी तो उसने हत्या की योजना बनाई। शाकिब ने फिर एक बार धोखे का सहारा लिया और कोल्ड ड्रिंक में नशीली दवा पिलाकर बेहोश कर  दिया। शाकिब हिन्दू लड़की को खेत में ले गया और गला काटकर हत्या कर दी। पुलिस को 13 जून, 2019 को लड़की का अज्ञात शव मिला। काफी प्रयास के बाद पुलिस को घटना का कोई भी सुराग नहीं मिल पा रहा था। लगभग एक वर्ष के बाद पुलिस ने घटना का खुलासा कर  शाकिब को गिरफ्तार किया।

 
गौरतलब है कि मेरठ जिले का निवासी शाकिब पंजाब के लुधियाना में नौकरी करता था। लुधियाना के मोतीनगर थाना क्षेत्र में रहने वाली बी.कॉम की छात्रा पर उसकी नजर पड़ी। शाकिब ने पहले ही समझ लिया कि अगर छात्रा को यह पता लग गया कि वह मुसलमान है तो वह उससे बातचीत भी नहीं करेगी। शाकिब ने छात्रा से मुलाक़ात का बहाना खोजा और अपना नाम अमन बताया। छात्रा ने उसकी बात पर विश्वास कर लिया। शाकिब के फरेब को वह समझ नहीं पाई और वर्ष, 2019 में करीब 25 लाख रुपये के गहने लेकर घर से भाग गई। शाकिब उस छात्रा को भगा कर मेरठ ले आया। मेरठ के दौराला थाना अंन्तर्गत एक किराए के कमरे में लाकर ठहराया। गत वर्ष जब ईद का अवसर आया तब शाकिब उस छात्रा को अपने गांव ले गया। तब उस छात्रा को पता लगा कि अमन का असली नाम शाकिब है और वह मुसलमान है। छात्रा ने इसका विरोध किया। शाकिब ने देखा कि छात्रा नहीं मान रही है तो उसने नशीली दवा पिलाकर बेहोश किया और फिर खेत में ले जाकर गला काट कर हत्या कर दी।

 पुलिस कई महीनों तक ख़ाक छानती रही मगर कहीं कोई सुराग हाथ नहीं लग रहा था। इसके बाद मेरठ की पुलिस को पता लगा कि लुधियाना जनपद की 23 वर्षीय बी.कॉम की छात्रा अपने घर से गायब है। मेरठ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय साहनी ने बताया, " यह बहुत ही ब्लाइंड मर्डर केस था। कई प्रकार के प्रयास किये जा चुके थे। मगर बाद में हम लोगों ने मेरठ के दौराला थाना क्षेत्र के लोइया गांव के हर उन युवकों के बारे में पता लगाया जो बाहर नौकरी करते हैं। एक साल की मेहनत के बाद जब शाकिब के बारे में छानबीन की गई तो इस हत्याकांड का खुलासा हो सका।"


लव जिहाद–प्रकरण—3
मेरठ के एक अस्पताल में वसीम नौकरी करता था। इसने दिनेश कुमार रावत के नाम से फेसबुक पर आई डी बनाई। इसका पहले से ही लव जिहाद में किसी हिन्दू लड़की को फंसाने का इरादा था। किसी को शक न हो इसके लिए वसीम ने दिनेश कुमार रावत के नाम से नकली आधार कार्ड एवं अन्य पहचान पत्र भी छपवा लिया था। वसीम ने फेसबुक के माध्यम से हापुड़ जनपद की रहने वाली लड़की से जान–पहचान बढ़ाई।  प्रेम जाल में फंसा लेने के बाद वसीम ने उसका अश्लील वीडियो भी बना लिया था। अश्लील वीडियो बना लेने के बाद वसीम पीड़िता को ‘ब्लैकमेल’ करने लगा। तब यह सच सामने आया कि दिनेश कुमार रावत असल में वसीम है। 

सचाई सामने आने पर वसीम ने पीड़िता को जान से मारने की धमकी दी। 8 जून, 2020 को पीड़िता के पिता ने वसीम के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।  मेरठ जनपद के किठौर सर्किल के क्षेत्राधिकारी रामानन्द कुशवाहा ने बताया कि “पुलिस की विवेचना में यह पता चला कि वसीम विगत दो वर्षों से मेरठ के एक अस्पताल में दिनेश रावत नाम की फर्जी आईडी पर नौकरी कर रहा था। पुलिस ने उसके पास से दिनेश रावत और वसीम अहमद नाम के पहचान पत्र बरामद किये हैं। पुलिस ने जब वसीम को गिरफ्तार किया तब उसने रौब झाड़ने के लिए खुद को पत्रकार बताया। मुंडाली थाना की पुलिस ने वसीम के खिलाफ आईटी एक्ट और आईपीसी 376 सहित कई गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर उसे गिरफ्तार करके जेल भेज दिया।”

लव जिहाद–प्रकरण—4
मेरठ के थाना लिसाड़ी गेट के ‘कांच का पुल’ मोहल्ले का निवासी फैसल नई दिल्ली की एक फैक्ट्री में नौकरी करता था। वहीं पर इसकी मुलाक़ात एक लड़की से हुई जो उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर की रहने वाली है। पहली मुलाक़ात में फैसल ने असली नाम न बता कर अपना नाम सोनू बताया। उस लड़की को प्रेम जाल में फंसा लिया। कुछ माह पहले फैसल ने उससे शादी भी कर ली और एक किराये के मकान में लाकर रखा। जब उसके मुसलमान होने का पता चला तब पीड़िता ने इसका विरोध किया। उसके बाद से फैसल फरार हो गया। पीड़िता गर्भवती है।

बुलदंशहर की रहने वाली पीड़िता ने विगत जून माह में पुलिस को बताया कि उसके माता-पिता का स्वर्गवास हो चुका है। माता–पिता के न रहने पर आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी। इसके लिए वह दिल्ली स्थित एक फैक्ट्री में काम करने लगी। वहीं पर उसकी मुलाकात मेरठ जनपद के सोनू उर्फ फैसल से हुई। फैसल ने नाम बदलकर उसे प्रेम जाल में फंसा लिया। कुछ समय बाद दोनों ने शादी कर ली। मार्च के महीने में जब लॉकडाउन हुआ तो फैक्ट्री बंद हो गई। फैसल उसे  लेकर मेरठ पहुंचा और एक किराये का मकान लेकर रहने लगा। जब पीड़िता को यह पता लगा कि वह मुसलमान है तो वह घर छोड़ कर फरार हो गया।