हिन्दू लड़कियों की आबरू पर खतरा बढ़ा

    दिनांक 09-जुलाई-2020   
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कोरोना वैश्विक महामारी के दौरान पाकिस्तान में हिन्दुओं का उत्पीड़न बढ़ा है। मुल्क में हिन्दू लड़कियां सुरक्षित नहीं हैं। प्रधानमंत्री बनने के बाद इमरान खान ने अल्पसंख्यक हिन्दू परिवारों को सुरक्षा, घर मुहैया कराने के साथ 400 मंदिरों के जीर्णोद्धार  की घोषणा भी की थी, जो आज तक धरातल पर नहीं उतरी हैं। अपहरण, कन्वर्जन और जबरन निकाह की घटनाओं पर दुनियाभर में इमरान खान की फजीहत हो रही है

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हिन्दू बच्चे का कन्वर्जन कराने के बाद उसके साथ मिट्ठू मियां।  मिट्ठू  मियां पाकिस्तानी सेना प्रमुख कमर जावेद बाजवा और इमरान खान का करीबी है।


‘अल्पसंख्यकों को लेकर थोड़ी-बहुत समस्या हर देश में है। प्रधानमंत्री इमरान खान के नए पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की समस्या दूर करने के लिए विशेष कार्य योजना बनी है। इसे पूरी तरह अमल में आने में समय लग रहा है, पर तमाम समस्याएं स्थायी तौर पर दूर कर दी जाएंगी। इमरान खान साहब की ओर से मैं आपको आश्वस्त करता हूं।’ यह कहना है पाकिस्तान की सत्तारूढ़ पार्टी तहरीक-ए-इंसाफ के सांसद डॉ. रमेश कुमार वाकवाणी का।

अल्पसंख्यक विशेषकर हिन्दू नाबालिग लड़कियों के अपहरण, कन्वर्जन तथा विरोध करने पर उनके परिजनों को प्रताड़ित करने की बढ़ती घटनाओं को लेकर अंतरराष्ट्रीय मंच पर इमरान खान की हो रही फजीहत के चलते वाकवाणी बचाव में आगे आए हैं। इस मुद्दे पर हाल में जिनेवा स्थित संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायुक्त कार्यालय में आयोजित एक सम्मेलन में वर्ल्ड सिंधी कांग्रेस के महासचिव लाखू लुहानी ने इमरान सरकार को खूब खरी-खरी सुनाई थी। इसी तरह, हिन्दू अमेरिकन फाउंडेशन के एक कार्यक्रम में भी यह मसला जोर-शोर से उठाया गया था। तीन महीने बाद इमरान खान सरकार के दो वर्ष पूरे होने वाले हैं। सितंबर 2018 में सत्ता संभालने के बाद से अब तक न जाने कितनी बार उन्होंने अल्पसंख्यकों के कल्याण की योजनाओं का बखान किया है। हिन्दू नाबालिग लड़के-लड़कियों के अपहरण, कन्वर्जन रोकने और बेघर हिन्दुओं को घर देने की भी लंबी-चौड़ी घोषणाएं की थीं। यहां तक कि उनके ‘नए पाकिस्तान’ में अल्पसंख्यकों को विशेष दर्जा देने और 400 हिन्दू मंदिरों के जीर्णोद्धार की भी घोषणा की गई थी।

मगर ये तमाम घोषणाएं अब तक जमीन पर नहीं उतरी हैं। इसके उलट इमरान खान इन्ही घोषणाओं की बदौलत प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी को नसीहत देते रहते हैं कि अल्पसंख्यकों के उत्थान, विकास और उनकी सुरक्षा को लेकर कैसे काम किया जाता है, यह उनसे सीखें। अलग बात है कि उनकी घोषणाओं के उलट उनके राज में हिन्दुओं पर जुल्म बढ़े ही हैं। बेघर हिन्दुओं को घर और सुरक्षा मिलना तो दूर, उनके लिए अपने ही देश की जमीन तंग कर दी गई है।

पाकिस्तान में हिन्दुओं पर अत्याचार इस कदर बढ़े हैं कि अब शक होने लगा है कि उन्हें मुल्क से भगाने के लिए अदृश्य साजिश रची जा रही है, जिसमें इमरान खान सरकार बराबर की भागीदार है। यदि सरकार का परोक्ष समर्थन नहीं होता तो पाकिस्तान से लगभग रोजाना हिन्दुओं के उत्पीड़न की खबरें नहीं आतीं। जून में तो सिंध के सांघर में भील जाति के गांव में ही आग लगा दी गई, जिसमें कई लोग झुलस गए तथा मकान व सामान जलकर राख हो गए। थारपारकर में भी भील समुदाय की महिलाओं पर हमला किया गया। जून में ही कन्वर्जन कराने के उद्देश्य से मजहबी गुंडों ने हिन्दू लड़कियों का अपहरण किया।

29 जून को मितियारी से 14 वषीर्या हिन्दू लड़की नसीब बलात उठा ली गई। इसी तरह, सुक्कर से एमबीए छात्र मदन लाल सालेंकी का अपहरण हुआ, जिसके बारे में आज तक कुछ पता नहीं चला है। परिजनों को शक है कि कन्वर्जन की नीयत से उसे अगवा किया गया है। मजहबी गुंडों द्वारा अपनी दो नाबालिग बच्चियों के अपहरण पर सिंध प्रांत के खैरपुर के प्रेम निराश भाव से कहते हैं कि जब पाकिस्तान में उन्हें रहने नहीं दिया जा रहा तो सरकार देश से क्यों नहीं निकाल देती। घुट-घुटकर मरने से तो यह अच्छा ही है।


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अपहरण या कन्वर्जन का विरोध करने पर हिन्दुओं के घर जला दिए जाते हैं।


कन्वर्जन के ताजा मामले
कविता कुमारी, कोमल, लक्ष्मी, सोनिया, सोनिया भील, प्रमिला माहेश्वरी, माला मेघवार, गैनी कोहली, लछमी, गवारी, चंपा, रीना, रवीना, सोनिया कुमारी, के. लछमी कुमार, कलीम कुमार, मंता भील, निशा, करिश्मा, आरती कुमारी, समीना, जीलन, सलमा, जरीना, अनुषा मेघवार, अनिता कोही, प्रिया कुमारी, नैना, पायल कोहिस्तानी, रेनू कुमारी, जगजीत कौर, सोनिया, सरस्वती, मोनिका, कश्माला, पठानी, सिमरन, राधा, जमना, विद्या, पूजा, सपना, ऐशिनी कुमारी, नेहा केशवानी, सकीना, हुमा यूनुस, सबेरा, शांति, सरमी मेघवाल और महक। इनमें अधिकांश सिंध प्रांत के लड़के-लड़कियां हैं, जबकि कुछ पंजाब से भी हैं।

पाकिस्तान में कन्वर्जन पर पाबंदी के लिए 2017 में हिन्दू विवाह कानून बना था, जिसके तहत 18 वर्ष से कम उम्र की बच्ची से विवाह नहीं किया जा सकता। इसके बावजूद कट्टरपंथी युवा नाबालिग हिन्दू बच्चियों को बलात घर से उठा ले जाते हैं और कन्वर्जन के बाद निकाह के नाम पर किसी अधेड़ से उनका सौदा कर दिया जाता है। ऐसे मामलों में बच्चियों के माता-पिता को इंसाफ तक नहीं मिलता। अपनी बच्ची को अपहर्ताओं के चंगुल से छुड़ाने के लिए कोई कोर्ट-कचहरी में फरियाद करता है तो उसे हर प्रकार से प्रताड़ित किया जाता है। यहां तक कि परिजनों की पिटाई और घरों में तोड़फोड़ तक की जाती है। सिख लड़की के अपहरण और कन्वर्जन मामले में तो कट्टरपंथियों ने एक गुरुद्वारे पर भी हमला किया था।

अपहरणकर्ता अगवा नाबालिग बच्चियों के बालिग होने का नकली प्रमाणपत्र तक बनवा लेते हैं और आरोपों से बरी हो जाते हैं। चूंकि ऐसे मामलों में अदालत, मुख्यधारा मीडिया और बहुसंख्यक पाकिस्तानी मुसलमानों का रवैया बेहद निष्ठुर है, इसलिए पीड़ितों को इंसाफ नहीं मिल पाता। हाल ही में सिंध के जकोबाबाद के बशीर पेट्रोल पंप के निकट से एक सिख नाबालिग बच्ची को अगवा कर उसका कन्वर्जन कराने के बाद उसकी शादी एक युवक से करा दी गई। बच्ची के पिता ने जब पुलिस के समक्ष उसके नाबालिग होने का प्रमाणपत्र पेश किया तो अपहतार्ओं ने नकली प्रमाणपत्र पेश कर दिया। पुलिस ने आरोपियों के दावे को सही माना और शिकायत वापस ले ली। इस पर आपत्ति जताते हुए दिल्ली सिख गुरुद्वारा सिख प्रबंध समिति के अध्यक्ष ने प्रधानमंत्री इमरान खान को चिट्ठी लिखकर पीड़ित पिता को इंसाफ दिलाने की अपील की है।

कोरोना काल में अत्याचार बढ़ा
बीते चार माह में दर्जनों हिन्दू, सिख, ईसाई लड़कियों का अपहरण और कन्वर्जन किया गया। विरोध करने पर उनके परिजनों को पीटा गया और घरों-संपत्तियों में आग लगा दी गई। कट्टरपंथियों ने सिंध के एक पूरे गांव का ही कन्वर्जन करा कर वहां के मंदिर और उसमें स्थापित देवी-देवताओं की प्रतिमाएं नष्ट कर दीं। सेना प्रमुख कमर जावेद बाजवा और प्रधानमंत्री इमरान खान का करीबी मिट्ठू मियां तो हिन्दू लड़के-लड़कियों के कन्वर्जन के लिए गैंग चलाता है। उसने अपने घर में हरम बना रखा है, जहां वह अगवा लड़कियों का यौन शोषण करता है। फिर कन्वर्जन के बाद उनका निकाह किसी मुसलमान के साथ कर देता है।

पाकिस्तान में कई बार हिन्दू उसके खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर चुके हैं, पर आज तक वह खुला घूम रहा है। पाकिस्तान के मानवाधिकार कार्यकर्ता मुकेश मेघवार के मुताबिक, विभाजन से पहले सिंध में हिन्दू 26 प्रतिशत थे, अब 6.5 प्रतिशत बचे हैं। सिंध के शहरी क्षेत्र में इनकी संख्या 3.08 और ग्रामीण क्षेत्र में 9.77 प्रतिशत है। हाल में 50 से अधिक हिन्दू लड़कियों का अपहरण के बाद कन्वर्जन किया गया। इसके विरोध में जनमत जुटाने के लिए हिन्दुओं ने 6 जून को सोशल मीडिया पर हैशटैग अभियान चलाया था, जिसे पाकिस्तान और दूसरे देशों से भरपूर समर्थन मिला था। उनका कहना था कि यह आंदोलन का पहला चरण है। अगर सरकार नहीं सुनती है तो बडे़ आंदोलन की रूपरेखा तैयार की जाएगी। 

लेकिन इससे कन्वर्जन की घटनाओं में कमी नहीं आई है। अभियान के दौरान कन्वर्जन को प्रतिबंधित करने के लिए कड़ा कानून बनाने, अल्पसंख्यकों को धार्मिक, सांस्कृतिक सुरक्षा देने तथा सिंध प्रांत में सांप्रदायिक सौहार्द बरकरार रखने आदि की मांग की गई। लेकिन इस घेराबंदी के बावजूद सरकार ने अभी तक गंभीरता नहीं दिखाई है।

सरकार के शह पर हिन्दू लड़कियों के अपहरण और कन्वर्जन की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं। फैसलाबाद के सुनील मलिक और कराची के अमित कुमार ने इमरान खान और मुसलमानों को लताड़ते हुए कहते हैं, ‘मजहब से अधिक महत्वपूर्ण इंसानियत है। यह संदेश सिंध की मिट्टी में रचा-बसा है। इसके बावजूद इस संदेश को तार-तार करने वालों को रोकने के लिए आम लोग सामने नहीं आ रहे हैं। डॉ. कविता खत्री कहती हैं कि दूसरे धर्मों का सम्मान करने से अपना भी सम्मान बढ़ता है, इसे तमाम पाकिस्तानियों को समझना चाहिए।    (लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं)