अयोध्या पर आतंकी खतरा , सुरक्षा सख्त

    दिनांक 30-जुलाई-2020   
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गृह मंत्रालय ने अयोध्या में आतंकी इनपुट मिलने के बाद अयोध्‍या  में हाई अलर्ट कर दिया है. अयोध्या के सभी प्रवेश द्वार पर पुलिस का कड़ा पहरा है. जनपद के बाहर से आने वाले सभी वाहनों को चेकिंग के बाद ही प्रवेश करने दिया जा रहा है.
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श्रीराम मंदिर की आधार शिला रखने आ रहे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अभेद्य सुरक्षा घेरे में रहेंगे. अयोध्या अत्यंत संवेदनशील स्थल है. वर्ष 2005 में अयोध्या में आतंकी हमले की कोशिश की गई थी.

स्थानीय प्रशासन, सुरक्षा एजेंसियों और एसपीजी सुरक्षा ने सामंजस्य बनाते हुए सुरक्षा का प्लान तैयार किया है. हनुमानगढ़ी और सरयू तट को अलग-अलग जोन में बांटा गया है. इस तरह से प्रधानमंत्री की सुरक्षा को लेकर 7 जोन बनाये गए हैं.  पुराने सरयू पुल के ट्रैफिक को बंद करने की भी योजना बनाई गई है. अयोध्या के वो सभी मुख्य मार्ग जो श्रीराम जन्म भूमि की तरफ जाते हैं. उन सभी मार्गों को 5 अगस्त को बंद कर दिया जाएगा.  जालपा मंदिर से नया घाट तक का जोन, सुपर सेफ्टी जोन होगा. प्रधानमंत्री के सुरक्षा घेरे के अंतर्गत आने वाले सभी मार्गों पर अभी से बैरियर लगने शुरू हो गए हैं.

क्षेत्राधिकारी अरविंद चौरसिया के अनुसार,  3 अगस्त से ही सुरक्षा व्यवस्था सख्त कर दी जायेगी. प्रधानमंत्री के प्रोटोकॉल को देखते हुए सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं.  साकेत महाविद्यालय के ग्राउंड में प्रधानमंत्री का हेलीकॉप्टर उतरेगा.  साथ ही उनकी सुरक्षा में लगे तीन एयर फोर्स के हेलीकॉप्टर भी उतरेंगे. उसके बाद सड़क मार्ग से होते हुए प्रधानमंत्री, श्रीराम जन्मभूमि परिसर पहुंचेंगे.


श्रीराम जन्म भूमि  पर हुआ थी आतंकी हमले की कोशिश 

अयोध्या पर आतंकियों की नजर है. इसके इनपुट पहले भी मिलते रहे हैं. 6  दिसम्बर 1992 को बाबरी ढांचा ढह गया था.  मगर यह बात आतंकियों को नागवार गुजरी थी और उन आतंकियों ने इसका बदला लेने का फैसला किया था. आतंकियों ने योजना बनाई थी कि श्रीराम जन्म भूमि पर बम विस्फोट करके मंदिर को क्षति पहुंचाई जायेगी. इस घटना को अंजाम देकर दंगा कराने की साजिश रची गई थी. 5 जुलाई वर्ष 2005 को 6 आतंकी मार्शल जीप से अयोध्या पहुंचे थे. विस्फोट करके जीप को उड़ा दिया. इस विस्फोट में एक फिदायीन वहीं पर मारा गया. वाहन में विस्फोट करने के साथ ही आतंकी मंदिर परिसर की तरफ बढ़ने लगे.  विस्फोट की आवाज सुनते ही सी.आर.पी.एफ. और पी. ए. सी. के जवानों ने बड़ी ही तत्परता से उन पांचों आतंकियों को ढूंढ निकाला. आमने-सामने मुठभेड़ हुई जिसमें पांचों  आतंकी और तीन सामान्य नागिरक मारे गए. उन पांचों आतंकियों के कब्जे से रायफल, चीन की बनी हुई पिस्टल, ग्रेनेड, राकेट लांचर एवं नोकिया मोबाइल बरामद हुआ था. नोकिया फोन को सर्विलांस पर लगाया गया. संदिग्ध लोगों से पूछ-ताछ की गई.  इस मामले में षड्यंत्र रचने वाले पांच आतंकवादियों को गिरफ्तार किया गया. 14 साल बाद वर्ष 2019 में चार को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई.


कोर्ट ने कहा था – आतंकियों को सजा तो उसी समय मिल गई थी मगर षड्यंत्रकारियों को सजा मिलने में 14 साल लग गए

बताते चलें कि अयोध्या जनपद के थाना राम जन्म भूमि में 11 वीं वाहिनी पी.ए.सी के दल नायक, कृष्ण चन्द्र सिंह ने घटना की एफ.आई.आर दर्ज कराई थी. एफ.आई.आर के मुताबिक़ “ सुबह करीब सवा नौ बजे सफ़ेद मार्शल जिसका नंबर UP- 42  T- 0618 था. राम मंदिर के थोड़ा पहले जहां जैन मंदिर स्थित है. वहां पर मार्शल आकर रूकी. इससे पहले कि कोई कुछ समझ पाता जोरदार धमाका हुआ.  जीप के परखचे उड़ गए. बैरीकेडिंग भी तितर – बितर हो चुकी थी. इस हमले में एक फिदायीन मर चुका था.” 


फैजाबाद जनपद न्यायालय में अभियोजन पक्ष ने आरोप पत्र दायर किया. 8 दिसंबर 2006 को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने  इस मुकदमे को इलाहाबाद जनपद न्यायालय में भेजने का आदेश दिया. इसके बाद इन पांचों आतंकियों को प्रयागराज के नैनी सेंट्रल जेल में लाया गया. मुकदमे की पूरी सुनवाई नैनी सेन्ट्रल जेल के अन्दर बनी विशेष अदालत में की गई. इलाहाबाद जनपद न्यायालय के अपर जिला जज एवं अधिवक्तागण ने जेल के अन्दर जा कर मुकदमें की सुनवाई को पूरा किया. फैसला भी जेल के अन्दर बनी विशेष अदालत में सुनाया गया. कोर्ट ने अपने फैसले में आसिफ उर्फ़ इकबाल को मुख्य साजिशकर्ता माना. दूसरे आतंकी ,डॉ इरफ़ान पर यह दोष सिद्ध हुआ कि उसने  हमला करने आये पांचों आंतकियों को अपने यहां शरण दिया था. तीसरे आतंकी,  मोहमद नसीम ने सिम कार्ड और ए.के-47 खरीदा था. चौथे आतंकी शकील ने वाहन मुहैया कराया था जिसमे असलहा ले जाया गया था. ट्रायल कोर्ट ने साक्ष्य के अभाव में मो. अज़ीज़ को बरी कर दिया था. अज़ीज़ पर आरोप था लश्कर – ए – तय्यबा का आतंकी इनके घर पर आता था.

ट्रायल कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष यह साबित करने में यह सफल रहा है कि आरोपियों को संदेह का लाभ नहीं मिलना चाहिए. भगवान राम के मंदिर पर हमला करने वालों को सजा तो उसी समय मिल गई थी. मगर षड्यंत्र रचने वालों को सजा मिलने में 14 साल  का समय लग गया.