सिंधियों के लिए इमरान खान की अमेरिका में घेराबंदी

    दिनांक 17-अगस्त-2020   
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पाकिस्तान के सिंध प्रांत में दैहिक उत्पीड़न, कर्न्वजन, बलात्कार, हत्या जैसे गंभीर अपराधों के खिलाफ अमेरिका में आवाजें उठने लगी हैं। वहां रह रहे सिंधियों एवं उनके हिमायतियों ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को न केवल इस बारे में पत्र लिखा है बल्कि वॉयस ऑफ अमेरिका की ओर से सिंधी भाषा-संस्कृति पर कार्यक्रम आयोजित कर पाकिस्तानी सिंधियों के प्रति अमेरिकी सांसदों का समर्थन जुटाने का भी प्रयास किया।
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पाकिस्तान के सिंध प्रांत में दैहिक उत्पीड़न, कर्न्वजन, बलात्कार, हत्या जैसे गंभीर अपराधों के खिलाफ अमेरिका में आवाजें उठने लगी हैं। वहां रह रहे सिंधियों एवं उनके हिमायतियों ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को न केवल इस बारे में पत्र लिखा है बल्कि वॉयस ऑफ अमेरिका की ओर से सिंधी भाषा-संस्कृति पर कार्यक्रम आयोजित कर पाकिस्तानी सिंधियों के प्रति अमेरिकी सांसदों का समर्थन जुटाने का भी प्रयास किया। हाल ही में आयोजित इस कार्यक्रम के माध्यम से 40 मिलियन लोग जोड़े गए।
 
अमेरिका में रह रहे सिंधियों एवं उनके समर्थकों की ओर से ट्रंप को लिखे पत्र में पाकिस्तान के सिंध प्रांत की भयावह तस्वीर पेश की गई है। साथ ही अमेरिकी सरकार से आग्रह किया गया है कि पाकिस्तान के उत्थान एवं विकास के लिए अमेरिकी ओर से दी गई आर्थिक मदद के हवाले से प्रधानमंत्री इमरान खान पर दबाव बनाया जाए। ताकि सिंधियों का उत्पीड़न रोका जा सके।
 
अमेरिका के न्यू जर्सी में रह रहे सिंधी समुदाय ने पाकिस्तान के सिंधियों ओर से ट्रंप को लिखे पत्र में कहा है कि 2009 के बाद से, अमेरिकी कांग्रेस पाकिस्तान को वित्तीय सहायता का सबसे बड़ा लाभार्थी रही है। पाकिस्तान में अमेरिकी दूतावास एवं वाणिज्य दूतावास की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, कांग्रेस ने पाकिस्तान को नागरिक सहायता के लिए पांच बिलियन डॉलर एवं आपातकालीन आपदा के लिए एक बिलियन डालर की सहायता दी है। मगर इन पैसों का समान रूप से पाकिस्तान के सभी वर्गों तक लाभ नहीं पहुंचा। सिंधी समुदाय सबसे खराब परिस्थितियों में जीने को मजबूर हैं।

ईश निंदा उत्पीड़न का हथियार
 
दक्षिण-पूर्व पाकिस्तान में स्थित सिंध क्षेत्र, अपनी सांस्कृतिक पहचान एवं खास जीवन शैली को बनाए रखने के लिए संघर्षरत हैं। यहां तक कि सिंधियों की नागरिक स्वतंत्रता तक छीनी जा रही है। पाकिस्तानी सरकार के उत्पीड़ित और अनदेखी से संसाधनों से समृद्ध व अद्वितीय शिल्प कौशल के बावजूद सिंध आर्थिक अनिश्चितता का सामना कर रहा है। सिंध के लोगों को भारी चुनौतियां झेलनी पड़ रही हैं।

सिंधी समुदाय को मजहबी उत्पीड़न, जबरन कन्वर्जन एवं असाधारण हत्याओं का भी सामना करना पड़ रहा है। मजहबी उत्पीड़न का ताजा मामला नोतन लाल का है। उन्हें ‘ईश निंदा’ के आरोप में गिरफ्तार किया गया। वह एक सिंधी हिंदू स्कूल के प्रिंसिपल थे। एक दिन एक छात्र ने उनपर ईश निंदा का आरोप लगा दिया, जिसके बाद से उनकी जिंदगी की पटरी से उतर गई। बाद में उक्त छात्र ने स्वीकारा कि प्रिंसिपल के होमवर्क से बचने के लिए उसने उनके खिलाफ ईश निंदा का झूठा प्रचार किया था। छात्र के कबूलनामे के बाद भी उन्हें नहीं बख्शा गया। स्थानीय कटृटरपंथियों ने उन पर ईशनिंदा का झूठा आरोप मढ़ कर मुकदमा दर्ज करवा दिया। स्थिति है कि अपने मामले की सुनवाई को लेकर वह पूरी तरह से टूट चुके हैं। पाकिस्तानी न्यायाधीशों ने अपनी सुरक्षा के भय से उन्हें जेल से बाहर आने के लिए जमानत देने से मना कर दिया है।

पिछले छह महीनों में उनके स्वास्थ्य में भी गिरावट आई है। सिंध के हिंदू समुदाय ने उनकी मदद के लिए पुरजोर प्रयास किए, बावजूद इसके वह जेल से बाहर नहीं आ पाए। अमेरिका के अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग के अनुसार, पाकिस्तान में ईश निंदा के आरोपों में 1990 के बाद 75 लोग सरेआम मार दिए गए तथा 40 लोगों को आजीवन कारावास या सजा-ए-मौत की सजा सुनाई गई।

पिछले कुछ वर्षों से सिंध के लोग नाटकीय ढंग से गायब भी किए जाने लगे हैं। पाकिस्तान के मानव अधिकार आयोग की एक रिपोर्ट के अनुसार, यूरोपीय संघ के लिए 2011 में पाकिस्तान के कमीशन ऑफ़ इंक्वायरी डिसपैरेंस के गठन के बाद, जांच में 5,290 लोगों के रहस्यम तरीके से गायब होने का मामला सामने आया। कई मामलों में अधिकांश परिजनों ने पुलिस में इसलिए शिकायत दर्ज नहीं करवाई कि बाद में कहीं उन्हें भी टार्गेट न बनाया जाए। रहस्यमय तरीके से गायब किए जाने वालों में एक्टिविस्ट, लेखक, शिक्षक, कलाकार, पत्रकार एवं छात्र हैं। ऐसे ही लोगों में शामिल नियाज लेशारी की हाल में हत्या कर दी गई। पहले उनका अपहरण किया गया। फिर मारकर सड़क किनारे फेंक दिया गया। जो भी सरकार के खिलाफ बोलता है, वह निशाना बनाया जाता है। यह प्रवृति समय के साथ बढ़ रही है।

कन्वर्जन से असंतुलन का खतरा
अमेरिकी सिंधियों की ओर से अमेरिकी राष्ट्रपति को लिखी चिट्ठी में कहा गया कि युवा सिंधी अल्पसंख्यकों के मजहबी उत्पीड़न एवं जबरन कन्वर्जन से क्षेत्र के असंतुलन का खतरा बढ़ गया है। हर वर्ष एक हजार के करीब युवा हिंदू एवं ईसाई लड़कियों को उठा लिया जाता है। उनका जबरन कन्वर्जन कराने के बाद शादी करा दी जाती है। प्रत्येक महीने 40 से 60 सिंधी लड़कियों का कन्वर्जन किया जा रहा है। एक दिन में औसतन दो लड़कियां शिकार बन रही हैं। आमतौर से मुस्लिम अपहरणकर्ताओं की शिकार हिंदू लड़कियों की उम्र 20 से 30 वर्ष होती है। उनसे निकाह करने वालों की पहले से एक या दो पत्नियां होती हैं। पाकिस्तान मानवाधिकार आयोग के अनुसार, जनवरी 2004 से मई 2018 तक, पाकिस्तान में सिंधी लड़कियों के अपहरण के 7,430 मामले दर्ज किए गए, जबकि वास्तविक संख्या इससे कई गुणा ज्यादा है। अधिकांश मामले दर्ज ही नहीं होते। पीड़ित परिवार अपनी बेटियों के लापता होने की रिपोर्ट दर्ज कराने की कोशिश करते हैं तो अक्सर पुलिस नजरअंदाज कर देती है। उनकी प्रथम सूचना रिपोर्ट कोर्ट में प्रस्तुत ही नहीं की जाती। इसलिए, लड़कियों को अपहरणकर्ताओं के साथ छोड़ दिया जाता है, जहां उन्हें धमकी दी जाती है कि उसके मुंह खोलने पर उसके परिवार वालों का भी वह हश्र होगा जो उसका हुआ है। सिंध में सिंधी भाषा-संस्कृति को भी समाप्त किया जा रहा है, जिसे ध्यान में रखते हुए वॉयस ऑफ अमेरिका ने 2019 में सिंधी भाषा पर आधारित एक कार्यक्रम आयोजित किया था। इसके माध्यम से 40 मिलियन लोग जुड़े गए थे। सिंधी भाषा एवं संस्कृति की वकालत के लिए इस दौरान ब्रैड शेरमैन काफी सराहे गए थे।