पश्चिम बंगाल: तारकेश्वर धाम के आस-पास जारी है नंदियों की हत्याओं का दौर

    दिनांक 24-जुलाई-2020   
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हावड़ा से 70 किलोमीटर दूर तारकेश्वर धाम (शिवमंदिर) जो की हिन्दुओं का पवित्र तीर्थ स्थान है पर रहने वाले लिविंग नंदी की गला काट कर हत्या की गई थी। तब से लेकर अब तक तारकेश्वर धाम में 6 नंदियों (बैल) की तड़पा—तड़पाकर हत्याएं की जा चुकी हैं।

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पश्चिम बंगाल में आए भयंकर चक्रवाती तूफ़ान “अम्फान” के दिन जिहादी तत्वों द्वारा राज्य में मजहबी उन्माद फ़ैलाने की असफल घटना हुई थी। हावड़ा से 70 किलोमीटर दूर तारकेश्वर धाम (शिवमंदिर) जो की हिन्दुओं का पवित्र तीर्थ स्थान है पर रहने वाले लिविंग नंदी (बैल) की गला काट कर हत्या की गई थी। तब से लेकर अब तक तारकेश्वर धाम में 6 नंदियों  की तड़पा—तड़पाकर हत्याएं की जा चुकी हैं।

गौरतलब है कि तारकेश्वर धाम को पश्चिम बंगाल का काशी कहा जाता है। इस क्षेत्र में बड़ी संख्या में बैल रहते हैं। वैसे तो यहां पर हमेशा भक्तों का तांता लगा रहता है, लेकिन सावन माह में शिवभक्तों की बहुत भीड़ होती है। राज्य के स्थानीय लोगों के अलावा भारत के विभिन्न भागों से शिवभक्त कांवड़ यात्रा निकालते हैं। महादेव का दूध व गंगा जल से अभिषेक करते हैं और अपने जीवन को धन्य करते हैं। लेकिन इसी स्थान पर जिहादियों ने एक क्रूर घटना को अंजाम दिया। अम्फान के दिन जिहादी तत्वों द्वारा मंदिर के एक लिविंग नंदी (बैल) की गला काटकर हत्या कर दी गई। जिहादी तत्वों का दुस्साहस यहीं तक सीमित नहीं रहा। ठीक इसी तरह मंदिर के आस-पास रहने वाले अन्य बैलों को भी निशाना बनाया गया। 7 मार्च को एक नंदी के शरीर को लोहे की सरिया से बेध दिया गया। अंतत: बाद में उस नंदी की मौत हो गयी। इस घटना के कुछ दिनों बाद एक अन्य बैल के ऊपर तेजाब (एसिड) फेंक दिया गया। कुछ समय तक वह बैल जंगल में रहा, लेकिन उसकी भी मौत हो गयी। इसके अलावा 26 जून को तारकेश्वर के चालपट्टी इलाके में एक बैल के शरीर में लोहे की सरिया आर—पार कर दी गई, जिससे दूसरे दिन ही उसकी मौत हो गयी।


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दरअसल जिहादियों का दुस्साहस क्यों इतना बढ़ा हुआ है, इसके पीछे कुछ वजह है। पिछले कई सालों से यानी जब से ममता बनर्जी राज्य की मुख्यमंत्री बनीं तो उनकी शह पर इस तीर्थ स्थल में दखल दिया गया। क्योंकि इस मंदिर में चढ़ावे के रूप में बहुत बड़ी धनराशि आती है। इस सबको देखते हुए ममता ने इस हिन्दू मंदिर बोर्ड के अध्यक्ष के रूप में एक मुस्लिम फिराद हकीम को नियुक्त किया था। हालांकि इसको लेकर जब ज्यादा विवाद हुआ तो फिराद हकीम ने ट्रस्टीशिप के चेयरमैन से त्यागपत्र दे दिया। लेकिन फिराद हकीम का जब ये मंसूबा पूरा नहीं हुआ तो उसने इलाके की जनसांख्यकी परिवर्तन के लिए हथकंडे अपनाने शुरू कर दिए।

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इस काम में राज्य सरकार का उसे पूरा सहयोग मिला। वह काफी हद तक इस काम में सफल भी हुआ। चूंकि यहां पर बहुत सी ऐसी धर्मशालाएं व आवास हैं, जिन पर किसी का मालिकाना हक़ नहीं है। सत्ता शक्ति का इस्तेमाल करते हुए फिराद हकीम ने ऐसे सभी धर्मशालाएं व आवासों को मुस्लिमों द्वारा कब्ज़ा करा लिया जो हिन्दुओं की थीं। इतना ही नहीं तारकेश्वर शिवमंदिर में पूजा के लिए उपयोग में आने वाली पूजा सामग्री (दूध, फूल, नारियल से लेकर गंगाजल तक) की छोटी व बड़ी दुकानों में भी मुस्लिमों द्वारा कब्ज़ा कर किया गया।

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सत्ताधारी पार्टी और इस्लामिक तत्वों की साजिश का भाग

पश्चिम बंगाल में हिन्दुओं की आस्था पर कुठाराघात करने की कोई यह पहली घटना नहीं है। शायद ही ऐसा कोई दिन होता हो जब राज्य से कहीं कोई हिन्दू उत्पीड़न या हिन्दुओं की आस्था पर कुठाराघात करने का समाचार नहीं आता है। दरअसल यह सब सत्ताधारी पार्टी और इस्लामिक तत्वों की साजिश का एक भाग है। इस तरह की घटना को अंजाम देने के पीछे की वजह यह होती है कि ऐसी घटना के बाद हिन्दू प्रतिउत्तर में कुछ करे तब मौके की ताक में पहले से तैयार बैठे जिहादी इलाके में उन्माद फैलाएं, हिन्दुओं की चल संपत्ति व व्यापारिक प्रतिष्ठानों पर कब्जा करें या उन्हें आग के हवाले करके उन्हें नुकसान पहुंचाएं। इसी बीच उन्मादी तत्व हिन्दुओं के मंदिरों व पूजा स्थलों में तोड़-फोड़ करते हैं। ऐसी स्थिति में हिन्दू समुदाय शांति की तलाश में उस स्थान और अपनी सारी सपत्ति को छोड़कर बेहतर भविष्य के लिए पलायन कर जाता है। बस यही वह मौका होता है जब मजहबी उन्मादी हिन्दुओं की उस संपत्ति पर कब्ज़ा जमा लेते हैं।