शांतिदूतों की पिटाई से गई दलित की जान, मुसलमानों ने दाह-संस्कार तक नहीं होने दिया

    दिनांक 29-जुलाई-2020
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संजीव कुमार
पूर्णिया स्थित डगरूआ के दुबैली गांव के रहने वाले सर्वलाल हरिजन का मात्र इतना कसूर था कि उनका सुअर मुसलमानों के बासबाड़ी में चला गया। इसके बाद दबंगों ने पीड़ित परिवार की महिलाओं पर न केवल आपत्तिजनक टिप्पणी की बल्कि उनके साथ अभद्र व्यवहार किया। इतना ही नहीं जिहादियों ने सर्वलाल की बेटी राजकुमारी देवी और बेटा संतोष कुमार को घायल किया। सर्वलाल की स्थिति पहले से ही गंभीर थी। अंतत: उनकी मृत्यु हो गई
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जय भीम, जय मीम का नारा तो बड़ा आकर्षक लगता है लेकिन, सच्चाई इससे बिल्कुल उलट है। मीम का हथौड़ा, भीम की आस्था पर अनवरत चलता है। पाकिस्तान में जो कुछ घटित हो रहा है, वह मीम की सचाई को बताता ही है। लेकिन भारत भी इनके जुल्म कम नहीं हैं। बिहार के पूर्णिया में इसकी हकीकत सामने दिखी जब एक महादलित व्यक्ति की हत्या मीम समर्थकों ने कर दी। इस व्यक्ति का कसूर सिर्फ इतना था कि वह हिन्दू था और मुस्लिम बहुल इलाके में स्वाभिमान के साथ जीना चाहता था।
पूर्णिया स्थित डगरूआ के दुबैली गांव में 2 जून, 2020 को सर्वलाल हरिजन को गांव के शांतिप्रिय समुदाय के दबंगों ने जमकर पीटा था। उन्हें अधमरा किया। उनके घर में लूट-पाट की गई और फिर घर में आग भी लगा दी गई। सर्वलाल हरिजन का कोई कसूर नहीं था। उनका कसूर था कि वे स्वाभिमान के साथ जीना चाहते थे। किसी के रहमो-करम पर जीवित न रहकर अपनी जीविकोपार्जन कर रहे थे। एक दिन उनका सुअर मजहबियों के एक दबंग व्यक्ति के बासबाड़ी में चला गया और उसके बाद वही हुआ जो पूर्णिया, अररिया, किशनगंज और कटिहार की सच्चाई है। दबंगों ने पीड़ित परिवार की महिलाओं पर भी आपत्तिजनक टिप्पणी की। उनके साथ अभद्र व्यवहार किया। इनकी पिटाई में सर्वलाल की बेटी राजकुमारी देवी और बेटा संतोष कुमार भी बुरी तरह जख्मी हुए। घटना के बाद सभी घायलों को इलााज के लिए पूर्णिया सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया। सर्वलाल की स्थिति गंभीर थी, इसलिए उन्हें कुछ दिनों के बाद बेहतर इलाज के लिए कटिहार मेडिकल काॅलेज भेजा गया। घटना के 34 दिनों बाद अंततः 5 जुलाई को सर्वलाल हरिजन की मृत्यु हो गई।
शांतिदूतों का कहर इसके बाद भी जारी रहा। सर्वलाल की अंतेष्टि भी नहीं करने दी गई। दबंगों ने ऐसी फिजा बनाई कि अंततः उन्हें दाह-संस्कार के बदले अपने घर के समीप ही दफनाना पड़ा। दुर्भाग्य की बात है इस पूरे घटनाक्रम में प्रशासन मौन रहा। 3 जून को ही सर्वलाल मांझी उर्फ सर्वलाल हरिजन की बेटी राजकुमारी देवी ने हरिजन थाना में केस किया था जिसकी संख्या 32/20 है। थाना इंचार्ज ने उसी दिन 341,323,324,427 समेत कई धाराएं लगाई थी और सब-इंस्पेक्टर पृथ्वी पासवान को इस केस की जांच का जिम्मा सौंपा था। दर्ज प्राथमिकी में राजकुमारी देवी का कहना था कि उनके सुअर के बच्चे को इजराइल के दो बेटे- मिंटु और मोहम्मद नाजिम ने पत्थर से कूचकर मार दिया

। जब उन्होंने इसकी शिकायत की तो इन दोनों ने राजकुमारी देवी को गाली दी और अभद्र भाषा का प्रयोग किया। उन लोगों ने धमकी दी कि अभी सुअर मारे हैं, बाद में तुमको भी मारेंगे। इन दोनों ने उनके साथ छेड़खानी भी की।यहां तक कि वस्त्र खींचकर अर्द्धनग्न कर दिया। इनके बिलखने पर इनके भाई सूरज हरिजन, इनके दादा सुग्रीव हरिजन, मां रूदिया देवी समेत कई लोग बचाने आये। इसी बीच गांव के और लोग भी पहुंचे। इजराइल के बाकी लड़के भी अपने भाईयों के पक्ष में आकर लड़ने लगे। गांव के और लोग भी आ गये और सबने मिलकर पिता की जमकर पिटाई की। बीच-बचाव करने वाले लोगों को भी पीटा गया। मृत्यु समीक्षा रिपोर्ट में भी इस बात का जिक्र है कि 2 जून को हुई लड़ाई में इन्हें अंदरूनी चोट लगी थी, जिसके कारण एक महीने से सर्वलाल विभिन्न अस्पतालों में इलाज करा रहे थे। 5 जुलाई को उनकी मृत्यु हुई।
इस घटना के काफी समय बीत जाने के बाद भी प्रशासन ने तत्परता नहीं दिखाई। अंततः 22 जुलाई को राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने स्वतः संज्ञान लेते हुए पूर्णिया के जिला पदाधिकारी और पुलिस अधीक्षक को इस मामले में तलब किया। आयोग ने इस महत्वपूर्ण घटना में प्रशासन द्वारा की गई कार्रवाई की विस्तृत जानकारी मांगी। आयोग की सख्ती के बाद 28 जुलाई को इस कांड में 3 अपराधियों को गिरफ्तार किया गया।
बहरहाल गौर करने वाली बात यह है कि अगर इस तरह की घटना में शांतिप्रिय समुदाय का एक व्यक्ति भी पीड़ित होता है तो मीडिया अब तक आसमान सिर पर उठा चुका होता। उस पर टीवी डिबेट होतीं, बड़े—बड़े लेख लिखे जा चुके होते। लेकिन पीड़ित हिन्दू होते ही ऐसी घटनाओं का कोई जिक्र नहीं होता है। उन्हें दबा दिया जाता है।