कांग्रेस में सत्ता संघर्ष: अशोक गहलोत का पीएम को लेटर, तो सचिन पायलट गुट को हाईकोर्ट से राहत

    दिनांक 24-जुलाई-2020   
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विधानसभा अध्यक्ष द्वारा सचिन पायलट समेत कांग्रेस के बागी विधायकों की सदस्यता समाप्त करने के नोटिस के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने स्पीकर के नोटिस पर स्टे लगा दिया है। यानी स्पीकर पायलट समर्थक विधायकों को अयोग्य करार नहीं दे पाएंगे।

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राजस्थान में कांग्रेस पार्टी के नेताओं में चल रहे सत्ता संघर्ष में अब लेटर टू पीएम-सीएम की राजनीति शुरू हो गई है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने प्रधानमंत्री को पत्र लिख बताया है कि खरीद-फरोख्त के जरिए लोकतांत्रिक तरीके से चुनी हुई राजस्थान सरकार को गिराने का प्रयास किया जा रहा है। जबकि भाजपानीत भैंरोसिंह शेखावत सरकार गिराने के प्रयासों का कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष रहते उन्होंने (अशोक गहलोत) विरोध किया था। गहलोत ने कई भाजपा नेताओं पर आरोप लगाकर पूरे पांच साल सरकार चलाने का दावा किया। गहलोत की लेटर राजनीति से एक बात जगजाहिर हो गई है कि उनके पास पर्याप्त संख्याबल नहीं है और वे सरकार गिरने के बेतहाशा भय से पत्र लिखकर अपनी पीड़ा पीएम को बता रहे हैं।

इसके साथ ही विधानसभा अध्यक्ष द्वारा सचिन पायलट समेत कांग्रेस के बागी विधायकों की सदस्यता समाप्त करने के नोटिस के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने स्पीकर के नोटिस पर स्टे लगा दिया है। यानी स्पीकर पायलट समर्थक विधायकों को अयोग्य करार नहीं दे पाएंगे। कोर्ट ने केन्द्र सरकार को भी पक्षकार बनाने की अपील स्वीकार कर ली है। इससे पहले हाईकोर्ट ने 24 जुलाई तक बागी विधायकों की सदस्यता समाप्त नहीं करने का विधानसभा अध्यक्ष को आग्रह किया, लेकिन विस अध्यक्ष ने अपने अधिकारों का हवाला देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई। सुप्रीम कोर्ट ने स्पीकर की याचिका पर कहा कि लोकतंत्र में असंतुष्टों की आवाज को दबाया नहीं जा सकता। याचिका पर सोमवार को पुन: सुनवाई होगी। इसके साथ ही आगामी कुछ दिनों में विधानसभा का सत्र आहूत करने की चर्चाओं ने भी सियासी हलकों में सरगर्मी बढ़ा दी है, क्योंकि सीएम गहलोत एक सप्ताह में राज्यपाल कलराज मिश्र से तीन बार मुलाकात कर चुके हैं।

वहीं दूसरी तरफ प्रदेश में लगातार प्रवर्तन निदेशालय, सीबीआई और इनकम टैक्स जैसी जांच एजेंसियों द्वारा छापे की कार्रवाई की जा रही है। ईडी ने बुधवार को 7 करोड़ के फर्टिलाइजर स्कैम मामले में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के भाई अग्रसेन गहलोत के घर और फॉर्म हाउस पर छापे की कार्रवाई की। विभिन्न रिपोर्टस के अनुसार 2017 में अशोक गहलोत के भाई अग्रसेन गहलोत का नाम फर्टिलाइजर यानी उवर्रक घोटाले में सामने आया था। उन पर आरोप लगे थे कि उन्होंने साल 2007 से 2009 के बीच फर्टिलाइजर की आपूर्ति में किसानों का हक मारकर निजी कंपनियों को फायदा पहुंचाया। उस समय अशोक गहलोत राजस्थान के तत्कालीन मुख्यमंत्री थे। प्रदेश में ईडी, इंकम टैक्स और सीबीआई बीते 10 दिनों में अशोक गहलोत के करीबियों और रिश्तेदारों पर अब तक 5 बड़ी कार्रवाई कर चुकी है।

अशोक गहलोत द्वारा प्रधानमंत्री को लिखे गए पत्र के जवाब में भाजपा प्रदेशाध्यक्ष डॉ. सतीश पूनिया ने प्रदेश वासियों के नाम एक पत्र लिखकर कहा कि पिछले 13 दिनों से राजनीतिक रूप से स्थिर एवं शांत प्रदेश में उत्पन्न इस अराजकता एवं अस्थिरता की दोषी कांग्रेस पार्टी स्वयं है और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत व उनकी पार्टी के जिम्मेदार लोग बिना वजह भाजपा को आरोपित कर रहे हैं। स्वयं की सत्ता खोने के भय ने मुख्यमंत्री गहलोत और उनकी पूरी पार्टी को विचलित कर दिया है। उनके द्वारा पीएम मोदी को लिखे गए पत्र से यह तो स्पष्ट हो गया है कि सरकार अल्पमत में है और अस्तित्व बचाने के लिए जूझ रही है। गहलोत ने अपने ही दल के विधायकों का विश्वास खो दिया है। वो कुर्सी बचाने की अंतिम कोशिश कर रहे हैं और इसी कारण सरकार कांग्रेस के विधायक और मंत्री बंधक बने हुए हैं। गहलोत ने अभी तक इस बात का जवाब नहीं दिया है कि सरकार कितने दिन बाड़े में बंद रहेगी ? इस संवैधानिक संकट का समाधान कब करेगी? बाहर आकर जनता की सेवा कब करेगी ? मुख्यमंत्री जी को आजकल अनेक बार बोलते हुए सुना है। वो कुर्सी बचाने के लिए भाजपा के खिलाफ तो बोलते हैं लेकिन भ्रष्टाचार, किसान कर्ज माफी, बिजली बिल और विकास कार्य पर नहीं सुने जाते है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है।