‘‘श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन से प्रकट हुआ हिन्दू समाज का शौर्य’’

    दिनांक 12-अगस्त-2020
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अशोक सिंहल

30 सितंबर, 2010 को इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने श्रीराम जन्मभूमि पर फैसला सुनाया था। इसके कुछ समय बाद पाञ्चजन्य ने अयोध्या आंदोलन के शिल्पकार रहे श्री अशोक सिंहल से बातचीत की थी, जो 7 नवंबर, 2010 के अंक में प्रकाशित हुई थी। उस बातचीत के संपादित अंशों को पुन: यहां प्रकाशित किया जा रहा है 
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भारत के लिए श्रीराम और श्रीराम जन्मभूमि का क्या महत्व है?
भगवान राम देश के कण-कण में विद्यमान हैं। गुरुग्रंथ साहिब में राम के बारे में स्पष्ट लिखा हुआ है, ‘‘एक राम दशरथ का बेटा, एक राम घट-घट में लेटा, एक राम का सगल पसारा, एक राम इन सबसे न्यारा।’’ वाह! क्या वर्णन है भगवान राम का गुरुग्रंथ साहिब में। भगवान राम सारे ब्रह्मांड में विद्यमान हैं। उन्हीं की छत्रछाया में सारा ब्रह्मांड चल रहा है। श्रीराम तो हर एक ह्दय में विराजमान हैं। यह चित्र है राम का हमारे देश में।

आतताइयों द्वारा जिस दिन भगवान राम की जन्मभूमि का मंदिर तोड़ा गया, मानो हिन्दू समाज का पतन भी उसी दिन से शुरू हो गया। यदि तुम अपने इष्ट की रक्षा नहीं कर सकते हो तो तुम इस लायक नहीं हो कि इस दुनिया में रहो। इसलिए देश का पतन हो गया। भगवान राम तो उनके सहायक हैं, जो राम के सहायक हों, यानी राम के अनुयायी।  आखिर किन कारणों से मंदिर टूटा, उन करणों पर विचार करना चाहिए। हालांकि इसके लिए लोग संघर्ष करते रहे हैं। पहले संघर्ष में ही लाखों लोग मारे गए, राम जन्मभूमि के लिए बहुत कुर्बानी हुई है। यह कल्पना लोगों को नहीं है। आज राहुल गांधी बोलते हैं, ‘‘विकास के काम आवश्यक हैं, राम से क्या मतलब।’’ ऐसे व्यक्ति हमारे देश में नेता बनने की प्रक्रिया में हैं।

भारत में भगवान राम का स्थान तब से है, जब से हमारी संस्कृति और संस्कार हैं। भगवान राम ‘मनु’ के परिवार के हैं और उन्होंने जो आदर्श स्थापित किए, आज उन आदर्शों को ही देश जी रहा है। वरना राम जन्मभूमि पर फैसले 60 वर्ष लग जाएं और हम बाट जोहते रहें, इससे बढ़कर संहष्णुता क्या हो सकती है? मैं समझता हंू कि यह मुकदमा थोड़े दिन में ही पूरा हो सकता था। इस मुकदमे को इतना समय लगने का कारण ही कोई नहीं था। फिर भी हिन्दू समाज ने धैर्य रखा। सुन्नी वक्फ बोर्ड के वकील जफरयाब जिलानी ने कहा था, ‘‘मैं इस मुकदमे को 25 साल तक घसीटूंगा। इलाहाबाद उच्च न्यायालय में 20 साल तक तो उन्होंने इसे घसीट लिया। अब कहते हैं कि हम सर्वोच्च न्यायालय में इसको घसीट लेंगे।’’ आखिर हिन्दू समाज के बर्दाश्त करने की भी एक क्षमता है। भगवान राम हमारे देश के घट-घट में समाए हैं। उन्होंने ही हमको इतना सहनशील बनाया है, लेकिन सहनशीलता का मतलब यह नहीं है कि हम कायर हैं। अन्याय को सहन नहीं करना यह बात भगवान राम ने अपने जीवन से हमको बताई। मुझसे लोग कहते थे कि आपने श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन क्यों शुरू कर दिया, इसमें तो खून-खच्चर होगा, अपना आंदोलन वापस ले लो। मैंने कहा कि यदि भगवान राम के समय आप लोग रहे होते तो उनसे कहते कि सीता के लिए क्यों खून-खच्चर कर रहे हो, दूसरी सीता ले लो। आज जो कमजोर मानस के लोग हैं, वे ऐसा ही सोचते हैंं। उनमें शौर्य और वीर्य ही नहीं रह गया है। मगर हमारे देश के अंदर शौर्य और वीर्य खत्म हो गया है, ऐसा नहीं है। कोई ऐसा न सोचे कि हिन्दू कायर है। नेता कायर भले ही होंगे। पर हमारा समाज नहीं। राम जन्मभूमि आंदोलन ने इसे प्रकट किया है।


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अयोध्या में जोश से भरे कारसेवक (फाइल चित्र)


श्रीराम जन्मभूमि पर आए फैसले के बाद केन्द्र सरकार की भूमिका के बारे में आप क्या सोचते हैं?
वर्तमान सरकार ऐसे लोगों की है, जिन्होंने यह बात कभी मानी ही नहीं कि यहां भगवान राम और कृष्ण हुए। ये लोग मानते ही नहीं कि भगवान राम ऐतिहासिक पुरुष हैं। यह नास्तिकों की सरकार है। कांग्रेस में दो प्रकार के हिन्दू हैं, एक वे जिनकी धर्म में निष्ठा है। ऐसे लोगों की एक बहुत बड़ी संख्या है। और दूसरे वे जिनका धर्म छूट गया है। वे हिन्दू धर्म से अलग हो गए हैं और एक नया धर्म ‘सेकुलरवाद’ अंगीकार कर लिया है। ऐसे लोग हिन्दू समाज के दुश्मन हैं। श्रीराम जन्मभूमि का मुकदमा 60 वर्ष तक चला। इतना लंबा समय इन सेकुलरवादी कांगे्रसी नेताओं के कारण ही लगा। क्या इन्हें मालूम नहीं है कि श्रीराम जन्मभूमि कहां पर है? फिर भी मुकदमे में 60 वर्ष लग गए। इसमें ऐसे लोग रोड़ा अटकाते रहे हैं, जो यह मानते ही नहीं कि भगवान राम का यहां जन्म हुआ।

मुझसे लोग कहते थे कि आपने श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन क्यों शुरू कर दिया, इसमें तो खून-खच्चर होगा, अपना आंदोलन वापस ले लो। मैंने कहा कि यदि भगवान राम के समय आप लोग रहे होते तो उनसे कहते कि सीता के लिए क्यों खून-खच्चर कर रहे हो, दूसरी सीता ले लो। आज जो कमजोर मानस के लोग हैं, वे ऐसा ही सोचते हैंं।

भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू तो चाहते थे कि भगवान राम जहां पधार गए हैं, वहां से उनको बाहर निकाला जाए। उस समय के गृहमंत्री सरदार पटेल ने महात्मा गांधी के परामर्श से सोमनाथ मंदिर की जो पुनस्स्थापना की, उनके पक्ष में भी नेहरू नहीं थे। उन्होंने तो मंदिर के उद्घाटन के लिए जा रहे तत्कालीन राष्टÑपति श्री राजेन्द्र प्रसाद को भी मना किया। वह तो सरदार पटेल ने पक्का इरादा कर लिया था कि पुनस्स्थापना का काम अवश्य होगा। नेहरू तो हिन्दू धर्म के विरोधी थे। गांधीजी, जवाहर लाल नेहरू से कहा करते थे, ‘‘मेरे मुस्लिम प्रेम और तुम्हारे मुस्लिम प्रेम में बहुत अंतर है।’’ गांधी जी का कहना था, ‘‘आई लव इस्लाम थ्रू हिन्दुइज्म यानी मैं हिन्दू होने के कारण इस्लाम से प्यार करता हूं और तुम हिन्दुत्व से घृणा करते हो इसलिए इस्लाम से प्यार करते हो।’’ दोनों के इस्लाम के प्रति प्रेम में बहुत अंतर था। ऐसे दो प्रकार के हिन्दू आज कांग्रेस में दिखाई देते हैं, जो हिन्दुत्व से घृणा करते हैं। सोनिया गांधी को ऐसे लोगों ने अपना नेता बना रखा है। वह तो आई ही यहां हिन्दू समाज और धर्म का नाश करने के लिए हैं। हमारे पूजनीय शंकराचार्य को हत्या के आरोप में जो गिरफ्तार कर सकते हैं, उनके बारे में क्या कहा जाए। बड़े-बड़े संतों पर आरोप लगाए जाते हैं। हिन्दू संगठनों को कुचलने की कोशिश की जाती है। गांधीजी की हत्या का आरोप लगाकर नेहरू ने संघ पर प्रतिबंध लगाया था। संघ पर प्रतिबंध तो उनकी बेटी इन्दिरा गांधी ने भी लगाया था। नेहरू का पूरा परिवार हिन्दू समाज को कुचलने पर लगा है। अब तो हिन्दुत्व को कुचलने के लिए एक से एक नेता पैदा हो गए हैं। यह जो सोनिया गांधी हैं, नकली गांधी बनी हुई हैं, असली गांधी से इनका कोई संबंध नहीं है।


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अयोध्या में संतों के साथ श्री अशोक सिंहल (फाइल चित्र)
 
श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन को आप किस रूप में देखते हैं?
जिस रूप में भगवान की शक्ति प्रकट हुई, उस रूप में मैं इस  आंदोलन को देखता हूं । जिस दिन निर्णय आना था, भगवान राम फिर से वहां जिस तरह प्रस्थापित हुए हैं, जरा उसका रूप देखिए सारे देश की दृष्टि वहां चली गई, यह है उनकी शक्ति। इस शक्ति को देश के लोग पहचानें। जितने गुण संसार में हैं, वे सारे के सारे गुण एक व्यक्ति में समाए हैं और वे हैं भगवान राम। आज भी हमारा समाज वे सारे गुण लेकर जी रहा है। हमारे देश के लोगों में विदेशी दुर्गुण तेजी से आ हरे हैं। भारतीयों के गुणों की रक्षा के लिए लाखों संत लगे हुए हैं। हर संत इस काम में लगा हुआ है कि हमारे देश के भीतर राम ने जो आदर्श स्थापित किए, उनके जो गुण हैं, वे कैसे संजोकर रखे जा सकें। दिन-रात इसी की कोशिश हो रही है इसलिए विदेशी शक्तियां भारत के इन आदर्शों को मिटाने में सफल नहीं हो पा रही और न हो सकेंगी। बल्कि राम के गुणों का प्रताप ऐसा है कि ये सब लोग पराजित हो जाएंगे। मैं श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन को इसी रूप में देखता हं। भगवान राम जिस दिन भव्य मंदिर में प्रस्थापित हो जाएंगे, उस दिन से भारत का उत्थान शुरू हो जाएगा। काशी, मथुरा, अयोध्या तीनों प्राकृतिक स्थान जो भगवान के हैं, आज भी दुरावस्था में हैं। इन सबको गौरव प्राप्त कराने का काम करना होगा। इस तरह राम जन्मभूमि आंदोलन भारतीय संस्कृति के पुनरुत्थान का आधार बिन्दु बन गया है।

निर्णय के बाद राम मंदिर निर्माण के लिए परिस्थितियां कितनी अनुकूल होंगी?
जब-जब ऐसा कोई मुकदमा आया, जिसमें राम शामिल रहे वह मुकदमा हिन्दू कभी नहीं हारे। अभी भी तीनों न्यायाधीशों ने यही कहा है कि जहां भगवान राम बैठे हैं, वही उनका जन्मस्थान है। मुझे लगता है कि आगे जो भी मुकदमे होने वाले हैं, उनमें विजय भगवान राम की ही होगी।
राम के गुणों का प्रताप ऐसा है कि ये सब लोग पराजित हो जाएंगे। मैं श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन को इसी रूप में देखता हंू। भगवान राम जिस दिन भव्य मंदिर में प्रस्थापित हो जाएंगे, उस दिन से भारत का उत्थान शुरू हो जाएगा। राम जन्मभूमि आंदोलन भारतीय संस्कृति के पुनरुत्थान का आधार बिन्दु बन गया है।

मंदिर निर्माण की क्या योजना है?
हमारे देश में जो हिन्दू कानून है, उसके अनुसार वहां मालिकाना हक भगवान राम का है। भगवान राम वहां नाबालिग हैं और मुकदमा कोई बालिग ही लड़ सकता है, इसलिए उनकी तरफ से एक रामभक्त ने इस प्रकार का मुकदमा किया। यह न तो विहिप द्वारा हुआ है और न श्रीराम जन्मभूमि न्यास द्वारा। जिस समय श्रीराम जन्मभूमि का आंदोलन शुरू हुआ तब यह विषय भी आया कि जब हम कहते हैं कि राम जन्मभूमि हिन्दुओं को सुपुर्द करो, तो किसको सुपुर्द करो। तब हम स्वामी रामानंदाचार्य के पास गए। तब वे वैष्णव सम्प्रदाय के तीनों अखाड़ों के प्रमुख थे। हमने उनसे कहा कि हम चाहते हैं कि आपकी सुपुर्दगी में श्रीराम जन्मभूमि हमको प्राप्त हो। उन्होंने कहा कि राम केवल रामानंद सम्प्रदाय के नहीं हैं। राम तो इस देश में सबके हैं, इस दृष्टि से सारे मानव समुदाय के हैं। इसलिए मैं अकेले यह दायित्व नहीं ले सकता। उन्होंने कहा कि देश के बड़े-बड़े संत-महंत-आचार्य इसमें शामिल करो। तब रामजन्मभूमि न्यास का निर्माण हुआ, जिसमें बड़े-बड़े आचार्य शामिल किए गए और इसका संविधान बना है। इस न्यास को तीनों न्यायाधीशों ने अधिकृत माना है। इसी के माध्यम से धन संग्रह हुआ। इसी की देखरेख में पिछले 20 साल से अयोध्या में मंदिर निर्माण के लिए पत्थरों की गढ़ाई का काम चल रहा है। जब मंदिर का निर्माण हमें करना था तो यह आवश्यक था कि पत्थर की गढ़ाई का काम शुरू हो, जन्मभूमि के चारों ओर की भूमि हमें मिले। जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण के दिए 45 एकड़ भूमि हमने प्राप्त की। ये सारी व्यवस्थाएं न्यास ने ही की हैं। हालांकि न्यास उस वाद में नहीं है, जो न्यायालय में गया हुआ है, लेकिन निर्माण के लिए सारी व्यवस्थाएं करनी हैं।

रामलला ने कहा है कि यह न्यास मंदिर बनाना चाहता है, इसमें जो बाधाए हैं, उन्हें हटाओ। अब ये जो 130 गुणा 90 फीट भूमि है, इसमें तो मंदिर नहीं बन सकता, यह तो बहुत छोटा सा क्षेत्र है। हमने इसके निर्माण के लिए 45 एकड़ जमीन खरीदी थी, तत्कालीन प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव ने इसे बढ़ाकर 70 एकड़ कर दिया। अक्षरधाम मंदिर  70 एकड़ में बना हुआ है। जैसा सारा देश चाहता है कि इसी तरह भगवान राम का भव्य मंदिर बनेगा तो 70 एकड़ में बनेगा। हमारा कहना है कि केन्द्र सरकार कानून बनाए, जिससे यह 70 एकड़ भूमि श्रीराम जन्मभूमि न्यास को प्राप्त हो जाए और भव्य मंदिर का निर्माण हो। इसी के लिए यह मुकदमा चला, इसमें हमें सफलता भी मिली है। हालांकि इसका एक-तिहाई हिस्सा हमें नहीं मिला। संतों ने कहा है श्रीराम जन्मभूमि तक तीर्थ है, इसलिए यहां कोई भी मस्जिद नहीं बनेगी और तीर्थ के रूप में प्राधिकरण बनाकर इसका विकास किया जाए। यह साधारण तीर्थ नहीं है, यह हिन्दू समाज का महान तीर्थ है। मनु का जन्म यहीं हुआ, आदि तीर्थंकर ऋषभदेव जी का भी यहां जन्म हुआ। भगवान राम के ही इक्ष्वाकु वंश के महात्मा बुद्ध थे। भगवान राम के पुत्रों लव-कुश से सिख पंथ की परम्परा जुड़ी है। इस तरह अयोध्या का कितना महत्व है हम सबस के लिए, हमें समझने की आवश्यकता है। जिस प्रकार इसकी महिमा का वर्णन वाल्मीकि रामायण में है, इसको उसी प्रकार का भव्य स्वरूप प्रदान किया जाए। संतों ने यह भी कहा है कि जब न्यास बन गया है तो उसे मंदिर बनाने के लिए अधिकृत किया जाए।