आषाढ़ पूर्णिमा : तमाम चुनौतियों का स्थायी समाधान भगवान बुद्ध के आदर्शों में है

    दिनांक 04-जुलाई-2020
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04 जुलाई का दिन बुद्ध का दिन है। पूरे देश में अषाढ़ पूर्णिमा/ बुद्ध पूर्णिमा का उत्सव मनाया जा रहा है, जहां भगवान बुद्ध के उपदेशों की महत्ता पर बात हो रही है। राष्ट्रपति भवन में आषाढ़ पूर्णिमा के अवसर पर अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध परिसंघ (आईबीसी) द्वारा आयोजित समारोह का उद्घाटन स्वयं राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने किया। इस मौके पर उन्होंने कहा, ''विडम्बना कह सकते हैं कि बुद्ध का ज्ञान उस समय की वर्तमान स्थापनाओं के विरुद्ध था। वह ज्ञान जो दया और अहिंसा पर आधारित था। वह आजीवन नैतिक और तार्किक आधार पर अपनी बात लोगों को समझाने का प्रयास करते रहे।'' श्री कोविंद ने अपने वक्तव्य में कहा— ''भारत को धम्म की उत्पत्ति की भूमि होने पर गर्व है। यह भारत से उत्पन्न होकर पड़ोसी क्षेत्रों में फैला।''
उन्होंने आगे कहा, 'आज के दिन को गुरु पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। हिंदू और जैन भी इसे अपने आध्यात्मिक गुरु के प्रति श्रद्धा के प्रतीक के रूप में मनाते हैं। मैं राष्ट्रपति भवन में आषाढ़ पूर्णिमा समारोह की मेजबानी से खुश हूं। आज हम एक ऐसी महामारी के बीच में हैं जिसने पूरी मानवता को खतरे में डाल दिया है। दुनिया का कोई हिस्सा इस समय आपदा से अछूता नहीं है, ऐक ऐसी आपदा जो हर व्यक्ति पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रही है। इससे निपटने के लिए हमें कुछ अनुशासन का पालन करना होगा और भौतिक दूरी बनाए रखनी होगी।''
राष्ट्रपति ने आगे कहा, ''दो असाधारण भारतीयों- महात्मा गांधी और बाबासाहब आंबेडकर ने बुद्ध के शब्दों से प्रेरणा पाई थी और उसी प्रेरणा ने शायद उन्हें महान कार्य के लिए प्रेरित किया। आज महामारी दुनियाभर में मानव जीवन और अर्थव्यवस्था को तबाह कर रही है, ऐसे समय में भी बुद्ध का संदेश एक प्रकाश की तरह हमारे जीवन में काम कर रहा है। बुद्ध ने लोगों को खुशी हासिल करने के लिए लालच, घृणा, हिंसा, ईर्ष्या और कई अन्य दोषों से दूर रहने की सलाह दी है।'
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से ठीक पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी देशवासियों को बुद्ध पूर्णिमा की बधाई दी और भगवान बुद्ध के उपदेशों की महत्ता पर बात की। प्रधानमंत्री ने कहा, 'मैं आज आषाढ़ पूर्णिमा के अवसर पर सभी को शुभकामनाएं देना चाहता हूं। इसे गुरु पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। यह हमारे गुरुओं को याद करने का दिन है, जिन्होंने हमें ज्ञान दिया। इसी भावना के साथ हम भगवान बुद्ध को श्रद्धांजलि देते हैं। भगवान बुद्ध का अष्टमार्ग कई समाजों और राष्ट्रों के कल्याण की दिशा में रास्ता दिखाता है। यह करुणा और दया के महत्व पर प्रकाश डालता है। भगवान बुद्ध की शिक्षाएं विचार और क्रिया दोनों में काम आती हैं।' उन्होंने कहा, 'आज दुनिया असाधारण चुनौतियों से लड़ रही है। इन चुनौतियों के लिए, स्थायी समाधान भगवान बुद्ध के आदर्शों से आ सकते हैं। वे अतीत में प्रासंगिक थे। वे वर्तमान में प्रासंगिक हैं और वे भविष्य में प्रासंगिक बने रहेंगे।''
आज के समारोह में पर्यटन मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल, मंत्री किरण रिजिजू, भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद के अध्यक्ष विनय सहस्त्रबुद्धे, मंगोलिया के राजदूत और संस्कृति सचिव उपस्थित थे। आज का पूरा समरोह आईबीसी विश्व के यूट्यूब चैनल पर उपलब्ध है।