मंगलमूर्ति भगवान श्री गणेश की महिमा अपरंपार

    दिनांक 23-अगस्त-2020
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विभिन्न देशों में गणपति अलग-अलग नामों से प्रख्यात हैं। जापान में गणेश जी को ‘शोटन’ के नाम से जाना जाता है जबकि तांत्रिक बौद्ध गणपति को ‘महा-रक्त’ के नाम से पूजा करते है। गणेश जी तिब्बत में ‘महाकाल’, चीन में ‘हो टेई’, थायलैंड में ‘फ्रा फिकनेत’ या ‘फ्रा फिकानेसुअन’ और मेक्सिको में ‘वीरकोष’ के नाम से जाना जाता है

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इस्लामिक देश इंडोनेशिया में भगवान श्री गणेश के बारे में जानकारी लेते बच्चे।
रिद्धि सिद्धि के दाता गणेश जी सार्वभौमिक हैं। उनकी महिमा अपर अपरंपार है जो काल, परिस्थिति एवं देश की सीमाओं के बंधन से परे है। समय समय पर अनेक ज्ञानी-ध्यानी, इतिहास-वेत्ता, पुरातत्वविद एवं वैज्ञानिक अपने अपने विवेक से गणेश जी का तार्किक विश्लेषण करने का मिथ्या प्रयास करते हैं। विघ्न-विध्वंसक गणपति तो मानव-मात्र की तार्किक क्षमता और बुद्धि से परे ‘यो बुद्धे परतस्तु सः’ हैं। चर-अचर एवं जड़-चेतन जगत में सर्वव्याप्त गणेश जी की अनुकम्पा के बिना तो पत्ता भी नहीं हिलता।
तथाकथित वैज्ञानिक विचारधारा वाले प्रबुद्ध-जन हमारे विचारों को “अज्ञानता” सिद्ध करने में ‘गर्व’ का अनुभव करने से बाज़ नहीं आएंगे। दरअसल तथाकथित वैज्ञानिक-प्रणाली एवं सोच, आँकड़ों का एक सोचा समझा मकड़जाल बनकर रह गयी है और सृजनात्मकता से शनैः-शनैः दूर जा रहीं है। भगवत-गीता के अठारहवें अध्याय के चौदहवे श्लोक में स्पष्ट लिखा है,‘देवं चैवात्र पञ्चमं’ अर्थार्थ किसी भी कार्य की अंतिम सफलता तभी होती है, जब‘ईश्वर’ चाहते हैं।
कला एवं अंतरराष्ट्रीय व्यापार के शोध-कार्य में संलग्न होने के कारण हमें देश-विदेश में अक्सर भ्रमण करना पड़ता है जहां सर्वशक्तिमान विध्न-विध्वंसक गणेश जी का प्रभाव दुनिया भर में परिलक्षित होता है। मंगलमूर्ति गणेश जी को अनादिकाल से ही विध्न-विध्वंसक, “निर्विघ्नम कुरु में देव, सर्व कार्येषु सर्वदा” सर्वप्रथम पूज्य देव के रूप में न केवल भारत-वर्ष, अपितु अनेक देशों में पूजा जाता है। विभिन्न देशों में गणपति अलग-अलग नामों से प्रख्यात हैं। जापान में गणेश जी को ‘शोटन’ के नाम से जाना जाता है जबकि तांत्रिक बौद्ध गणपति को ‘महा-रक्त’ के नाम से पूजा करते है। गणेश जी तिब्बत में ‘महाकाल’, चीन में ‘हो टेई’, थायलैंड में ‘फ्रा फिकनेत’ या ‘फ्रा फिकानेसुअन’ एवं मक्सिको में ‘वीरकोष’ के नाम से जाना जाता है। जापानी चित्रशैली में गणेश की तीस से भी अधिक विधाएं प्रचलित हैं जिनमें आलिंगित ‘कांगी’ शैली अत्यधिक लोक प्रिय है।
आधुनिक अर्थविद 1991 से ही भारत के ग्लोबलाईज़ेशन तक ही अपनी सोच एवं शोध दोनों ही सीमीत रखते हैं, जबकि भारतीय देवी देवता तो अनादिकाल से ही विश्व व्याप्त एवं सीमाओं से परे हैं। रोमन देवता ‘जेनस’ को भी अनेक इतिहासकारों नें गणेश जी का रूप बताया है। दक्षिण एवं मध्य अमेरिकी देशों, जैसे माक्सिको, पेरू, ग्वाटेमाला, बोलीविया एवं होंडरस की ‘इंका’ एवं ‘एज़टेक’ सभ्यताओं में भी हिन्दू देवी-देवता, मंदिर एवं संग्रहालय देखने को मिलते हैं। माक्सिको के डिअगे दिवेरिआ के मंदिर में गणेश-प्रतिमा, एवं ग्वाटेमाला के वेरा-क्रूज एवं क्वीरागाओं के गणपति प्राचीन अमेरिका में गणपति की व्याप्तता को प्रमाणित करते हैं। जापान में ‘शोटन’ (गणेश) बुद्धि, शक्ति एवं उत्साह के प्रतीक हैं। उम्रदराज लोग व्यावसायिक सफलता एवं धन-सम्पदा प्राप्त करने के लिए जबकि युवक-युवतियां प्यार में सफलता के लिए गणेश जी की पूजा करते हैं।
धर्मनिरपेक्ष भारत के सरकारी भवनों एवं सार्वजनिक स्थानों पर गणेश या अन्य किसी हिन्दू देवी-देवताओं की प्रतिमाए शायद ही कहीं दृष्टिगोचर हों किन्तु बौद्ध देश थायलैंड की राजधानी बैंकॉक के स्वर्णभूमि एयरपोर्ट की तो रक्षा का सारा जिम्मा एवं श्रेय गणेश जी सहित अनेक हिन्दू देवी-देवताओं सहित यक्ष समूह को जाता है। बैंकॉक एयरपोर्ट पर ये विशाल प्रतिमाएं सहज ही पौराणिक युग में प्रवेश का अहसास करती हैं। इतना ही नहीं, दुनिया के सर्वाधिक मुस्लिम जनसंख्या वाले देश इन्डोनेशिया के कोने कोने में न केवल गणेश-मंदिर हैं, अपितु उनकी मुद्रा पर भी गणेश जी के चित्र को वहां के राष्ट्रपति के फोटो के साथ दर्शाया गया है।
अनेक एशियाई देशों के सरकारी संस्थानों, यहां तक कि सैन्य उपक्रमों एवं सार्वजनिक जगहों पर विघ्नहरण मंगलमूर्ति गणेश जी कि प्रतिमा को प्रमुखता से स्थापित किया गया है। बैंकॉक के सेंट्रल वर्ड (वर्ड ट्रेड सेंटर) में गणेश जी कि एक भव्य प्रतिमा, ऊंचे सिंहासन पर, व्यवसाय एवं कूटनीति के देवता के रूप में स्थापित की गई है, जहां उन्हें फूल, अगरबत्ती एवं अन्य वस्तुएं बड़ी श्रद्धापूर्वक अर्पित की जाती है।
विश्वव्यापी सर्वव्याप्त, “समस्त विघनौघविनाश दक्ष‘, समस्त विघ्न एवं पापों के विनाश में दक्ष, गणपती की आलौकिक शक्ति’ का अहसास यदि भारत में भी ‘सरकारी आईने’ से हो जाए, तो शायद देश की दशा सुधर जाए एवं भारत में ‘अच्छे दिन’ आ जाए।