आम आदमी की ताकत झलक रही है हिंदी की तकनीकी तरक्की में

    दिनांक 14-सितंबर-2020
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बालेन्दु शर्मा दाधीच

हिंदी के प्रयोग को अपनाने और आगे बढ़ाने में आम हिंदीभाषी का महत्वपूर्ण योगदान है। अब चूँकि हिंदी में टेक्स्ट इनपुट (टंकण) करना कोई मुश्किल काम नहीं रह गया है, इसलिए लोगों की अभिव्यक्ति स्वतःस्फूर्त ढंग से सामने आ रही है। कीबोर्ड का प्रयोग करें या फिर बोलकर टाइप करें, माध्यम आपके पास है। अब बस अपनी रचनात्मकता दिखाने का अवसर है और अवसर है संवाद के धरातल पर अपनी उपस्थिति दर्ज करने का।

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हिंदी के प्रयोग को अपनाने और आगे बढ़ाने में आम हिंदीभाषी का महत्वपूर्ण योगदान है। अब चूँकि हिंदी में टेक्स्ट इनपुट (टंकण) करना कोई मुश्किल काम नहीं रह गया है, इसलिए लोगों की अभिव्यक्ति स्वतःस्फूर्त ढंग से सामने आ रही है। कीबोर्ड का प्रयोग करें या फिर बोलकर टाइप करें, माध्यम आपके पास है। अब बस अपनी रचनात्मकता दिखाने का अवसर है और अवसर है संवाद के धरातल पर अपनी उपस्थिति दर्ज करने का।

तकनीकी विश्व में हिंदी की बहार दिखाई देती है- प्रयोक्ता जनित सामग्री (यूज़र जेनरेटेड कन्टेन्ट), सोशल नेटवर्किंग और ब्लॉगिंग में। इनमें से पहला माध्यम चढ़ाव पर तो दूसरे में ठहराव है। जिस अंदाज में हिंदी विश्व ने फेसबुक को अपनाया है, वह अद्भुत है। दिल्ली और मुंबई जैसे महानगरों को भूल जाइए, लखनऊ, पटना और जयपुर जैसी राजधानियों को भी भूल जाइए, छोटे-छोटे गांवों और कस्बों तक के युवा, बुजुर्ग, बच्चे फेसबुक पर आ जमे हैं और खूब सारी बातें कर रहे हैं- हिंदी में। व्हाट्सऐप ने पिछले कुछ वर्षों में तेजी से लोकप्रियता हासिल की है। सुखद है कि वहां भी हिंदी को लेकर कोई बाधा नहीं है।



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शब्दनगरी, मूषक, प्रतिलिपि, डेली हंट, शेयर चैट आदि हिंदी में विषयवस्तु तथा संवाद आधारित सफल प्रयोगों के अच्छे उदाहरण हैं। जितने हिंदी प्रेमी प्रयोक्ता इस तरह के मंचों के साथ प्रदाता या ग्रहणकर्ता की भूमिका में जुड़ेंगे हिंदी में विज्ञान, तकनीक और नवोन्मेष आधारित पारिस्थितिकी के विकास में उतनी ही मदद मिलेगी।

एक बड़ा मंच जो पिछले पाँच-छह साल में मजबूती के साथ उभरा है, वह है वीडियो का। हालाँकि यूँ तो कई वीडियो शेयरिंग प्लेटफॉर्म मौजूद हैं लेकिन यूट्यूब इस क्षेत्र में निर्विवाद रूप से अग्रणी मंच बन चुका है जहाँ पर हजारों लोग हिंदी में विभिन्न विषयों पर वीडियो बनाकर पोस्ट कर रहे हैं। इन वीडियो को मोबाइल फोन पर भी बड़े आराम से और प्रयोक्ता की सुविधा के समय पर देखा जा सकता है, इसलिए यह मंच तेजी से लोकप्रिय हुआ है। इसकी लोकप्रियता में एक और योगदान मिला है सस्ते ब्रॉडबैंड तथा डेटा प्लानों की वजह से जिन्होंने इंटरनेट की सुविधा को गांव-गांव तक पहुँचा दिया है।

थोड़े उतार-चढ़ाव के बावजूद सोशल नेटवर्कों की लोकप्रियता बरकरार है और इनकी हिंदी अपने आप में विलक्षण है-हिंदी, अंग्रेजी, देशज, तकनीकी, चित्रात्मक और अनौचपारिक शब्दावली से भरी हुई। लेकिन है बहुत दिलचस्प। आप चाहें तो इस हिंदी का छिद्रान्वेषण कर उसकी भाषायी सीमाओं, त्रुटियों और विसंगतियों पर थीसिस लिख सकते हैं, लेकिन यदि आप हिंदी के प्रसार में दिलचस्पी रखते हैं तो यह तथ्य अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है कि वह है तो हिंदी ही। शायद हिंदी की एक अलग खुशबू। कौन जाने आगे चलकर सोशल नेटवर्किंग और ब्लॉगिंग से उपजी शब्दावली, वाक्य-विन्यास और भाषिक प्रवृत्तियाँ मुख्यधारा की हिंदी पर भी कोई न कोई असर डालें।


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पिछले आठ-दस साल में यदि तकनीकी दुनिया में हिंदी से जुड़ी कोई क्रांति दिखाई देती है तो वह है सोशल नेटवर्किंग की क्रांति। चूंकि संदेशों का आदान-प्रदान नेटवर्किंग की मूलभूत अनिवार्यता और पहचान है, इसलिए वह एक से दो, दो से चार लोगों को आपस में संपर्क करने के लिए प्रेरित कर रही है। और संदेश जब तक अपनी भाषा में न हों, अपने आसपास के परिवेश से जुड़े हुए न हों तब तक न तो बात कहने वाले को तसल्ली देते हैं और न ही उसे सुनने वाले को। अंग्रेजी में संदेश भेजकर देखिए। अगर आपकी मातृभाषा हिंदी है तो आपको एक कसक सी महसूस होगी। लगेगा कि अभिव्यक्ति में वह बात नहीं आई। लेकिन उसी को हिंदी, बंगला, गुजराती या तमिल में भेजकर देखिए तो सुकून महसूस होगा। अपनी मातृभाषा मां के समान है, जिसके साथ कोई संकोच, कोई परदा, कोई औपचारिकता और कोई आडम्बर करने की जरूरत नहीं है। जैसा सोचते हैं, वैसा लिख सकते हैं। तकनीकी दुनिया में हिंदी जैसी भाषाओं को आगे बढ़ाने के लिए फेसबुक, लिंक्डइन, व्हाट्सएप्प आदि बहुत अच्छे उपकरण सिद्ध हो सकते हैं।

हिंदी में अभिव्यक्ति की उत्कंठा सिर्फ यहीं नहीं है। जहां कहीं भी संचार की आवश्यकता है, वहां-वहां यह उत्कंठा, यह आकांक्षा, यह बेचैनी दिखाई देती है। इंटरनेट के संदर्भ में मैं अपने अनुभव से कह सकता हूँ कि कन्टेन्ट या विषय वस्तु ने हिंदी का जितना प्रसार किया है, उससे कहीं अधिक उसका प्रसार संचार के तकनीकी साधनों ने किया है। आज टैबलेट और स्मार्टफोन के युग में भी हम उसी परिघटना को अनुभव कर रहे हैं जो कुछ साल से सोशल नेटवर्किंग और ब्लॉगिंग के संदर्भ में देखते आए थे।