चीन की नजर पाकिस्तानियों के मानव अंगों पर

    दिनांक 15-सितंबर-2020   
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पाकिस्तान की सेना पर चीन के तस्करों से साठगांठ कर बलूचिस्तान एवं सिंध प्रांत के युवाओं को गायब कर उनके अंग बेचने के आरोप लगते रहे हैं। ऐसे युवाओं के अंग निकाल कर लाशें सड़कों पर लावारिस फेंक दी जाती हैं। कई बार सेना की यातनाओं से मरने वाले युवाओं के अंग निकालने के बाद उनके शव परिजनों को सौंपकर सैनिक वहां तब तक डटे रहते हैं, जब तक उसे दफना न दिया जाए। सेना शवों पर खुद ही कफन लपेट कर लाती है। उसे खोलने की इजाजत किसी को नहीं होती। ऐसा इसलिए कि कहीं मानव अंग निकालने का भेद न खुल जाए।

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चीन किसी का सगा नहीं हो सकता। इसके साथ भारत का अनुभव कड़वा रहा है, पर यह अपने मित्र देश को भी नहीं छोड़ता। पाकिस्तान के शहर कराची में मानव अंगों की तस्करी करने वाले एक गिरोह का भंडा फोड़ होने से यह खुलासा हुआ है। चीन की नजर पाकिस्तानियों के किडनी, लीवर व आंखों पर है। उन्हें शीशे में उतार कर शरीर से महत्वपूर्ण अंग निकाले जा रहे हैं।

अभी तक पाकिस्तानी लड़कियों को शादी का झांसा देकर चीन की वेश्या मंडी में बेचने की घटनाएं सामने आती रही हैं।  पर अब पाकिस्तानी दलालों के माध्यम से मानव अंगों की चोरी भी शुरू हो गई है। पाकिस्तानी पुलिस ने हाल में कराची में एक ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया, जो चीन के मानव तस्करों एवं वहां के डॉक्टरों के साथ मिलकर मानव अंग निकालने के काले कारोबार में लंबे समय से लिप्त था। चीनी तस्कर पाकिस्तानी दलालों की मदद से वहां के निर्धन, मजदूरों को पहले अपने जाल में फंसाते थे। उन्हें चीन में बेहतर वेतन पर अच्छी नौकरी दिलाने का झांसा देकर वहां ले जाते थे। फिर बेहोश कर उनके मानव अंग निकाल लिए जाते थे। चीन के मानव अंगों के बाजार में एक किडनी की कीमत चार लाख, जिगर की पांच लाख एवं आंख की दो लाख रुपए है।

पाकिस्तान की सेना पर भी चीन के तस्करों से साठगांठ कर बलूचिस्तान एवं सिंध प्रांत के युवाओं को गायब कर उनके अंग बेचने के आरोप लगते रहे हैं। ऐसे युवाओं के अंग निकाल कर लाशें सड़कों या सुनसान इलाकों में लावारिस फेंक दी जाती हैं।

पाकिस्तान में निर्धनता इतनी अधिक है कि जब मजदूरों या गरीबों को अपने अंग चुराने का पता चलता है तो चीनी तस्कर उन्हें लाख,सवा लाख रुपए थमाकर शांत कर देते हैं। न्यूज 24 थिंक फर्स्ट नामक एक वेबसाइट की मानें तो कोरोना काल में पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था गर्त में चले जाने से वहां के गरीबों के सामने रोटी का संकट पैदा हो गया है। बाजार पूरी तरह पटरी पर नहीं आने से उन्हें काम नहीं मिल रहा। ऐसी स्थिति में अब वहां का मजदूर खुद ही मानव तस्करों से संपर्क कर अपने शरीर के महत्वपूर्ण अंगों का सौदा करने लगे हैं।

यही नहीं पाकिस्तान की सेना पर भी चीन के तस्करों से साठगांठ कर बलूचिस्तान एवं सिंध प्रांत के युवाओं को गायब कर उनके अंग बेचने के आरोप लगते रहे हैं। ऐसे युवाओं के अंग निकाल कर लाशें सड़कों या सुनसान इलाकों में लावारिस फेंक दी जाती हैं। यह भी आरोप है कि कई बार सेना की यातनाओं से मरने वाले युवाओं के अंग निकालने के बाद उनके शव परिजनों को सौंपकर सैनिक वहां तब तक डटे रहते हैं, जब तक उसे दफना न दिया जाए। सेना शवों पर खुद ही कफन लपेट कर लाती है। उसे खोलने की इजाजत किसी को नहीं होती। ऐसा इसलिए कि कहीं मानव अंग निकालने का भेद न खुल जाए।

बताते हैं कि पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के कई गांव ऐसे हैं, जहां के निर्धन लोगों के मानव अंगों का चीन के बाजार में सौदा हो चुका है। इस समय वे जिंदा लाश बनकर घूम रहे हैं। ऐसे लोगों को कोरोना काल में बहुत ज्यादा परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। संक्रमितों में ऐसे लोगों की संख्या अधिक है।