भारत रत्न पूर्व राष्ट्रपति के निधन पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की ओर से श्रद्धांजलि

    दिनांक 31-अगस्त-2020
Total Views |
पूर्व राष्ट्रपति के निधन पर संघ ने जताया दुःख, कहा संघ व स्वयंसेवकों के लिये अपूरणीय क्षति

pranab_1  H x W
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने भारत रत्न पूर्व राष्ट्रपति डॉ. प्रणव मुखर्जी के निधन पर शोक जतया. संघ ने कहा कि डॉ. प्रणव मुखर्जी का जाना देश के साथ ही संघ व स्वयंसेवकों के लिये भी अपूरणीय क्षति है. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की ओर से सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी और सरकार्यवाह भय्याजी जोशी ने परिजनों के प्रति अपनी संवेदनाएं प्रकट कीं.
सरसंघचालक व सरकार्यवाह की ओर से जारी संदेश में कहा गया कि कुशल प्रशासक, राष्ट्र-हित सर्वोपरि का भाव जीवन में रख, राजनैतिक अस्पृश्यता से परे व सभी दलों में समान रुप से सम्मानित, मितभाषी, लोकप्रिय पूर्व राष्ट्रपति श्री प्रणब मुखर्जी आज अपनी जीवन यात्रा पूर्ण कर परम तत्व में विलीन हो गए. भारत के राजनैतिक-सामाजिक जीवन में उपजी इस शून्यता को भरना आसान नहीं होगा. संघ के प्रति उनके प्रेम और सद्भाव के चलते हमारे लिए तो वे एक मार्गदर्शक थे. उनका जाना संघ के लिए एक अपूरणीय क्षति है.
पूर्व राष्ट्रपति के निधन पर श्रद्धांजलि व्यक्त करते हुए सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने अपने वीडियो संदेश में कहा कि डॉ. प्रणब मुखर्जी का अपने पार्थिव देह को छोड़कर जाना, उनके संपर्क में आए हुए हम सभी संघ के स्वयंसेवकों के लिये एक बहुत बड़ी कमी का सामना करने की घड़ी है. जब वे राष्ट्रपति थे तब दो बार, और उसके बाद भी तीन-चार बार, मैं उनको मिला हूं. पहली भेंट में ही उनके आत्मीय और उदार स्वाभाविक व्यवहार ने मुझे यह भुला दिया कि मैं भारत के राष्ट्रपति से बात कर रहा हूं. मुझे ऐसा लगा कि मैं अपने घर के किसी बुजुर्ग से बात कर रहा हूं. और उनका यह व्यवहार सदा, सर्वदा, सर्वत्र, जितना मैंने देखा, सबके साथ देखा.
यहां (नागपुर) वह संघ के वर्ग को देखने आए थे, अन्य भी 10-12 अतिथि थे. उनके साथ उनके परिचय का कार्यक्रम था. सब आकर बैठ गए, प्रणब दा भी आकर बैठ गए. और कार्यक्रम का संचालन करने वाले खड़े होकर प्रस्तावना शुरू करने ही वाले थे, उतने में डॉ. प्रणब मुखर्जी खड़े हो गए, और उन्होंने कहा कि देखो, हम यहां परिचय के लिए एकत्रित आए हैं, और मैं स्वयं से प्रारंभ करता हूं. उन्होंने खड़े होकर अपना परिचय सबको दिया, - मैं प्रणब मुखर्जी भारत का राष्ट्रपति रहा हूं.
यह इतनी अनापेक्षित बात थी कि सब लोग अवाक रह गए और सब लोग मन ही मन उनकी सादगी के, मिलनसारिता के कायल हो गए. इतना सबके साथ सामान्य होकर वे घुलने मिलने वाले थे. लेकिन वे बहुत अनुभवी, परिपक्व चिंतक भी थे. उनके पास जानकारी भी थी, दीर्घ जीवन में अनुभव के कारण उस जानकारी को पचाकर सद-दिशा में उसका उपयोग करने वाला विवेक भी उनके पास था. इसलिए वे हम जैसे लोगों के लिए मार्गदर्शक बुजुर्ग थे.
उनके साथ जितना देर बैठेंगे, लगता था और बैठें, वे और बोलें. हम उनके सान्निध्य में अपने व्यक्तित्व को समृद्ध होता हुआ अनुभव करते थे. लंबा राजनीतिक जीवन, कुशळ राजनीतिज्ञ का बहुत सफल जीवन उनका रहा. सब प्रकार की चालें भी वह जानते थे. परंतु इस राजनीति से ऊपर उठकर देशहित में सबको अपना मानकर चलने की और राजनीतिक मतभेदों के बावजूद सबको अपना बनाने की उनकी वृत्ति, सदैव उनके व्यवहार में हमने देखी है. हमने एक विद्वान को खोया है. देशहित के लिये सदैव चिंतित रहने वाले एक देशभक्त को खोया है. हमारे, आपके सामाजिक और व्यक्तिगत व्यवहार में विवेक के मार्गदर्शन को देने वाले एक बुजुर्ग को खोया है. उनके जाने से जो हमारी क्षति हुई है, वो कभी पूरी नहीं हो सकती. मेरे जैसे कई लोगों के जीवन में प्रणब दा बहुत थोड़े समय के लिये आए, परंतु वे सदैव याद रहेंगे. सदैव लगेगा कि उनका होना हमारे लिये कितना आवश्यक था. नियति की इच्छा है, उसको हम कुछ नहीं कर सकते हैं. उनके परिवारजनों के शोक में हम सब समान संवेदना रखते हुए सहभागी हो रहे हैं, और उनकी आत्मा की सद्गति के लिये ईश्वर चरणों में प्रार्थना करते हैं.