वेब सीरीज पर वेबिनार : हिन्दू मान-बिन्दुओं को आहत करने का एजेंडा

    दिनांक 09-जुलाई-2020   
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वेब सीरीज लॉकडाउन के समय मनोरंजन का साधन बनकर आगे आई है, यह सही है। लेकिन सरकार को इस पर कानून बनाकर नियमन का दिशानिर्देश जारी करना चाहिए।

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दिलीप शुक्ला, अनंत विजय,  विष्णु शर्मा, अतुल गंगवार


गत 28 जून को भारतीय चित्र साधना एवं विश्व संवाद केंद्र, भारत द्वारा 'सिनेमा और वेब सीरीज में बढ़ती अभारतीयता-एक समीक्षा' विषय पर एक वेबिनार आयोजित किया गया। इसमें दिलीप शुक्ला (कथा एवं संवाद लेखक), अनंत विजय (एसोसिएट एडिटर, दैनिक जागरण), विष्णु शर्मा (फिल्म समीक्षक और पत्रकार) ने अपने विचार रखे। चर्चा का संयोजन किया लेखक और निर्देशक अतुल गंगवार ने।

 अपने संबोधन में दिलीप शुक्ला (दबंग सीरीज, दामिनी, घायल के संवाद लेखक) ने कहा, ‘मैंने दामिनी, घायल जैसी फिल्में में लिखी हैं’, जिनका उद्देश्य समाज में जो हो रहा है उसे दिखाना। इनमें हमने संवादों के माध्यम से बात की। अपनी फिल्मों में कोई अनैतिक बात नहीं लिखी। हमारे सामाजिक और नैतिक मूल्यों पर चोट करे, ऐसा किसी विषय पर नहीं लिखा। वेब सीरीज पर लिखने का प्रस्ताव कई बार आया, लेकिन मैंने कुछ लिखा नहीं है।

वेब सीरीज में निर्माता निश्चित होता है, जो अपने साथ ऐसे लोगों को जोड़ लेता है जिन्हें कुछ भी करने से कोई फर्क नहीं पड़ता है। लेकिन मैं ऐसी किसी बात का बिल्कुल समर्थन नहीं करता, जो समाज हित में नहीं होती। हमारी जिम्मेदारी बनती है कि इसे रोकें। उन्होंने कहा कि आज कई वेब सीरीज व फिल्मों के माध्यम से गलत दिशा दिखाई जा रही है। इसे रोकने के लिए लोगों को आगे आना चाहिए। वेब सीरीज में अश्लीलता को किया जाना चाहिए। पैसे कमाने की चाह में कुछ लोग वेब सीरीज में हल्की चीजें तक लिखने के लिए मजबूर हो जाते हैं।

फिल्म समीक्षक और लेखक विष्णु शर्मा ने कहा, ‘वेब सीरीज में केवल अश्लीलता ही नहीं परोसी जाती है, एक एजेंडा चलाया जाता है। भारतीय मूल्यों को लक्षित करके फिल्में बनायी जाती हैं। जैसे, फैमलीमैन (वेब सीरीज) में एक संवाद है कि ‘तमिल तो संस्कृत से भी पुरानी है’। अब पूरी फिल्म में दर्शक के दिमाग में बस ये चीज ठहर जाती है कि तमिल संस्कृत से भी पुरानी है। हिन्दू देवी-देवताओं के नामों पर पात्रों के नाम रखकर भारतीयता पर प्रहार किया जाता है। जब हम इसका विरोध करते हैं तो हमसे कृष्णलीला का उदाहरण देकर सवाल किया जाता है कि ‘वे लीला रचाएं तो सही और हम करें तो गलत है। क्यों?’

वेबीनार में अपनी बात रखते हुए दिलीप शुक्ला ने कहा कि किसी एक चीज को लक्षित करके दिखाने, उसकी छवि बिगाड़ने का काम एक लॉबी कर रही है। जानबूझकर ऐसी बात की जाती है और अश्लील दृश्य दिखाए जाते हैं ताकि कुछ लोगों को चिन्हित किया जाए। हमें एक व्यवस्था बनानी होगी जिससे वे आगे से इस तरह की गलती करने की हिम्मत ना करें। अगर छोटी-छोटी सीरीज और निर्माता किसी विशेष पंथ या संप्रदाय के विषय में गलत बात करते हैं तो उन पर कार्रवाई की जाए, क्योंकि ये लोग छोटे बैनर के होते हैं जिन्हें आसानी से रोका जा सकता है।

ओटीटी  प्लेटफार्म पर दिखई जा रहीं वेब सीरीज पर किसी भी प्रकार के नियमन का कानून न होने के कारण खुलेआम घृणित, अश्लील दृश्य दिखाए जाते हैं, भारतीय परंपराओं को निशाना बनाया जाता है। पाताललोक जैसी वेब सीरीज में पात्रों के नाम हिन्दू देवी-देवताओं पर रखकर हिन्दुओं की भावना को ठेस पहुंचाई जाती है।

सारे दर्शक गलत चीजें नहीं देखना चाहते। ज्यादातर दर्शक अच्छी चीजें, पारिवारिक चीजें देखना चाहते हैं। युवा वर्ग अभी नहीं समझता कि क्या सही है, क्या गलत। ऐसे वर्ग को हमें समझाने की जरूरत है। साजिश के तहत एक लॉबी काम कर रही है जो सनातनी हिन्दू संस्कृति को चोट पहुंचा रही है। हिन्दू झंडा आगे करके घिनौनी चीजें दिखा रही है। यह हिन्दू चरित्र और संस्कृति को किसी भी स्तर तक गिराने को तैयार है। सरकार को ऐसी चीजों पर उचित कार्यवाही की व्यस्था करनी  चाहिए। शासन ये व्यवस्था करे कि कोई भी सामग्री, सीरीज या सिनेमा कैमरे के सामने बाद में दिखे, पहले कोई कमेटी इसे देखे। इसके लिए कानूनी नियंत्रण जरूरी है।

फिल्म समीक्षा के लिए राष्टÑीय पुरस्कार विजेता एवं दैनिक जागरण के एसोसिएट एडिटर अनंत विजय ने कहा, ‘कानून अभी भी मौजूद हैं, जिसके बावजूद ये सब काम चल रहा है। जैसे ‘एंटी नेशनल कन्टेंट’ को नहीं दिखा सकते, आईपीसी की धारा 1860 की उपधारा 124 के अंतर्गत वह सब नियंत्रित होता है। ओटीटी पर दूसरा कानून ‘अनलॉफुल एक्टिविटी सेक्शन-67’ लागू होता है। इसमें धारा 39 आपत्तिजनक शब्द बोलने या लिखने से रोकती है। ओटीटी पर पोक्सो एक्ट के तहत कार्रवाई हो सकती है। जैसे एक फिल्म में एक बच्ची से आपत्तिजनक कार्य करने के लिए दबाव बनाया गया, उस पर कार्रवाई की जा सकती है। हमें स्वनियमन की तरह कार्य करने की जरूरत है।

वेब सीरीज लॉकडाउन के समय मनोरंजन का साधन बनकर आगे आई है, यह सही है। लेकिन सरकार को इस पर कानून बनाकर स्वनियमन का दिशानिर्देश देना चाहिए। यूआरएल के आधार पर इसे रोकना चाहिए। इस पर एक नियंत्रण करने वाली व्यवस्था या कमेटी होनी चाहिए या फिर स्वनियमन कमेटी को यह आधिकार हो कि इसका विश्लेषण कर सके, उन्हें दंडित कर सके और दंडित करने के बाद भी अगर नहीं मानते तो कानूनी विकल्प होना चाहिए। एक शासनादेश से ओटीटी को सेंसर बोर्ड के अधीन कर दें तो फिर देखें, कैसे नियंत्रण होता है।

वेबीनार में वक्ताओं ने कहा कि ‘जब भी कोई नया स्रोत आए तो हमें पहले तैयार होना चाहिए। विचारक, लेखक, पत्रकार मिलकर सेंसर यूनिट में जाएं, इसकी सुरक्षा व नीति को लेकर खुद आगे आएं। गलत सामग्री लिखने वाले लेखकों पर अच्छे लेखक को निगरानी करनी चाहिए। फिल्म निर्माण की कोई एक संस्था होनी चाहिए, जिसके माध्यम से अच्छे कलाकार व निर्माता को संबल दिया जा सके।

यह सत्य है कि वेब सीरीज पर किसी भी प्रकार के नियमन का कानून न होने के कारण खुलेआम घृणित, अश्लील दृश्य दिखाए जाते हैं, भारतीय परंपराओं को निशाना बनाया जाता है। पाताललोक जैसी वेब सीरीज में पात्रों के नाम हिन्दू देवी-देवताओं पर रखकर हिन्दुओं की भावना को ठेस पहुंचाई जाती है। हिन्दू मान-बिन्दुओं को अपराधी दिखाने वाले दृश्य परोसे जाते हैं। इतना ही नहीं, भारतीय जनमानस में आदर का स्थान प्राप्त हमारी सेना व उनके परिवारों को भी अपमानजनक रूप से चित्रित किया जाता है।

इनके निर्माता अपना नैरेटिव और एजेंडा तय करके वेब सीरीज बनाते हैं। ये लॉबी हिन्दू चरित्र को लक्षित करके उसे नीचा गिराने के लिए नकली मानदंड बनाते हैं। लोगों के मन में उसके प्रति नफरत पैदा करते हैं। अब यह सब बंद होना चाहिए। हमारी कला और संस्कृति को बदनाम करने की इनकी साजिÞशें कामयाब नहीं होनी चाहिए।