झूठे ट्वीट पर फिर घिरे राहुल गांधी

    दिनांक 29-जुलाई-2020   
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राहुल गांधी झूठ फैलाने से बाज नहीं आ रहे हैं। अभी हाल ही में उन्होंने हिमाचल प्रदेश सरकार की योजना को अपना आइडिया बताकर श्रेय लेने की कोशिश की। उनके इस झूठ पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एवं गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपानी ने आईना दिखाया

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जुलाई को राहुल गांधी ने ट्वीटर के माध्यम से एक बार फिर झूठ फैलाने की कोशिश की। उन्होंने ट्वीट किया, “ हिमाचल प्रदेश सरकार की ‘वन डिस्ट्रिक्ट, वन प्रोडक्ट’ एक अच्छी योजना है। मैंने ही कुछ समय पहले यह सुझाव दिया था।” राहुल गांधी के इस ट्वीट के बाद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ट्वीट किया, “ शायद उनकी याददाश्त कमजोर हो गई है। थोड़ा जोर डालेंगे तो याद आ जाएगा। वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के घोषणा पत्र में हर जनपद में स्थानीय उत्पाद को बढ़ावा देने की बात कही गई थी। आज यह योजना छोटे उद्योगों और स्थानीय कामगारों के लिए वरदान साबित हो रही है।”
राहुल गांधी के ट्वीट का जवाब देते हुए गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपानी ने लिखा, “गुजरात सरकार की पहल को कॉपी करना और उसे अपना आइडिया बताकर बेचना आपको शोभा नहीं देता। मैं ये उम्मीद नहीं करता कि सब कुछ आपकी जानकारी में होगा मगर आपके स्क्रिप्ट लिखने वालों को तो जानकारी होनी चाहिए।” विजय रूपानी ने गुजरात की पूर्व मुख्यमंत्री आनंदी बेन पटेल के वर्ष 2016 के ट्वीट का भी उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने एक ‘गांव–एक उत्पाद’ योजना की बात कही थी।
उत्तर प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने के बाद ‘एक जनपद–एक उत्पाद’ योजना को लागू किया गया। इस योजना के लागू होने के बाद अब हर जनपद में स्थानीय उत्पाद को बढ़ावा दिया जा रहा है। प्रदेश के प्रत्येक जनपद में कोई न कोई उत्पाद अब अपनी पहचान बना रहा है। उन उत्पादों पर एक नजर डालते हैं।

—अमेठी जिले के तराई क्षेत्रों में प्रकृतिक रूप से बहुवर्षीय घास पाई जाती है, जिसे स्थानीय भाषा में सरपत कहा जाता है। इससे फुट मैट, कैरी बैग, रस्सी, पेन स्टैंड एवं मेज आदि प्रमुख रूप से निर्मित किये जा रहे हैं।

—अलीगढ़ जिला समूचे भारत में ताले के निर्माण हेतु विख्यात है। वर्तमान समय में डोरलाक, साइकिल लाक, मल्टीपरपज लॉक आदि बनाये जा रहे हैं।

—अम्बेडकर नगर के टांडा क्षेत्र में पावरलूम से वस्त्र निर्माण का कार्य किया जा रहा है। इस उद्योग में हजारों लोगों को रोजगार प्राप्त है।

—आगरा में चमड़े से निर्मित फुटवियर, बेल्ट एवं पर्स आदि का कार्य होता है। इस कार्य में कच्चा माल मुख्यतः कानपुर, कोलकाता, चेन्नई एवं ताईवान से आयात किया जाता है।

—आजमगढ़ जिले के निजामाबाद क्षेत्र में काली मिटटी की कलाकृतियां तैयार की जाती हैं। इस क्षेत्र में हजारों कारीगर कार्यरत हैं, जो विभिन्न प्रकार की ब्लैक पाटरी जैसे-मिटटी के बर्तन, सुराही, फूलदान आदि बनाते हैं। इस क्राफ्ट की देश-विदेश में अत्यधिक मांग है।

—इटावा में वस्त्र उत्पाद का कार्य काफी मात्रा में किया जाता है। कारीगरों द्वारा डिजाइनर कपड़ों जैसे सिंगल बेडशीट, डबल बेडशीट, तकिया का कवर, गमछा आदि प्रमुख रूप से तैयार किया जाता है।

—प्रयागराज जनपद में मूंज से सम्बंधित शिल्प का कार्य हो रहा है। कच्चा माल स्थानीय स्तर पर आसानी से उपलब्ध होने के कारण अब मूंज से निर्मित विविध वस्तुएं जैसे टोकरी, दलिया, पेपर वेट आदि बाजार में उपलब्ध हैं।

—उन्नाव जिले में जरी-जरदोजी, कढ़ाई हस्तशिल्प की एक अत्यंत समृद्ध परम्परा है। मूलरूप से सोने के तार से की जाने वाली जरदोजी कढ़ाई की काफी मांग है।

—एटा में कस्बा जलेसर ऐतिहासिक स्थल है, जहां मगध नरेश जरासंध की राजधानी थी। मुख्य रूप से घूंघरू एवं घंटी बनाने का कार्य किया जा रहा है।

—औरैया का पशुपालन में अग्रणी स्थान है। बड़े पैमाने पर शुद्ध देशी घी का उत्पादन किया जाता है। शुद्ध देशी घी की आपूर्ति देश के विभिन्न प्रान्तों में की जाती है।

—कन्नौज जनपद ‘इत्र नगरी’ के नाम से प्रसिद्ध है। वर्तमान समय में बड़ी संख्या में इत्र उत्पादक ईकाइयां काम कर रही हैं, जहां हजारों लोगों को रोजगार मिला हुआ है।

—कानपुर देहात का पुखराया क्षेत्र बर्तनों के उत्पादन के लिए जाना जाता है। पुखराया में एल्युमिनियम के भोगौने, टंकी, चम्मच, केतली, स्टील बाल्टी, थाली, प्रेशर कुकर आदि के निर्माण की ईकायां कार्यरत हैं।

—कानपुर नगर, चमड़ा उद्योग का सबसे बड़ा केंद्र रहा है। यहां चमड़े से निर्मित फुटवियर, बेल्ट, पर्स, चप्पल एवं चमड़े के वस्त्र बनाये जाते हैं।

—जनपद कासगंज में कशीदादारी, हाथ से कढ़ाई , मूंगा, मोती रेशम आदि का कार्य होता है। जनपद कासगंज में हजारों कारीगर जरी-जरदोजी के कार्य में लगे हुए हैं।

—जनपद कुशीनगर में केले के रेशे से 'बनाना फाइबर' का प्रयोग मजबूत धागा एवं बैग निर्माण के कार्य में किया जाता है। अवशेष बचे केले के तने का उपयोग जैविक खाद के लिए होता है।

—कौशाम्बी एक कृषि प्रधान जनपद है। जनपद में केले की बहुतायत खेती हो रही है। यहां केले के चिप्स एवं सौन्दर्य प्रसाधन इत्यादि उत्पाद तैयार किये जा रहे हैं।

—गाजियाबाद में इंजीनियरिंग उद्योग की अधिकता है। ऑटोमोबाइल, स्पेयर पार्ट्स, शुगर मिल, मशीनरी पार्ट्स आदि की ईकाइयां जनपद में कार्य कर रही हैं।

—गाजीपुर में जूट वाल हैंगिंग का कार्य परम्परागत रूप से होता आया है। हस्तशिल्पियों द्वारा जूट वाल हैंगिंग का निर्यात भी किया जा रहा है।

—गोरखपुर जिले में टेराकोटा एक विशेष प्रकार की शिल्प है। इसका निर्माण गोरखपुर की स्थानीय मिट्टी से किया जाता है। बड़े पैमाने पर लोग इस कार्य से रोजगार प्राप्त कर रहे हैं।

—गोंडा जनपद एक तराई क्षेत्र है। किसान द्वारा गन्ना, मक्का, धान आदि की फसलें उगाई जाती हैं।

—गौतमबुद्ध नगर में सिले-सिलाए वस्त्र का काफी बड़ा बाजार है। लगभग 2500 रेडीमेड गारमेंट ईकाइयां स्थापित हैं। यहां का तैयार माल 70 फीसदी निर्यात किया जाता है।

—चित्रकूट जनपद में लकड़ी की पर्याप्त मात्रा में उपलब्धता है। यहां पर लकड़ी के खिलौने बनाये जाते हैं। खिलौने मेले और प्रदर्शनियों में बिकने के लिए भेजे जाते हैं।

—चंदौली में साड़ियों पर जरी-जरदोजी का काम किया जाता है। यहां पर ज़री की कला वाराणसी से आई है। वर्तमान समय में जनपद चंदौली में ज़री का काम ‘जॉब वर्क’ के रूप में किया जाता है।

—जालौन में रद्दी के कागज़ एवं कपड़े की कतरन से हैण्ड मेड पेपर बनाने का कार्य होता है जिसका उपयोग आफिस फाइल, कैरी बैग, सोख्ता पेपर आदि के लिए किया जाता है।

—जौनपुर में ऊनी दरी का कार्य परम्परागत ढंग से होता है। विभिन्न ईकाइयों द्वारा दरी का उत्पाद किया जाता है।

—झांसी में खिलौने का निर्माण किया जाता है। बड़े-बड़े महानगरों में इसे बेचा जाता है।

—देवरिया जनपद में घरों की सजावट एवं उपयोगी सामग्री हेतु झूमर, झालर, पर्दा एवं कास्मेटिक चादर की कढ़ाई-बुनाई का कार्य किया जाता है।

—पीलीभीत की बांसुरी देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी प्रसिद्ध है। कच्चा माल असम से आता है।

—प्रतापगढ़ जनपद की प्रमुख पहचान यहां का आवंला है। इस जनपद में फूड प्रोसेसिंग द्वारा आवंले का मुरब्बा, अचार, जेम, जेली, लड्डू, बर्फी, कैंडी, जूस आदि बनाया जाता है।

—फतेहपुर में टेक्स्टाइल उद्योग से सम्बंधित कई ईकाइयां कार्य कर रही हैं। जींस के कपड़े के अलावा चादर का निर्माण भी किया जाता है।

—फर्रूखाबाद में प्रिंटिंग के ‘ब्लाक’ बनाये जाते हैं। इन ब्लाक की मदद से साड़ी, सूट, दुप्पट्टा एवं शाल पर प्रिंटिंग का कार्य किया जाता है।

—फिरोजाबाद में कांच की वस्तुओं का निर्माण हस्त शिल्पियों द्वारा किया जाता है, जिसमें चूड़ी, लालटेन एवं कांच के अन्य सामान तैयार किये जाते हैं।

—फैजाबाद में गुड़ उत्पादन का कार्य बड़े पैमाने पर होता है। गुड़ से सम्बंधित उत्पाद जैसे गजक आदि का निर्माण किया जता है।

—बदायूं जनपद अपनी ज़री-जरदोजी के लिए विख्यात है। रेशम, करदाना, मोती, आदि का निर्माण किया जाता है।

—बरेली जनपद में ज़री वस्त्र बनाये जाते हैं। इन वस्त्रों को सोने, चांदी एवं रेशम के तारों के मिश्रण से बनाया जाता है। इस शिल्प के अंतर्गत साड़ी, लहंगा, देवी- देवताओं के परिधान, दुप्पट्टे, हैंडबैग इत्यादि तैयार किये जाते हैं।

—बलरामपुर में मसूर की दाल प्रचुर मात्रा में उगाई जाती है। इसकी बिक्री उत्तर प्रदेश के अलावा बाहर के प्रदेशों में भी की जाती है।

—बस्ती जनपद में काष्ठ शिल्प का कार्य बहुतायत में किया जाता है। सोफा सेट श्रृंगार दान एवं इमारतों में इस्तेमाल होने वाला सामान तैयार किया जाता है।

—बहराइच जनपद में गेहू के डंठल से बनी कला-कृतियां अपनी पहचान बना चुकी हैं। गेहूं के डंठल से चित्र एवं आकृतियां तैयार की जाती हैं।

—बागपत जनपद के खेकड़ा क्षेत्र में अनेक वर्षों से हैंडलूम की ईकाइयां स्थापित हैं। हैंडलूम एवं पावरलूम द्वारा निर्मित परदे, किचेन तौलिया आदि प्रसिद्ध हैं।

—बाराबंकी जनपद में हथकरघे से कपड़ा बुनाई का कार्य किया जाता है। हथकरघे से बने काटन कपड़ों की अत्यधिक मांग है।

—बांदा जनपद के पश्चिम भाग में बहने वाली केन नदी में शजर पत्थर प्राप्त होता है। शजर पत्थर पर उत्कृष्ट कला कृतियां बनाई जाती हैं।

—बिजनौर जनपद के नगीना कस्बा में हस्त शिल्पियों द्वारा पारम्परिक लकड़ी के उत्पाद बनाये जाते हैं तथा उन पर नक्काशी का कार्य किया जाता है।

—बुलंदशहर जनपद के खुर्जा में परम्परागत रूप से चीनी-मिटटी के बर्तन बनाने का कार्य किया जाता है।

—मऊ जनपद में करघे लगाकर साड़ी, लूंगी, सूट आदि का उत्पादन किया जाता है। इसके अतिरिक्त साड़ियों पर स्थानीय हस्तशिल्पियां भी उकेरी जाती हैं।