...ताकि चलती रहे अपनी दाल-रोटी!

    दिनांक 01-सितंबर-2020   
Total Views |

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सोनिया गांधी और राहुल गांधी को खुश करने के लिए प्रदेश में चल रही ‘अन्नपूर्णा रसोई योजना’ का नाम बदलकर ‘इंदिरा रसोई योजना’ कर दिया
pf23_1  H x W:
सोनिया गांधी को नमस्कार करते अशोक गहलोत (फाइल चित्र)

राजस्थान सरकार ने गत 20 अगस्त को ‘अन्नपूर्णा रसोई योजना’ का नाम बदलकर ‘इंदिरा रसोई योजना’ कर दिया है। बता दें कि ‘अन्नपूर्णा रसोई योजना’ का प्रारंभ 15 दिसंबर, 2016 को पूर्ववर्ती भाजपा सरकार ने गरीब और मजदूरों को भरपेट भोजन उपलब्ध कराने के लिए किया था। लोग कह रहे हैं कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कांग्रेस आलाकमान के सामने अपनी स्थिति और मजबूत करने तथा प्रदेश के मुसलमानों को खुश करने के लिए इस योजना का नाम बदला है। उल्लेखनीय है कि ‘अन्नपूर्णा रसोई योजना’ के नाम पर कुछ कट्टरवादी संगठन आपत्ति दर्ज कराते रहते थे। 
प्रदेश के पूर्व शिक्षा मंत्री और अजमेर के भाजपा विधायक वासुदेव देवनानी ने एक ट्वीट कर इस नाम परिवर्तन को हिंदू देवी-देवताओं का अपमान बताया है। देवनानी ने कहा है, ‘‘अन्नपूर्णा का शाब्दिक अर्थ है ‘धान्य’ (अन्न) की अधिष्ठात्री। इस अधिष्ठात्री के नाम पर चल रही योजना का नाम इंदिरा गांधी पर कर देना संकीर्ण सोच का परिचायक है। कांग्रेस सरकार की विगत डेढ़ वर्ष की उपलब्धि है योजनाओं का नाम बदलना और एक ही परिवार का महिमामंडन करना।’’
उल्लेखनीय है कि अशोक गहलोत ने राज्य के सभी 33 जिलों के लिए 350 से भी ज्यादा इंदिरा रसोई की शुरुआत की है। इसके तहत लोगों को 8 रुपए में खाना खिलाया जाएगा। इसमें 100 ग्राम दाल, 100 ग्राम सब्जी, 250 ग्राम चपाती (रोटी) और अचार प्रति थाली होगा।

‘अन्नपूर्णा रसोई’ और ‘इंदिरा रसोई’ में अंतर
    • इंदिरा रसोई योजना में आठ रु. में भोजन की थाली मिलेगी, वहीं अन्नपूर्णा रसोई योजना में पांच रु. में नाश्ता और आठ रु. में भोजन मिला करता था।

    • इंदिरा रसोई के तहत सुबह साढ़े आठ बजे से दोपहर एक बजे तक और शाम पांच से रात आठ बजे तक आम लोगों को खाना मिल सकेगा, जबकि अन्नपूर्णा रसोई में दोपहर और शाम के खाने के साथ सुबह नाश्ता भी मिलता था।

    • अन्नपूर्णा योजना में राज्य के 191 शहरों में 500 मोबाइल वैन के माध्यम से जनता को नाश्ता और भोजन मुहैया करवाया जाता था। नाश्ते में पोहा और खिचड़ी मिलती थी, जबकि रात्रि के भोजन में दाल-ढोकली, खिचड़ी, कढ़ी-चावल, पुलाव, दाल-चावल आदि उपलब्ध करवाई जाती थी। इसी तरह दोपहर के भोजन में दाल-चावल, मीठी खिचड़ी, उपमा आदि उपलब्ध करवाई जाती थी।


इस पर भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष डॉ. सतीश पूनियां ने कहा है, ‘‘अच्छी बात है गरीबों को भोजन मिलना चाहिए, लेकिन इस बात का तो कोई तार्किक जवाब दे कि आपने अन्नपूर्णा का नाम बदलने के लिए पौने दो साल क्यों लगाए? यानी पौने दो साल से मुख्यमंत्री को गरीबों की, भूखों की परवाह ही नहीं थी। एकदम से ऐसा क्या उनको बुद्ध का ज्ञान प्राप्त हुआ?’’ उन्होंने यह भी कहा,‘‘ पौने दो साल तक इस योजना को ठण्डे बस्ते में क्यों रखा? बहुत सारी योजनाएं अभी लंबित हैं। आयुष्मान भारत योजना और भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना के बारे में मुख्यमंत्री बोलते नहीं हैं। उन्होंने अन्नपूर्णा को इंदिरा रसोई कर दिया, मुझे नाम बदलने पर कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन नीयत पर आपत्ति है। उम्मीद है कि सरकार व्यवस्थित तरीके से गरीबों को भोजन उपलब्ध कराएगी।’’
इसके अलावा कांग्रेस सरकार द्वारा भाजपा शासन की भामाशाह योजना, भामाशाह स्वास्थ्य बीमा, जल स्वावलम्बन, न्याय आपके द्वार, राजश्री योजना, अन्नपूर्णा भंडार, स्किल व रोजगार, आदर्श विद्यालय, राजस्थान सम्पर्क, जनकल्याण शिविर, ग्रामीण गौरव पथ आदि योजनाओं को या तो बंद कर दिया गया या फिर इनके नाम बदलकर गांधी परिवार के नाम से दोबारा शुरू किया गया है। इन पर ज्यादातर लोग यह कहते हैं कि गहलोत गांधी परिवार के प्रति निष्ठा दिखाने के लिए राज्य के लोगों का बहुत नुकसान कर रहे हैं। इसकी कीमत उन्हें चुकानी ही पड़ेगी।