‘‘राम जन्मभूमि हिन्दुओं की है उसे हम लेकर रहेंगे’’

    दिनांक 12-अगस्त-2020
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परमहंस महंत रामचंद्रदास
अयोध्या आंदोलन के शिल्पकारों में से एक परमहंस महंत रामचंद्रदास से लगभग 30 साल पहले पाञ्चजन्य ने बातचीत की थी, जो 7 अक्तूबर, 1990 के अंक में प्रकाशित हुई थी। उसी बातचीत को यहां पुन: प्रकाशित किया जा रहा है
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 हाल ही में आप कांची के शंकराचार्य स्वामी जयेन्द्र सरस्वती जी से राम जन्मभूमि के संबंध में उनके प्रस्ताव के विषय में बातचीत करके आए हैं। क्या आप उनका रुख बताएंगे?
शंकराचार्य जी को भ्रामक स्थिति में रखा गया था। कुछ लोग चाहते थे कि वे अपना वक्तव्य देकर यह सिद्ध करें कि बाबरी मस्जिद वहां है और उसको अछूता छोड़ दिया जाए। हमने राम जन्मभूमि के बारे में उनको जानकारी दी। शंकराचार्य जी से मैंने यही कहा कि शांतिपूर्ण हल तो यही है कि मुसलमान उस पत्थर को वहां से हटा लें जो मीरबाकी का लगाया हुआ है। यह सिद्ध हो चुका है कि वहां मुसलमानों की एक र्इंट भी नहीं है। मैंने शंकराचार्य जी से स्पष्ट कहा कि भारत की 25 लाख जनता कार सेवा में आ रही है। राम जन्मभूमि न्यास के तत्वावधान में यह कार्य हो रहा है। इस न्यास में शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, गोरक्षा पीठाधीश्वर, मधवाचार्य, जैन, बौद्ध, आर्यसमाजी और हिन्दू धर्म के प्रत्येक धर्माचार्य को स्थान दिया गया है। इसलिए राम मंदिर निर्माण के लिए यही न्यास अधिकारी है। मैंने उन्हें बताया कि इस न्यास  का निर्माण जगतगुरु विशिष्टाद्वैत सिद्धांत के जाने-माने आचार्य स्वामी रामनंदाचार्य शिवरामाचार्य जी ने किया था। यह वैष्णवाचार्यों की भूमि है। अगर जन्म स्थान आपको सौंपा गया तो यह सरकार लड़ाने वाली बात करेगी। वैष्णवाचार्य की भूमि पर शैवाचार्य बैठे, यह न तो अयोध्या की जनता स्वीकार करेगी और न ही शंकराचार्य स्वामी जयेन्द्र सरस्वती जी।

मैंने उनसे कहा कि विश्व हिन्दू परिषद के प्रयासों से ही आपको उत्तर भारत में काफी सम्मान मिला है। सरकार चालबाजी से राम जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण के कार्य को उलझन में डालना चाहती है। आप जिस स्थान पर बैठे हैं वह शिव कांची है। मैंने कहा कि आप अपने मंदिर के आचार्यत्व से ही अलग होकर अपने शिष्य को उत्तराधिकारी बना चुके हो। सरकार आपकी यश-कीर्ति को भंग करने का प्रयास कर रही है।

मैंने चालीस वर्ष की उम्र में अदालत में दावा दायर किया था। अब मैं अस्सी वर्ष का हो गया हूं। कोई फैसला नहीं हुआ। मैं ऊब गया हूं। फिर जो चीज जैसे जाती है वैसे ही आती भी है। बाबर ने कोई मुकदमा चलाकर राम जन्मभूमि पर कब्जा नहीं किया था। हिन्दू जनता भी अब इसे करो या मरो का प्रश्न मानती है। राम जन्मभूमि हिन्दुओं की है उसे हम लेकर रहेंगे।

कांची शंकराचार्य जी ने प्रत्युत्तर में क्या कहा?
उन्होंने मेरी बातों को गंभीरता से सुना। मेरे सम्मान में उन्होंने प्रसाद और एक शॉल भेंट की। साथ ही उन्होंने कहा कि मैं इस विवाद से दूर रहूंगा। मेरे परामर्श को भी उन्होंने मान्यता दी। मैं समझता हूं कि सरकार की लड़ाने वाली नीति, सफल नहीं होगी।

आपने उनसे पूछा कि अगर सरकार उन्हें राम जन्मभूमि सौंपने की बात कहेगी तो क्या वह स्वीकार करेंगे?
उन्होंने स्पष्ट कहा, ‘‘मैं इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं करूंगा। विश्व हिन्दू परिषद ने मेरा समर्थन किया है। मैंने भी कुंभ के अवसर पर विश्व हिन्दू परिषद का समर्थन किया था। सारे धर्माचार्यों ने जो निर्णय लिया है उससे पीछे हटने का प्रश्न ही नहीं है।’’ जयेन्द्र सरस्वती की बातों से मैं पूरी तरह आश्वस्त हूं।

 क्या आपको नहीं लगता कि कांची शंकराचार्य जी को सरकारी संत बनाने का प्रपंच रचा जा रहा है?
सरकार ऐसे प्रभावशाली व्यक्तियों को अपने पक्ष में खड़ा करने का असफल प्रयास कर रही है। दरअसल, सरकार विश्व हिन्दू परिषद के अभियान और भाजपा अध्यक्ष आडवाणी जी की रथायात्रा से उत्पन्न हिन्दू चेतना से बौखला गई है।

आपके आंदोलन को तोड़ने वाली सरकार की संभावित चालों को असफल बनाने के लिए आपने क्या रणनीति बनाई है?
हमें अपने आंदोलन के अटूट, अडिग और ध्येयनिष्ठ होने पर पूर्ण विश्वास है। उत्तर प्रदेश और केन्द्र की सरकार स्वयं को बचाने की चिंता करें तो करें। राम-विरोधी दल टूट जाएंगे, बंट जाएंगे। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को तो इसका प्रमाण भी मिल गया है। उन्हीं के दल के विधानसभाध्यक्ष हमारे समर्थन में खड़े हैं।

 मुलायम सिंह के इरादे तो नेक नजर नहीं आ रहे हैं।
मैं मुलायम सिंह को बता देना चाहता हूं कि उनके पास सत्ता तो है मगर जनसत्ता नहीं है। जनता के प्रबल प्रवाह के आगे, मुलायम सिंह और विश्वनाथ प्रताप सिंह की राम-विरोधी सरकारें और शक्तियां ध्वस्त हो जाएंगी। यदि रामभक्तों की भीड़ पर सरकार ने बल प्रयोग किया, गोलियां-लाठियां चलार्इं तो इससे कोई डरेगा नहीं। 20-25 लाख की भीड़ उनके नियंत्रण से बाहर हो जाएगी और अपने धर्मपथ पर बलिदान होने के लिए जनता तैयार रहेगी। शांति भंग होने का सारा दोष सरकार पर जाएगा। इसलिए सरकार को चाहिए कि वह मुसलमानों को और अन्य राम विरोधियों को समझाए।

मैं मुलायम सिंह को बता देना चाहता हूं कि उनके पास सत्ता तो है मगर जनसत्ता नहीं है। जनता के प्रबल प्रवाह के आगे, मुलायम सिंह और विश्वनाथ प्रताप सिंह की राम-विरोधी सरकारें और शक्तियां ध्वस्त हो जाएंगी। यदि रामभक्तों की भीड़ पर सरकार ने बल प्रयोग किया, गोलियां-लाठियां चलाइं तो इससे कोई डरेगा नहीं। 20-25 लाख की भीड़ उनके नियंत्रण से बाहर हो जाएगी और अपने धर्मपथ पर बलिदान होने के लिए जनता तैयार रहेगी।

 लेकिन सरकार तो अदालत के फैसले तक यथास्थिति बनाए रखने की बात कह रही है और मुस्लिम नेता भी यही कह रहे हैं?
मुसलमान कब से अदालत के फैसले का सम्मान करने वाले हो गए। शाहबानो प्रकरण पर सर्वोच्च न्यायालय के फैसले से क्रुद्ध होकर संविधान किसने जलाया था और मुलायम सिंह यादव ने ही राम जन्मभूमि का ताला खोलने का निर्णय देने वाले न्यायाधीश श्री कृष्ण मोहन पाण्डेय की पदोन्नति रोककर अपनी न्यायप्रियता का परिचय दे ही दिया है।
दूसरी ओर जब तक अदालत ने फैसला नहीं दिया, हमने फाटक के भीतर प्रवेश नहीं किया। अदालत के फैसले को हिन्दू मानता आया है मगर मुसलमान कभी नहीं मानता। मैंने चालीस वर्ष की उम्र में अदालत में दावा दायर किया था। अब मैं अस्सी वर्ष का हो गया हूं। कोई फैसला नहीं हुआ। मैं ऊब गया हूं। फिर जो चीज जैसे जाती है वैसे ही आती भी है। बाबर ने कोई मुकदमा चलाकर राम जन्मभूमि पर कब्जा नहीं किया था। हिन्दू जनता भी अब इसे करो या मरो का प्रश्न मानती है। राम जन्मभूमि हिन्दुओं की है उसे हम लेकर रहेंगे।

सुना है मुलायम सिंह को अपनी पुलिस पर भी विश्वास नहीं रहा?
मुलायम सिंह अगर ऐसा सोच रहे हैं तो उन्हें ठीक ही आभास हुआ। आखिर पुलिस के जवान भी तो हिन्दू हैं। सेना के जवान भी हिन्दू हैं। हिन्दू माताओं ने उन्हें, जब गर्भ धारण किया होगा तो, श्रीराम और हनुमान का स्मरण किया होगा। श्रीराम के आशीर्वाद से जन्मा हुआ हिन्दू का बेटा राम के भक्तों पर गोलियां चलाएगा, यह कैसे संभव है।