जाकिर की जहरीली साजिश

    दिनांक 01-सितंबर-2020   
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भगोड़ा जाकिर नाइक भारत को इस्लामिक राष्ट्र बनाने के सपने देख रहा है। अपने मंसूबे को अंजाम देने के लिए बाकायदा उसने एक खाका तैयार किया है। वह भारत के मुसलमानों से एक पार्टी बनाने को कह रहा है, जो सिर्फ मुसलमानों के लिए हो और दलितों को इससे जोड़ने की भी अपील कर रहा है। यही नहीं, जहां मुस्लिम आबादी कम है, वहां से उन्हें मुस्लिम बहुल इलाकों में जाने को कह रहा है। यह एक प्रकार से इस्लामिक घेराबंदी है
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भगोड़े जाकिर नाइक के साथ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह


भगोड़ा जाकिर नाइक मलेशिया में बैठकर जिहादी मानसिकता को बढ़ावा दे रहा है। उसका उद्देश्य खतरनाक है। इस बार उसने भीम-मीम का खतरनाक खाका प्रस्तुत किया है। वह चाहता है कि मुस्लिम लीग की तरह भारत में मुसलमानों की एक अलग पार्टी हो, जिसका गठजोड़ वंचित समाज से हो। देश में तमाम कथित सेकुलर दल पहले से ही मुसलमान-दलित गठजोड़ के प्रयास में जुटे हुए हैं। जाकिर के लिए यह सपना सुखद हो सकता है, लेकिन शायद वह किसी गलतफहमी का शिकार है। उसे यह नहीं मालूम कि सनातन धर्म की डोर से बंधा हिंदू समाज अब जाग्रत हो गया है और राष्ट्रवाद की राह पर अग्रसर है। वास्तव में भगोड़े जाकिर की नई योजना इसी बौखलाहट की उपज है। फिर भी इस जहरीले जिहादी के इरादों को कमतर करके आंकना गलत होगा। पिछले कुछ दिनों के घटनाक्रम इस ओर संकेत करते हैं कि जिहादी ताकतें किसी भी तरह लगातार शक्तिशाली होते भारत को अंदर ही अंदर नुकसान पहुंचाने की कोशिशें तेज कर रही हैं। इन घटनाओं का केंद्र बिंदु यही जाकिर नाइक है।
जाकिर नाइक ने एक यूट्यूब वीडियो जारी किया है, जिसमें उसने हिंदुस्थान को कमजोर करने की अपनी जहरीली सोच जाहिर की है। दरअसल, कुवैत में रहने वाले एक भारतीय ने भगोड़े जाकिर से एक सवाल पूछा था, जिसका वह जवाब दे रहा था। उसी क्रम में जाकिर की यह सोच सामने आई। जिहादी मानसिकता वाले ऐसे लोग ही जाकिर नाइक जैसे जहरीली सोच वाले कट्टरपंथियों से मार्गदर्शन मांगते हैं और उसी पर चलते हैं। इसी महीने 21 अगस्त को आईएसआईएस का एक आतंकी आईईडी के साथ पकड़ा गया। उसका मंसूबा दिल्ली में तबाही मचाने का था। अबू युसूफ उर्फ मुस्तकीम खान बलरामपुर का रहने वाला है और वह जाकिर के ‘उपदेश’ को सुनकर ही आईएसआईएस में शामिल होने के लिए प्रेरित हुआ। जाकिर अपनी जहरीली विचारधारा से बांग्लादेश से लेकर लंदन तक मुसलमानों को प्रभावित कर रहा है। चेन्नई के एक व्यापारी ने पुलिस में शिकायद दी है कि बांग्लादेश के कट्टरपंथी मुसलमानों ने लंदन में उसकी बेटी को अगवा कर लिया है। इस करतूत में बांग्लादेश के सांसद का बेटा भी शामिल है।


 ऐसे बनेंगे शरिया गांव
जाकिर नाइक हिजरत की अपील करता है। वह मुसलमानों को एक जगह इकट्ठा होकर रहने की सीख देता है।  असल में उसकी इस तरह की अपील के क्या परिणाम हो सकते हैं, यह हमें पश्चिम बंगाल में मुर्शिदाबाद जिले के अद्वैतनगर गांव में जाकर देखना होगा। यह देश का पहला ऐसा गांव है, जहां भारत का कानून और संविधान लागू नहीं है। यहां शरिया कानून चलता है। इसी गांव में मौलवियों ने फतवा जारी किया है कि गांव का व्यक्ति न तो टीवी देख सकता है और न ही संगीत सुन सकता है। कैरम जैसे खेल पर भी पाबंदी लगा दी गई है। फतवे का उल्लंघन करने वाले व्यक्ति को शरिया कानून के तहत सजा दी जाती है। इस शरिया गांव के बारे में तृणमूल के नेता कहते हैं, ‘इसमें गलत क्या है? गानों और कैरम से हमारी युवा पीढ़ी बर्बाद हो रही है!’ ममता बनर्जी के राज में सूबे का इस्लामीकरण हो चुका है। यहां दुर्गा पूजा का आयोजन मस्जिदों से इजाजत लेकर किया जाता है।


राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी (एनआईए) इस मामले की जांच कर रही है। महत्वपूर्ण बात यह है कि इस पूरे प्रकरण का मास्टरमाइंड भी जाकिर नाइक ही है। इस व्यापारी की बेटी को पहले तो जाकिर नाइक के वीडियो दिखाकर कट्टरपंथी बनाने की कोशिश की गई, फिर उसी के इशारे पर उसे अगवा किया गया। भगोड़ा जाकिर कांग्रेस और कांग्रेसी सोच वाले मताम दलों का चहेता है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के मुखिया शरद पवार से लेकर कांग्रेस के राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह तक जाकिर नाइक के मुरीद रहे हैं और उसके साथ मंच साझा करते रहे हैं।
केरल के कट्टरपंथी दलों में तो जाकिर का गहरा दखल है। देश में सिर उठा रहे पीएफआई की विचारधारा भी जाकिर से ही प्रेरित है। फिलहाल तो जाकिर ने जो कहा है, हमें उस पर ही गौर करना चाहिए, क्योंकि वह मसूद अजहर जैसे आतंकियों से भी कहीं अधिक खतरनाक और जहरीला है। जाकिर अपनी इस जहरीली सोच की बदौलत भारत के मुसलमानों को लामबंद करना चाहता है। उसकी यह सोच आतंकवादियों से भी दो कदम आगे है। जाकिर कहता है, ‘आपको पता है, दस साल पुराने सरकारी आंकड़ों के मुताबिक भारत में हमारी आबादी 14.2 प्रतिशत थी। कुछ साल पहले बताया गया कि हम 20 करोड़ हैं। इसमें असम और देश के कई हिस्सों में रहने वाले मुसलमानों को शामिल नहीं किया गया है।’ जाकिर के अनुसार, भारत में मुसलमानों की संख्या इस समय 25-30 करोड़ है यानी इंडोनेशिया से भी अधिक। कुवैत में रह रहे भारतीय ने उससे पूछा था कि भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार के कथित मुस्लिम दमन नीति से कैसे निपटा जाए? इस पर जाकिर ने कहा, ‘मुसलमानों को अपनी अलग पार्टी बनानी चाहिए, जो केवल मुसलमानों के लिए हो। इस पार्टी को दलितों से हाथ मिलाना चाहिए।’ इस जिहादी का दावा था कि दलित हिंदू नहीं हैं। उसने ये भी कहा कि अगर मुसलमान दैनिक जीवन में मजहबी इबादत और परंपराओं का पालन नहीं कर रहे हैं तो उन्हें हिजरत (मुस्लिम बहुल देश की ओर जाना) करनी चाहिए है। इसके पीछे जाकिर की सोच है कि अगर कहीं मुसलमानों की संख्या कम है, तो उन्हें वहां से मुस्लिम बहुल राज्यों, बस्तियों और शहरों का रुख करना चाहिए। यह एक तरह की मजहबी मोर्चाबंदी की तैयारी है, जहां केवल और केवल मुसलमान ही हों। ऐसे इलाकों के रूप में उसने केरल, हैदराबाद और मुंबई का नाम लिया। इसी से जाकिर नाइक के मंसूबे को समझा जा सकता है।

2014 तक संप्रग सरकार के कार्यकाल में जाकिर को पूरा प्रश्रय मिला। कांग्रेस के नेता उसके खिलाफ तमाम खुफिया रिपोर्ट को दबा कर बैठ गए। जब भाजपा की अगुआई वाली राजग सरकार केंद्र की सत्ता में आई तो जाकिर के विरुद्ध जांच शुरू हुई। इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन के विरुद्ध जांच में एनआईए ने पाया कि जाकिर आईएसआईएस के संपर्क में था। उसने केरल में बड़े पैमाने पर युवाओं का कन्वर्जन कराया और इनमें से 24 को आईएसआईएस में शामिल होने के लिए अफगानिस्तान भेजा।


अगर देश में मुसलमानों के ऐसे पॉकेट बन जाएंगे तो समझ सकते हैं कि देश में प्रतिदिन बेंगलुरु और दिल्ली जैसे दंगे होंगे। वैसे भी जहां मुसलमान बहुसंख्यक हो जाते हैं, वहां अन्य धर्म-पंथ के लोगों से जीने का अधिकार छीन लिया जाता है।

‘शांति प्रिय’ जाकिर का विद्रूप चेहरा
18 अक्तूबर, 1965 को जाकिर का जन्म मुंबई में हुआ था। उसने एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी की, लेकिन चिकित्सीय पेशे में नहीं आया। उसने मुंबई में इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन और आईआरएस जैसा संगठन खड़ा किया। इन संगठनों के नाम पर उसने विदेशों से भरपूर धन जुटाया और इनकी आड़ में अपनी विध्वंसकारी गतिविधियां संचालित करने लगा। अभी स्थिति यह है कि जाकिर नाइक पर ब्रिटेन, कनाडा समेत नौ देशों ने पाबंदी लगा रखी है। 2016 में बांग्लादेश की राजधानी ढाका में आतंकी हमला हुआ था, जिसमें 22 लोग मारे गए थे। इस आतंकी विस्फोट के लिए जिम्मेदार आतंकी ने बताया था कि वह जाकिर नाइक के ‘उपदेशों’ से प्रभावित था। इसके बाद दुबई से प्रसारित होने वाले नाइक के पीस टीवी पर पाबंदी लगा दी गई। इससे पहले 2014 तक भारत में जाकिर को संप्रग सरकार के दौरान पूरा प्रश्रय मिला। कांग्रेस के नेता उसके खिलाफ मिलने वाली तमाम खुफिया रिपोर्ट को दबा कर बैठ गए। जब भाजपा की अगुआई वाली राजग सरकार केंद्र की सत्ता में आई तो एक बार फिर जाकिर के विरुद्ध जांच शुरू हुई। इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन के विरुद्ध जांच में एनआईए ने पाया कि जाकिर के संबंध कुख्यात आतंकी संगठन आईएसआईएस के साथ थे। लिहाजा, उसकी संस्था पर पांच साल के लिए प्रतिबंध लगा दिया गया। जाकिर नाइक ने केरल में बड़े पैमाने पर युवाओं का कन्वर्जन कराया और इनमें से 24 को आईएसआईएस में शामिल होने के लिए अफगानिस्तान भेजा। अपने खिलाफ हो रही जांच से जाकिर सतर्क हो चुका था। उसे यह अहसास हो गया था कि भारत में रहना अब उसके लिए खतरे से खाली नहीं है, इसलिए वह सऊदी अरब भाग गया और फिर कभी लौटा ही नहीं। 2017 से वह मलेशिया में रह रहा है। वहां की तत्कालीन सरकार ने उसे स्थायी निवास की इजाजत दी थी, लेकिन सत्ता परिवर्तन के बाद अब वहां की सरकार को अहसास हो रहा है कि जाकिर नाइक देश के लिए बोझ बन गया है।

गहरी हैं जाकिर की जड़ें
  • 2009 में न्यूयॉर्क में एक सब-वे को बम से उड़ाने की साजिश रचने वाला नजीबुल्ला जाजी जाकिर नाइक के ‘उपदेशों’ से प्रभावित था।

  • 2007 में स्कॉटलैंड के ग्लासगो हवाईअड्डे पर बम से हमला करने वाला कफील अहमद जाकिर नाइक के विचारों से प्रभावित था।

  •  2006 में मुंबई की लोकल ट्रेनों में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों का आरोपी राहिल शेख जाकिर नाइक के उपदेश सुनता था।

  • आईएसआईएस के हैदराबाद मॉड्यूल का सरगना इब्राहिम यजदानी भी जाकिर नाइक से प्रभावित था।

जिहादी से कांग्रेस का प्रेम
  • 2012: दिग्विजय सिंह जाकिर नाइक के साथ एक कार्यक्रम में शामिल हुए। इसी कार्यक्रम में उन्होंने भगोड़े जाकिर को ‘मैसेंजर आॅफ पीस’ यानी शांति का दूत बताया था।

  • 2016: उत्तर प्रदेश में तत्कालीन सपा सरकार में मंत्री रहमान खान ने जाकिर नाइक को मशहूर इस्लामिक स्कॉलर बताया।

  •  2017: झारखंड के विधायक इरफान अंसारी ने जाकिर नाइक का खुलकर समर्थन किया।

जाकिर के जहरीले बोल
  • इस्लाम सभी धर्मों से ऊपर है। इस्लामिक देशों में गैर-मुस्लिमों के लिए धार्मिक स्थल बनाने की इजाजत नहीं दी जानी।

  • संभोग के समय कंडोम का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। यह एक इनसान की हत्या के समान है।

  •  मुसलमानों को अपनी महिला गुलामों के साथ संभोग का पूरा अधिकार है। पति द्वारा पत्नी को पीटना भी गलत नहीं है।

  •  मुस्लिम लड़कियों को स्कूलों में नहीं भेजना चाहिए। वे अपना कौमार्य खो देती हैं। ऐसे स्कूलों को बंद कर देना चाहिए।

  •  इस्लाम छोड़ने वालों की सजा मौत होनी चाहिए। विवाहेत्तर संबंधों में भी शरिया के मुताबिक पत्थर मारकर मौत की सजा दी जानी चाहिए।

  • ओसामा बिन लादेन और तालिबान गलत नहीं हैं। वे मुसलिम विरोधियों से लड़ रहे हैं।