पाकिस्तान— ‘मंदिर बना तो शव कुत्तों के आगे डाल देंगे’

    दिनांक 09-जुलाई-2020   
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पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में प्रस्तावित कृष्ण मंदिर सह समुदायिक भवन को लेकर मीडिया और मजहबी कट्टरपंथियों का यह गठजोड़ एक बार फिर हिंदुओं के विरूद्ध खड़ा नजर आ रहा है। मंदिर निर्माण रोकने के लिए इस समय इनका जबर्दस्त दबाव है।

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पाकिस्तान के कट्टरपंथियों और वहां की मीडिया का हिंदुओं के प्रति रवैया एक जैसा है। दोनों इस कौम को अहमियत नहीं देते। उन्हें लगता है कि हिंदुओं को महत्व देने से उनका ‘दीन-इमान’ खतरे में पड़ जाएगा, इसलिए जितना संभव हो इन्हें दबाया जाए। पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में प्रस्तावित कृष्ण मंदिर सह समुदायिक भवन को लेकर मीडिया और मजहबी कट्टरपंथियों का यह गठजोड़ एक बार फिर हिंदुओं के विरूद्ध खड़ा नजर आ रहा है। मंदिर निर्माण रोकने के लिए इस समय इनका जबर्दस्त दबाव है। कल तक मंदिर निर्माण को लेकर सक्रिय इस्लामाबाद की सीडीए यानी कैप्टिल डेवलपमेंट अथॉरिटी भी अब पीछे हटती दिख रही है। हाईकोर्ट में झूठा हलफनामा दायर कर कहा है कि कृष्ण मंदिर के निर्माण के लिए अब तक इस्लामाबाद हिंदू पंचायत ने बिल्डिंग प्लान और नक्शा जमा नहीं कराए हैं। सीडीए प्रवक्ता मजहर हुसैन का कहना है कि बिल्डिंग प्लान अथॉरिटी में जमा कराए बगैर इस्लामाबाद में किसी तरह का निमार्ण संभव नहीं।

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इसके इतर हिंदू पंचायत अध्यक्ष प्रितम दास का दावा है कि 19 जून को बिल्डिंग प्लान संबंधित विभाग और मजहबी मामलों के केंद्रीय मंत्री पीर नूरूल हक कादरी के कार्यालय में जमा करा दिया गया है। वहां से हरी झंडी मिलने के बाद 23 जून को सत्तारूढ़ दल पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ के नेशनल एसेंबली के सदस्य लालचंद माल्ही और पीर नूरूल हक की मौजूदगी में मंदिर की आधारशिला रखी गई। इसके दो दिन बाद माल्ही प्रधानमंत्री इमरान खान से मिलकर इसका पूरा ब्योरा भी दे आए हैं। बावजूद इसके मीडिया और कट्टरपंथियों का रवैया नहीं बदला है। वे पाकिस्तान में मंदिर निर्माण को लेकर ऐसा माहौल बना रहे हैं, मानो यह कोई अवैध और मुसलमान-इस्लाम विरोधी कार्य है। एक मस्जिद के इमाम ने ऐलान किया है कि मंदिर बना तो इसमें शामिल लोगों की हत्या कर लाश कुत्तों के आगे डाल दी जाएगी। पाकिस्तानियों को भड़काने में यूट्यूब पर चलने वाले न्यूज चैनल भी कम नहीं हैं। ‘उमर टीवी’ चला रहा है कि इस्लामाबाद में मंदिर की जगह आलीशान बाबरी मस्जिद बनानी चाहिए। इसका नक्शा भी भारत में गिराई गई बाबरी मस्जिद जैसा होना चाहिए। ऐसी खबरों से पूरा यूट्यूब भरा पड़ा है।


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दाग धोने की कोशिश

पाकिस्तान में हिंदुओं पर बढ़ते अत्याचारों के आरोप को धोने के लिए कुछ दिनों पहले प्रधानमंत्री इमरान खान ने इस्लामाबाद में कृष्ण मंदिर के निर्माण का ऐलान किया था। इसके लिए पहले चरण में दस करोड़ रूपये देने की भी घोषणा की गई थी। दरअसल, 26 दिसंबर 2017 को सीडीए के चेयरमैन शेख अंसार अजीज की अध्यक्ष में इस्लामाबाद में मंदिर निर्माण के लिए जमीन आवंटित करने का निर्णय लिया था। बाद में कुछ तकनीकी खामियों के चलते इस पर रोक लगा दी थी। अब इस्लामाबाद के सेक्टर एच-9 में इसके निर्माण की न केवल इजाजत दी गई बल्कि हिंदू पंचायत को जमीन भी हवाले कर दी गई है। पंचायत की इस जगह भव्य कृष्ण मंदिर के अलावा श्मशानघाट, सामुदायिक भवन, लंगरखाना, धर्मशाला आदि के निर्माण की योजना है।
इमरान खान सरकार के इस फैसले की प्रशंसा करते हुए सांसद और मानवाधिकार मामलों के संसदीय सचिव लालचंद माल्ही कहते हैं कि इस्लामाबाद में हिंदुओं के लिए ऐसे भवन का होना बहुत जरूरी है। राजधानी में बड़ी संख्या में रोजाना किसी न किसी काम से बलूचिस्तान, सिंध प्रांत सहित देश के अन्य हिस्सों से हिंदू आते हैं। इसके अलावा शहर में करीब तीन हजार हिंदू की आबादी भी है। मगर उनके लिए यहां ऐसा कोई स्थल नहीं है जहां वह ठहर सकें या पूजा-पाठ कर सकें। इस्लामाबाद में एक भव्य प्राचीन मंदिर है, जिसका अधिग्रहण पुरात्तव विभाग बहुत पहले ही कर चुका है। सैदनपुर गांव में एक छोटी प्रतिकात्मक मूर्ति स्थापित है, जहां सभी के लिए पूजा-पाठ संभव नहीं। और तो और इस्लामाबाद में किसी हिंदू का देहावसान हो जाए तो  अंतिम संस्कार के लिए यहां कोई जगह नहीं होने के कारण शव को शहर से दूर सिंध या बलूचिस्तान ले जाना पड़ता है।

पाकिस्तान में हिंदुओं की कुल आबादी 80 लाख है। ये अधिकतर दक्षिण सिंध के मीरपुरखास, थारपारकर, घोटकी आदि में रहते हैं। इस क्षेत्र में हिंदुओं के अनेक मंदिर हैं, जिनमें से अधिकांश को कट्टरपंथियों ने ध्वस्त कर दिया है। पाकिस्तान में 1947 के बाद पहली दफा किसी मंदिर का निर्माण होने जा रहा है। इसके बावजूद सभी इस प्रयास में जुटे हैं कि कैसे मंदिर निर्माण कार्य रोका जाए। पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री तथा वर्तमान में पंजाब विधानसभा के स्पीकर परवेज इलाजी भी उन्हीं लोगों में शामिल हैं। नए मंदिर के निर्माण का वह खुलकर विरोध कर रहे हैं।

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 मजहबी कट्टरपंथी जमायत ने तो इसे सउदी के मदीना शहर से जोड़ दिया है। वे प्रचार कर रहे हैं कि मदीना में मस्जिद तामीर से पहले वहां मौजूद तमाम बुत ढहा दिए गए थे। इसके उलट इमरान खान सरकार इस्लाम के नामर बसे इस्लामाबाद में मूर्ति स्थापित करना चाहती है। मंदिर निर्माण के खिलाफ पाकिस्तान में देवबंदी शिक्षा देने वाली संस्था जामिया अर्शिया मदरसा ने मोर्चा खोल दिया है। उसकी ओर से एक फतवा भी हजारी किया गया है। संस्थान से दो दशकों से जुडे़ मुफ्तिी मुहम्मद जकरिया ने इस्लाम के विभिन्न पहलुओं का हवाला देते हुए कहा है कि उनका मजहब दूसरे धर्मस्थलों की देखभाल व संचालन की इजाजत तो देता है, पर इसके लिए नए निर्माण की मनाही है। इस फतवे की हिमायत में पाकिस्तान के कई और मुफ्तियों के बयान आए हैं। इस मुददे पर भारत का भगौड़ा इस्लामी विद्वान जाकिर नाइक का कहना है कि इस्लाम से बेहतर कोई और मजहब नहीं, इसलिए हम कैसे दूसरे मत—पंथों को बढ़ावा दे सकते हैं। 

भड़काने की कोशिश
बहरहाल, मजहबी कट्टरपंथियों के लगतार बयानबाजी का असर है कि गत दिनों कुछ लोगों ने मंदिर की निर्माणाधीन चारदीवारी ढहा दी। यही नहीं दीवार के मलवे पर चढ़कर अजान भी दी गई, जिसका वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। कट्टरपंथी मंदिर निर्माण के विरोध में मरने-मारने पर उतारू हैं। सोशल मीडिया पर चलने वाले समाचार माध्यमों से चेतावनी प्रसारित की जा रही है कि किसी भी कीमत पर इस्लामाबाद में मंदिर नहीं बनने दिया जाएगा। इसकी राह में रोड़ा अटकाने के लिए तनवीर अख्तर नामक एक वकील ने इस्लमाबाद हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की है। इसमें सवाल उठाए गए हैं कि सत्तर-अस्सी के दशक में इस्लामाबाद बसाने के लिए बनाए गए मास्टर प्लान में मंदिर निर्माण की कोई जगह निर्धारित नहीं थी। ऐसे में किस कानून के तहत इसकी मंजूरी दी गई। वह भी ऐसे वक्त में जब देश कोरोना संक्रमण से बुरी तरह जूझ रहा है। देश की अर्थव्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई है। ऐसे में मंदिर निर्माण पर करोड़ रूपये खर्च करना उचित नहीं।

 हालांकि उच्च न्यायालय के न्यायाधीश आमिर फारूक को सीडए की ओर से बताया गया कि इस्लामाबाद की विकास एजेंसी सीडीए के चेयरमैन तथा इसके बोर्ड के सदस्य इसकी अनुमति दे सकते हैं। सीडीए के इस प्रावधान के तहत मंदिर के अलावा पारसियों एवं ईसाइयों को भी पांथिक स्थल बनाने के लिए 20 हजार वर्ग फीट जमीन आवंटित की गई है। कृष्ण मंदिर के निर्माण पर 50 करोड़ रूपये की लागत आएगी। हिंदू पंचायत के प्रितम दास कहते हैं कि अभी उन्हें सरकारी फंड नहीं मिला है। चारदीवारी का निर्माण पंचायत के पैसे से कराया जा रहा है, जिसे कुछ उग्र लोगों ने ढहा दिया। खबर के मुताबिक, मंदिर निर्माण के विरोध में दायर की गई याचिकाएं 7 जुलाई को सुनवाई करते हुए अदालत ने खारिज कर दीं। अदालत का कहना था कि विरोधी पक्ष की ओर से जो दलीलें दी गई हैं, वह सुनवाई लायक नहीं हैं। इसके बावजूद कट्टरपंथियों के तेवर ढीले नहीं पड़े हैं। सोशल मीडिया पर ‘मोदी के राज में बनेगा इस्लामाबाद में मंदिर’ का नारा देकर लोगों को भड़काया जा रहा है। इसके अलावा सीडीए द्वारा मंदिर का मास्टर प्लान जमा नहीं कराने की बात कहकर निर्माण की राह में रोड़ा अटकाने की कोशिश की गई है। इस मामले में पाकिस्तानी मीडिया खामोशी अख्तियार किए हुए है। हिंदुस्तान के मुसलमानों के मसले पर गाहे-बगाहे शोर मचाने वाले पत्रकार इस सवाल पर चुप्पी साधे हुए हैं कि उनके देश में एक मंदिर बनने से इस्लाम और मुसलमान कैसे खतरे में पड़ जाएंगे ? (लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं)