इस्लाम छोड़ने पर मौत की सजा के विरुद्ध #ApostasyDay अभियान को मिल रहा भरपूर समर्थन, आखिर दुनिया भर में किन वजहों से इस्लाम छोड़ रहे मुसलमान

    दिनांक 23-अगस्त-2020   
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इस्लामिक देशों में बढ़ती कट्टरता एवं इस्लाम त्यागने पर मृत्यु दंड के विरुद्ध इन दिनों दुनियाभर में #ApostasyDay यानी इस्लाम छोड़ने के दिन के रूप में मनाया जा रहा है। इस अभियान के दौरान मुसलमान रहे व्यक्ति इस्लाम त्यागने के बारे में अपनी राय खुले रूप से रख रहे हैं। इन सभी लोगों द्वारा मोटे तौर पर कहा जा रहा है कि जो मजहब हल्की आलोचना भी न सह सके, जिसमें इस्लाम छोड़ने के विचार मात्र से हत्या कर दी जाए, उसमें बने रहने से अच्छा है, उसे छोड़ देना।
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इस्लामिक देशों में बढ़ती कट्टरता एवं इस्लाम त्यागने पर मृत्यु दंड के विरुद्ध इन दिनों दुनियाभर में #ApostasyDay यानी इस्लाम छोड़ने के दिन के रूप में मनाया जा रहा है। इस अभियान के दौरान मुसलमान रहे व्यक्ति इस्लाम छोड़ने के बारे में अपनी राय खुले रूप से रख रहे हैं। इन सभी लोगों द्वारा मोटे तौर पर कहा जा रहा है कि जो मजहब हल्की आलोचना भी न सह सके, जिसमें इस्लाम छोड़ने के विचार मात्र से हत्या कर दी जाए, उसमें बने रहने से अच्छा है, उसे छोड़ देना।

 
गौरतलब है कि #ApostasyDay प्रत्येक वर्ष 22 अगस्त को मनाया जाता है। हालांकि इसे गुजरे एक दिन हो गया, लेकिन बावजूद इसके इसे लेकर चलाए जा रहे हैशटैग #ApostasyDay अभियान से लोग लगतार जुड़ रहे हैं। अभियान की अगुवाई करने तथा खुद को स्वमजहब छोड़ने का पैगंबर कहने वाले उत्तरी अमेरिका के रिडवैन एडमायर ने सोशल मीडिया पर लगभग पांच मिनट का एक वीडियो शेयर किया है। इसमें वह लोगों से न केवल इस्लाम से दूर रहने की नसीहत देते दिखाई दे रहे हैं बल्कि लोगों से ऐसे ही वीडियो बनाकर अभियान को और मजबूत बनाने का आहवान करते दिखाई दे रहे हैं।

इस अभियान में भाग लेते हुए एक्स मुस्मिल ऑफ नॉर्थ अमेरिकी के ट्वीटर हैंडल पर भी एक वीडियो साझा किया है, जिसमें इस्लामिक विद्वान डॉक्टर मुकद्दम कहते सुनाई दे रहे हैं कि शरिया के हिसाब से इस्लामिक देशों में इस्लाम छोड़ने पर मौत की सजा संभव है।
 

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पेश से इंजीनियर और #ApostasyDay अभियान के हिस्सेदार मुस्तफा रवाडा ट्वीट कर इस्लाम की आलोचना में कहते हैं," यह मजहब असुरक्षित है। आप छोड़ते हैं तो आपकी मृत्यु हो सकती है। यह इतना कमजोर है कि हल्की आलोचना भी नहीं सह सकता। ऐसे में इस्लाम छोड़कर सामान्य होना ही बेहतर है।’’

रिडवन कहते हैं कि आज दुनिया में इस्लाम की आलोचना हो रही है। पर कोई इसमें जब संसोधन या सुधारने की बात करता है तो खून—खराब शुरू हो जाता है। यह क्या है ? क्या गलत को गलत कहना अपराध है ? अगर ऐसा है तो वह कोई मजहब नहीं हो सकता।

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एक अन्य ट्वीट में शमी कहते हैं कि इस्लाम छोड़ना खतरनाक है। आपको मौत की सजा भी हो सकती है। बंदी बनाया जा सकता है। देश निकाला किया जा सकता है। इस्लाम में विश्वास नहीं करने की सजा-ए-मौत भी हो सकती है। आखिर कितना कमजोर है ये मजहब ?

 इसी तरह स्केप्टिक मुहम्मद के ट्वीटर हैंडल से कहा गया कि मुस्लिम देशों में रह रहे इस्लाम त्याग़ चुके लोग जान बचाने के लिए मुसलमान होने का नाटक कर रहे हैं। फिर भी कठमुल्लों को कुछ समझ नहीं आ रहा।

गौरतलब है कि अभियान के अगुवा रिडविन को पश्चिमी देशों से खूब समर्थन मिल रहा है। ट्वीटर पर उनके साढ़े 30 हजार के करीब फॉलोवर्स हैं, जो अभियान को आगे बढ़ाने में लगे हैं।