वैदिक और स्मार्ट सिटी के सामंजस्य से बनेगी नव्य अयोध्या, खर्च होंगे 2 हजार करोड़ रुपए

    दिनांक 10-सितंबर-2020   
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उत्तर प्रदेश सरकार अयोध्या के कायाकल्प पर 2 हजार करोड़ रुपए से अधिक की धनराशि खर्च कर रही है। भव्य श्रीराम मंदिर के निर्माण के साथ-साथ दुनिया की सबसे ऊंची भगवान श्रीराम की प्रतिमा अयोध्या में लगाई जा रही है। पर्यटन विभाग की ओर से 258.12 करोड़ रुपये की लागत से विकास कार्य कराए जा रहे हैं। इनमें से कुछ कार्य पूरे भी हो चुके हैं।
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उत्तर प्रदेश सरकार अयोध्या के कायाकल्प पर 2 हजार करोड़ रुपए से अधिक की धनराशि खर्च कर रही है। भव्य श्रीराम मंदिर के निर्माण के साथ-साथ दुनिया की सबसे ऊंची भगवान श्रीराम की प्रतिमा अयोध्या में लगाई जा रही है। अयोध्या की पूरी दुनिया में एक नई पहचान स्थापित होगी। पर्यटन विभाग की ओर से 258.12 करोड़ रुपये की लागत से विकास कार्य कराए जा रहे हैं। इनमें से कुछ कार्य पूरे भी हो चुके हैं। अयोध्या के सभी प्रमुख प्रवेश मार्गों पर थीम बेस्ड गेट का निर्माण, परिक्रमा पथों का विकास, कुन्डों का जीर्णोद्धार, पर्यटकों की सुविधा का निर्माण,  पार्किंग, यात्री सुविधाओं और फूडकोर्ट के निर्माण आदि के लिए केंद्र सरकार को 200 करोड़ रुपए का प्रस्ताव भी विभाग की ओर से शीघ्र ही भेजा जा रहा है।

अयोध्या में भगवान श्रीराम के मंदिर निर्माण के साथ ही पूरी अयोध्या के विकास की योजना मूर्तरूप लेने जा रही है। वैदिक और स्मार्ट सिटी का समन्वय स्थापित करते हुए नव्य अयोध्या का निर्माण किया जा रहा है। इसके लिए उत्तर प्रदेश आवास-विकास परिषद ने 639 एकड़ भूमि चिन्हित की है। अयोध्या में राम की पैड़ी के सौंदर्यीकरण, सिविल कार्य, बहुउद्देशीय हाल, गुप्तार घाट, लक्ष्मण किला घाट, रामकथा का विस्तारीकरण एवं राजा दशरथ की समाधि के जीर्णोद्धार का कार्य  पूरा हो चुका है। पंच कोसी परिक्रमा करने वालों के लिए विश्राम स्थलों, मल्टी लेवल कार पार्किंग, बस स्टैंड,  क्ववीन-हो मेमोरियल का सौंदर्यीकरण और यात्री निवास के उच्चीकरण का कार्य प्रगति पर है।

आवास एवं शहरी नियोजन विभाग, लोक निर्माण विभाग, नगर विकास, सिंचाई एवं जल शक्ति, ऊर्जा एवं वैकल्पिक ऊर्जा विभाग की ओर से भी अयोध्या के विकास के लिए कार्य किया जा रहा है। इन सब कार्यों को जोड़कर अयोध्या में केंद्र और प्रदेश सरकार 2 हजार करोड़ रुपये से अधिक खर्च करने जा रही है। 2018 में नई पर्यटन नीति आने के बाद अयोध्या के लिए 20 प्रस्ताव सरकार को मिल चुके हैं। इसमें होटल, रिजार्ट और 3 हेरीटेज भी शामिल हैं।

 
अयोध्या में राम की पैड़ी के सौंदर्यीकरण, सिविल कार्य, बहुउद्देशीय हाल, गुप्तार घाट, लक्ष्मण किला घाट, रामकथा का विस्तारीकरण एवं राजा दशरथ की समाधि के जीर्णोद्धार का कार्य  पूरा हो चुका है। पंच कोसी परिक्रमा करने वालों के लिए विश्राम स्थलों, मल्टी लेवल कार पार्किंग, बस स्टैंड,  क्ववीन-हो मेमोरियल का सौंदर्यीकरण और यात्री निवास के उच्चीकरण का कार्य प्रगति पर है।

गत दिनों अयोध्या मंडल के विकास कार्यों की समीक्षा करते उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा, “ अयोध्या को सोलर सिटी के रूप में विकसित किए जाने की आवश्यकता है। इससे जहां एक ओर पर्यावरण संरक्षित व संतुलित रहेगा, वहीं दूसरी ओर इस पवित्र नगरी को एक नई पहचान मिलेगी। पूरे विश्व में अयोध्या भगवान श्रीराम की नगरी के रूप में जानी जाती है। अयोध्या धाम का पौराणिक महत्व है, इसलिए इसकी पुरातन संस्कृति को अक्षुण्ण रखते हुए अयोध्या को विकसित किया जाए। निर्माण कार्यों में स्थानीय स्थापत्य की झलक दिखनी चाहिए। अयोध्या के सभी घाटों को संरक्षित करते हुए इनका सौन्दर्यीकरण किया जाय। गुप्तार घाट से नया घाट तक रिवर फ्रण्ट विकसित किया जाए। रिवर फ्रण्ट बन जाने से अयोध्या में एक नवीन पर्यटन आकर्षण स्थल विकसित होगा। पंचकोसी, चौदह कोसी तथा चौरासी कोसी परिक्रमा मार्गों को सुगमतापूर्वक विकसित किया जाए। परिक्रमा मार्ग अयोध्या मंडल के हर जिले से गुजरेंगे। इनमें जो पौराणिक और ऐतिहासिक स्थल हैं, उनका भी विकास किया जाएगा। पर्यटन विभाग ऐसे स्थलों को पहचान कर उनके विकास का प्रस्ताव शासन को भेजे।”

योगी आदित्यनाथ ने कहा, “अयोध्या के सभी मार्गों का सुदृढ़ीकरण, चौड़ीकरण एवं मरम्मत, जो भी आवश्यक हो,  उसे प्राथमिकता के आधार पर किया जाए। राम-जानकी मार्ग का निर्माण पूरी गुणवत्ता के साथ कराया जाए। इस परियोजना के पूरा हो जाने पर पूर्वांचल के अनेक जनपदों में विकास की रफ्तार तेज होगी। शासन स्तर पर धनराशि की कोई कमी नहीं होगी। जनप्रतिनिधि स्थानीय प्रशासन के जरिए प्रस्ताव भेजें। इन प्रस्तावों पर अधिकारी तय समय में फैसला लें। अगर स्थानीय स्तर पर समय से फैसला नहीं लिया जाता तो इसे संबंधित विभाग के प्रमुख सचिव और अपर मुख्य सचिव को भेजें। वहां भी अगर देरी हो रही है तो मुख्यमंत्री कार्यालय को अवगत कराएं।”