योगी की कार्रवाई: दो आई.पी.एस. निलंबित, एक की सम्पत्ति की होगी जांच, दूसरे के खिलाफ एफआईआर

    दिनांक 11-सितंबर-2020   
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भ्रष्टाचार पर चाबुक चलाने वाली योगी आदित्यनाथ की यह पहली सरकार है, जिसने आई.ए.एस एवं आई.पी.एस अधिकारियों के खिलाफ ऐतिहासिक कार्रवाई की है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गत दिनों दो आई.पी.एस. अफसरों को निलंबित कर दिया। इनमें से एक आई.पी.एस. अफसर के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप में एफआईआर दर्ज कराई एवं दूसरे आई.पी.एस. की संपत्ति की जांच के आदेश दिए।

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भ्रष्टाचार पर चाबुक चलाने वाली योगी आदित्यनाथ की यह पहली सरकार है, जिसने आई.ए.एस एवं आई.पी.एस अधिकारियों के खिलाफ ऐतिहासिक कार्रवाई की है। अभी तक इन अधिकारियों को दंड स्वरूप या तो गैर महत्वपूर्ण पद पर भेज दिया जाता था या कुछ समय के लिए निलंबित कर दिया जाता था। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गत दिनों दो आई.पी.एस. अफसरों को निलंबित कर दिया। इनमें से एक आई.पी.एस. अफसर के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप में एफआईआर दर्ज कराई एवं दूसरे आई.पी.एस. की संपत्ति की जांच के आदेश दिए। इसके पूर्व, आई.ए.एस अफसरों के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की जा चुकी है। 200 अधिकारियों- कर्मचारियों को आवश्यक सेवानिवृत्ति एवं 400 को सख्त दंड दिया गया है।

 
गौरतलब है कि गत दिनों प्रयागराज जिले के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अभिषेक दीक्षित को निलम्बित किया गया। इसके साथ ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आदेश दिया कि दीक्षित की संपत्ति की भी जांच की जाए। उधर, भ्रष्टाचार के मामले में प्राथमिक साक्ष्य मिलने के बाद महोबा के पुलिस अधीक्षक मणि लाल पाटीदार को निलम्बित किया गया। मुख्यमंत्री के आदेश पर मणि लाल पाटीदार के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। भ्रष्टाचार के मामले में कुछ माह पूर्व, उन्नाव के जिलाधिकारी देवेन्द्र पाण्डेय को निलंबित किया गया था। उनके खिलाफ जांच चल रही है। गत वर्ष महराजगंज के जिलाधिकारी अमर नाथ उपाध्याय को निराश्रित गो-वंश के मामले में निलंबित किया गया था।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राजस्व विभाग की सख्ती से स्क्रीनिंग कराई जिसकी वजह से राजस्व विभाग से 36 कर्मचारी रिटायर किये गए। संस्थागत वित्त, वाणिज्य कर विभाग से 16 कर्मचारी रिटायर किये गए।
 
ज्ञात हो कि योगी आदित्यनाथ ने मुख्यमंत्री बनने के बाद, भ्रष्ट अधिकारियों और कर्मचारियों पर नकेल कसने की दिशा में लगातार कार्य किया। प्रदेश के अन्दर नकारे एवं भ्रष्ट अधिकारियों– कर्मचारियों की सूची बनवाई। विभिन्न विभागों के करीब 200 अधिकारियों–कर्मचारियों को आवश्यक सेवानिवृत्ति देने का फैसला लिया गया। ऐसे नकारे अफसर जो काम को लटकाए रखते हैं या फिर  जिनके खिलाफ भ्रष्टाचार के कई मामले पाए गए हैं। उन सभी को रिटायर करने का फैसला लिया गया। इनमें जो भी अधिकारी संघ लोक सेवा आयोग से चयनित हुए थे, उनकी सेवा समाप्त करने का प्रस्ताव केंद्र को भेजा गया।

 
भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के लिए योगी आदित्यनाथ ने दो प्रकार की कार्रवाई की। पहली कार्रवाई में करीब 200 अधिकारियों–कर्मचारियों की आवश्यक रूप से सेवा समाप्त की गई। दूसरे प्रकार की कार्रवाई में करीब 400 कर्मचारियों को सख्त दंड देने का निर्णय लिया गया। यह कार्रवाई आगे भी जारी रहने वाली है।
 

उत्तर प्रदेश सरकार के प्रवक्ता एवं ऊर्जा मंत्री श्रीकान्त शर्मा ने बताया, “अभी तक के इतिहास में यह पहली सरकार है जिसने, भ्रष्टाचार में लिप्त पाए जाने वाले 600 से ज्यादा अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ इस प्रकार की कठोर कार्रवाई की है। कुछ समय पहले एक समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बेईमान और भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने का आदेश दिया था। मुख्यमंत्री ने कहा था कि भ्रष्ट अधिकारियों और कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से आवश्यक सेवानिवृत्ति दे दी जाए। इसके साथ ही जिन लोगों की गतिविधियां संदिग्ध हैं, उनकी भी सूची तैयार की जाए। इतना ही नहीं जिन अधिकारियों के खिलाफ शिकायतें पहले से दर्ज हैं, उनकी भी सूची तैयार की जाए। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के इस आदेश के बाद बहुत ही बारीकी से स्क्रीनिंग कराई गई, जिसमें प्रथम चरण में 600 अधिकारियों–कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई।” 

 
भ्रष्टाचार एवं अनियमितता के मामले में 400 से ज्यादा कर्मचारियों को कड़ा दंड दिया गया, जिन कर्मचारियों को कड़ा दंड दिया गया, उनको अब कोई भी प्रोन्नति नहीं दी जायेगी एवं वेतन वृद्धि का लाभ नहीं दिया जाएगा। दंड पाने वाले कर्मचारियों को किसी गैर-महत्वपूर्ण स्थान पर स्थानांतरित कर दिया जाएगा। निचले स्तर पर भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए जहां-जहां से कर्मचारियों को रिटायर किया गया, उसमे गृह विभाग सबसे प्रथम नंबर पर है। गृह विभाग से 51 कर्मचारियों को रिटायर कर दिया गया। दूसरे नंबर पर राजस्व विभाग है, जहां से 36 कर्मचारियों को रिटायर कर दिया गया। राजस्व विभाग के कर्मचारियों की काफी शिकायत थी। दरअसल में आम जनता गृह विभाग से सम्बंधित कर्मचारियों से त्रस्त थी और उसके बाद तहसील स्तर पर अगर कोई भी कार्य है तो आम जनता को कई बार तहसील का चक्कर लगाना पड़ रहा था। इसीलिये मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राजस्व विभाग की सख्ती से स्क्रीनिंग कराई जिसकी वजह से राजस्व विभाग से 36 कर्मचारी रिटायर किये गए। संस्थागत वित्त, वाणिज्य कर विभाग से 16 कर्मचारी रिटायर किये गए।

मनोरंजन कर विभाग से भी 16 कर्मचारी को आवश्यक अवकाश दे दिया गया। वन विभाग से 11 कर्मचारियों को रिटायर किया गया। उर्जा विभाग के 169 कर्मचारियों को सख्त दंड दिया गया। परिवहन विभाग के 37 कर्मचारियों को सख्त दंड दिया गया। इसी प्रकार बेसिक शिक्षा विभाग के 26 कर्मचारी, पंचायती राज विभाग के 25 कर्मचारी, लोक निर्माण विभाग के 18 कर्मचारी, ग्राम विकास विभाग के 15 कर्मचारी, खाद्य रसद के 15 कर्मचारी, दुग्ध  विकास के 14 कर्मचारी, चीनी उद्योग के 11 कर्मचारी, गन्ना विकास एवं बाल विकास के 11-11 कर्मचारियों को सख्त दंड दिया गया।