जहां संयम की जरूरत थी, वहां हमारे जवानों ने संयम रखा और जहां शौर्य की जरूरत थी वहां शौर्य प्रदर्शित किया

    दिनांक 16-सितंबर-2020   
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 रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को लोकसभा में एलएसी पर भारत और चीन के बीच जारी तनाव पर विस्तृत बयान दिया। इस दौरान उन्होंने कहा कि मैं सदन से यह अनुरोध करता हूं कि हमारे दिलेरों की वीरता एवं बहादुरी की प्रशंसा करने में मेरा साथ दें। क्योंकि हमारे बहादुर जवान अत्यंत मुश्किल परिस्थतियों में अथक प्रयास से समस्त देशवासियों की सुरक्षा कर रहे हैं।
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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को लोकसभा में भारत और चीन के बीच जारी तनाव पर विस्तृत बयान दिया। इस दौरान उन्होंने कहा कि मैं सदन से यह अनुरोध करता हूं कि हमारे दिलेरों की वीरता एवं बहादुरी की प्रशंसा करने में मेरा साथ दें। क्योंकि हमारे बहादुर जवान अत्यंत मुश्किल परिस्थतियों में अपने अथक प्रयास से समस्त देशवासियों की सुरक्षा कर रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि सेना के लिए विशेष अस्त्र-शस्त्र और गोला बारूद की पर्याप्त व्यवस्था की गई है। उनके रहने के लिए तमाम बेहतर सुविधाएं दी गई हैं। निश्चित ही लद्दाख में हम एक चुनौती के दौर से गुजर रहे हैं। यह समय है कि यह सदन अपने जवानों को वीरता का एहसास दिलाते हुये उन्हें संदेश भेजे कि पूरा सदन उनके साथ खड़ा है।

उन्होंने कहा कि मौजूदा स्थिति पहले से अलग है। हम सभी परिस्थितियों से निपटने के लिए तैयार हैं। जब भी देश के समक्ष कोई चुनौती आयी है, इस सदन ने सेना के प्रति पूरी प्रतिबद्धता दिखाई है। हमारे सेना के जवानों का जोश और हौसला बुलंद है। हम सीमाई इलाकों में सभी समस्या का हल शांतिपूर्ण तरीके से करने के पक्ष में हैं। हमने चीनी रक्षा मंत्री से रूस में मुलाकात की थी। इस दौरान हमने कहा कि इस मुद्दे का शांतिपूर्ण तरीके से हल करना चाहते हैं। पर सरकार भारत की संप्रभुता की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। 10 सितंबर को विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भी चीनी विदेश मंत्री वांग यी से मुलाकात की थी। इस मुलाकात में उन्होंने भी कहा था कि अगर चीन पूरी तरह से समझौते को माने तो विवादित इलाके से सेना को हटाया जा सकता है।

जहां संयम की जरूरत थी वहां हमारे जवानों ने संयम रखा और जहां शौर्य की जरूरत थी वहां शौर्य प्रदर्शित किया है। किसी को भी हमारी सीमा की सुरक्षा के प्रति हमारे प्रतिबद्धता पर सवाल नहीं उठाया जाना चाहिए।


रक्षामंत्री ने सदन को बताया कि अभी की स्थिति के अनुसार चीन ने एलएसी के अंदरूनी क्षेत्रों में बड़ी संख्या में सैनिक और गोला बारूद जमा कर रखे हैं। चीन की कार्रवाई के जवाब में हमारी सेना ने पूरी काउंटर तैनाती कर रखी है। सदन को आश्वस्त रहना चाहिए कि हमारी सेना इस चुनौती का सफलतापूर्वक सामना करेगी। उन्होंने बताया कि बीते 29-30 अगस्त की रात को पैंगोंग लेक के साउथ बैंक इलाके में चीन ने यथास्थिति बदलने का प्रयास किया था। हमारी सेना ने उनका प्रयास विफल कर दिया।

उन्होंने आगे कहा कि एलएसी को लेकर भारत और चीन की धारणा अलग-अलग है। एलएसी पर शांति बहाल की जाएगी यह बात दोनों पक्षों ने मानी है। भारत का मानना है कि द्विपक्षीय संबंधों को विकसित किया जा सकता है। साथ ही साथ ही सीमा मुद्दे पर चर्चा की जा सकती है। पर एलएसी पर किसी भी हरकत का द्विपक्षीय संबंधों पर असर पड़ेगा। 15 जून को चीन के साथ गलवान घाटी में खूनी संघर्ष में हमारे जवानों ने बलिदान दिया और चीनी पक्ष को भी भारी नुकसान पहुंचाया। जहां संयम की जरूरत थी वहां हमारे जवानों ने संयम रखा और जहां शौर्य की जरूरत थी वहां शौर्य प्रदर्शित किया है। किसी को भी हमारी सीमा की सुरक्षा के प्रति हमारे प्रतिबद्धता पर सवाल नहीं उठाया जाना चाहिए।