कालीकट विवि में राष्ट्रविरोधी पाठ्यक्रम

    दिनांक 05-अगस्त-2020
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 टी. सतीशन
केरल राष्ट्र और हिंदुत्व विरोधी ताकतों का गढ़ तो है ही। अब इनकी घुसपैठ उच्च शिक्षा में भी हो गई है। हाल ही में कालीकट विवि ने बी.ए. अंग्रेजी साहित्य के पाठ्यक्रम में एक ऐसी पुस्तक को शामिल किया है, जिसमें अरुंधति रॉय के राष्ट्रविरोधी लेख है
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चित्र: बीए (अंग्रेजी साहित्य) के तृतीय सेमेस्टर के पाठ्यक्रम में शामिल अरुंधति रॉय के राष्ट्रविरोधी लेख के पृष्ठ।

रल का कालीकट विश्वविद्यालय इन दिनों एक बार फिर गलत कारणों से चर्चा में है। दरअसल, विश्वविद्यालय ने सी.आर. मुरुगन बाबू और प्रो. आबिदा फारूकी द्वारा संकलित एवं सम्पादित पुस्तक ‘एप्रीशिएटिंग प्रोज’ को बी.ए. (अंग्रेजी साहित्य) के तृतीय सेमेस्टर के पाठ्यक्रम में शामिल किया है। इस पुस्तक में अरुंधति रॉय का ‘कम सेप्टेम्बर’ शीर्षक वाले राष्ट्रविरोधी लेख को स्थान दिया गया है। इसी को लेकर विवाद है। अरुंधति रॉय ने 2002 में अमेरिका में एक व्याख्यान दिया था, यह लेख उसी का संशोधित प्रिंट संस्करण है।
पुस्तक के संकलनकर्ताओं ने परिचय के रूप में लेखिका के उस कुख्यात राष्ट्रविरोधी बयान को उद्धृत किया है कि जिसमें उन्होंने कहा था, ‘अफजल को फांसी दिया जाना भारतीय लोकतंत्र पर धब्बा था।’ संकलनकर्ताओं ने लिखा है, ‘2008 में उन्होंने (अरुंधति रॉय ने) कश्मीरियों की स्वतंत्रता के तर्क का समर्थन किया और सशस्त्र भारतीय सेना के विरुद्ध कश्मीरियों के शस्त्रहीन संघर्ष के प्रति श्रद्धा दिखाई। उन्होंने यहूदी और हिंदूवादी विचारधाराओं पर अत्यंत मुखर आक्रमण किए हैं।’ अरुंधति रॉय ने कई मौकों पर ऐसे राष्ट्रविरोधी बयान दिए हैं। एक बार उन्होंने कहा था, ‘कारगिल युद्ध पड़ोसी देश की भूमि पर काबिज होने के इरादे से पाकिस्तान पर किया गया भारतीय हमला था।’ इसी तरह, उन्होंने कहा था, ‘भारत सरकार नागरिकता संशोधन अधिनियम के नाम पर देश में लोगों की हत्या करती है। अनुच्छेद-370 को समाप्त करने के बाद कश्मीर में भी इसी तरह हत्याएं हुई हैं।’ कुछ साल पहले रॉय ने एक बयान में कहा था कि ‘माओवादी बंदूकधारी गांधीवादी हैं!’

भाजपा, अभाविप और कई राष्ट्रवादी आंदोलनों ने कालीकट विश्वविद्यालय द्वारा राष्ट्र-विरोधी रुख का समर्थन करने पर आपत्ति जताई है। शिक्षा बचाओ आंदोलन (एसईएम) के राज्य अध्यक्ष और शिक्षा के लिए गठित राष्ट्रीय निगरानी समिति के सदस्य ए. विनोद मास्टर का कहना है कि यह मुद्दा गंभीर है। उनका संगठन इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप करेगा। वैसे उनका संगठन केंद्र्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री के समक्ष भी इस बाबत शिकायत दर्ज करा चुका है। केरल के भाजपा अध्यक्ष के. सुरेद्रन ने भी इस राष्ट्रविरोधी पाठ्यक्रम के लिए जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की मांग की है। कुछ साल पहले इसी विश्वविद्यालय ने इस्लामिक आतंकवाद की प्रशंसा करने वाले अल-कायदा के आतंकी इब्राहिम अल रुबाशी द्वारा रचित कविता ‘ऐन ओड टू द सी’ को पाठ्यक्रम में शामिल कर विवाद को जन्म दिया था। आतंकी रुबाशी ने अमेरिकी जेल में कैद के दौरान यह कविता लिखी थी। हालांकि भाजपा, अभाविप और शिक्षा बचाओ आंदोलन के जबरदस्त विरोध के बाद विश्वविद्यालय प्रबंधन ने इसे पाठ्यक्रम से हटा तो दिया, लेकिन यह तर्क दिया कि ‘तथ्यों की ओर ध्यान न दिए जाने के कारण शामिल किया गया था!’

विनोद मास्टर कहते हैं कि विश्वविद्यालय के अध्ययन एवं अकादमिक परिषद में ताकतवर राष्ट्रविरोधी ताकतों के घुसपैठ के कारण यह सब हो रहा है। उन्हें इस बात को लेकर कोई आश्चर्य नहीं है कि मुख्यमंत्री कार्यालय खुद ही ऐसे लोगों के लिए स्वर्ग बन गया है, जो आतंकी गतिविधियों के लिए सोने की तस्करी करते हैं। यहां तक कि राज्य के उच्च शिक्षा मंत्री भी इसे लेकर संदेह के घेरे में हैं। विवादित लेख पर भाजपा, अभाविप और अन्य राष्ट्रवादी संगठनों के विरोध को दरकिनार करते हुए कालीकट विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. एम.के. जयराज ने मीडिया को बताया कि विश्वविद्यालय बीए तृतीय सेमेस्टर (अंग्रेजी साहित्य) के पाठ्यक्रम से ‘सराहनीय गद्य’ पाठ को नहीं हटाएगा। उनका यह कदम सीधे तौर पर देशभक्ति की भावना के विरुद्ध है। जाहिर है कि कुलपति को राज्य की पिनरई विजयन की वामपंथी सरकार से शह मिल रही है।