पाकिस्तान : बेलगाम फौज, बेबस सरकार

    दिनांक 17-सितंबर-2020   
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पाकिस्तान सरकार में फौज का दखल बढ़ता जा रहा है और इमरान खान बेबस हैं। फौज और इसके आला अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के आरोप लग रहे हैं, लेकिन उनके खिलाफ आरोपों की जांच करने की बजाए आवाज उठाने वालों को ही ठिकाने लगाया जा रहा है
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पाकिस्तानी सेना ने बलूचिस्तान, सिंध से इतने लोगों को गायब कर चुकी है।


पाकिस्तानी फौज ने पीओके, बलूचिस्तान और सिंध में अपने खिलाफ उठने वाली हर आवाज को दबाने का अभियान चला रखा है। यही वजह है कि अगवा की गई महिला अधिवक्ता इशरत द्वारा पुलिस के समक्ष दिए गए बयान को लोग सच नहीं मान रहे हैं। बकौल आरिफ अजाकिया, सेना में वर्चस्व रखने वाले पंजाबियों ने गैर-पंजाबी इलाके में भयंकर उत्पात मचा रखा है। भ्रष्टाचार, अय्याशी में आकंठ डूबे लोगों के खिलाफ आवाज उठाने वाले को को गायब कर दिया जाता है। फिर लावारिस हालत में उसका शव ही मिलता है।


पाकिस्तानी सेना बेलगाम हो गई है। उसके सामने प्रधानमंत्री इमरान खान भी बेबस हैं। सैन्य अधिकारी मनमानी कर रहे हैं और धीरे-धीरे सरकारी विभागों पर में काबिज हो रहे हैं। कोई उनकी कार्यशैली पर कोई सवाल उठाता है तो उसे गायब कर दिया जाता है या देशद्रोही साबित कर उसे छोड़ने के लिए विवश किया जाता है। अभी ऐसे ही दो उदाहरण सामने आए हैं। एक मामले में एक महिला वकील को अगवा कर चार दिन तक प्रताड़ित किया गया, जबकि दूसरे मामले में एक भ्रष्ट सैन्य अधिकारी की पोल खोलने पर पत्रकार को भारत समर्थक साबित कर देश से निकालने का षड्यंत्र रचा जा रहा है।

पाकिस्तानी सेना की पोल खोलने पर पंजाब प्रांत के ओकारा जिले के दिपालपुर कस्बे की महिला अधिवक्ता इशरत नसरीन को उनके कार्यालय से अगवा कर लिया गया। चार अपहर्ता रात में उनसे कानून सलाह लेने के बहाने आए थे। 6 बच्चों की मां इशरत का चार दिन तक कोई सुराग नहीं लगा। मां के घर नहीं लौटने पर बच्चों ने थाने में अपहरण का मामला दर्ज करा दिया। चार दिन बाद वह कस्बे के खेत में बेहोशी की हालत में मिलीं। उनके हाथ-पैर बंधे थे और मुंह में कपड़ा ठूंसा हुआ था। वह न ठीक से बोल पा रही थीं और न ही चल पा रही थीं। लंदन में रहकर पाकिस्तानी फौज की बखिया उधेड़ने वाले पाकिस्तान के आरिफ अजाकिया ने सोशल मीडिया पर घटना का एक वीडियो जाला है, जिसमें लोग इशरत से पूछ रहे हैं कि वह कौन हैं, उनकी यह हालत किसने बनाईे? बमुश्किल बता पाती हैं कि वह दिपालपुर की रहने वाली हैं और पेशे से अधिवक्ता हैं। उनका अपहरण कर लिया गया था। बाद में उन्हें कस्बे के सरकारी अस्पताल में दाखिल कराया गया।

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महिला अधिवक्ता इशरत नसरीन
 एक लापता बच्चे के लिए आवाज उठाने वाले दो भाई प्रियाल शाह और जमीन शाह ही गायब हो गए।


 पाकिस्तान के अखबार ‘द नेशन’ के 26 अगस्त के अंक में ‘एडवोकेट नसरीन नॉमिनेट एक्स हस्बैंड इन ऐबडक्शन केस’ शीर्षक से एक खबर छपी। यानी अधिवक्ता नसरीन ने अपहरण मामले में पूर्व पति का नाम लिया। इसमें दावा किया गया कि पूर्व पति अकमल से उनका संपत्ति विवाद है। उसी ने नजर फरीद, हक नवाज एवं आवा की मदद से अगवा किया और अज्ञात स्थान पर रखा, जहां उन्हें नशे की सुई देकर प्रताड़ित किया गया। लेकिन लोग इस खबर को लोग सच नहीं मानते। कारण, इशरत ने एक बड़ी जनसभा को संबोधित करते हुए फौज को देश का गद्दार कहा था। आरिफ अजाकिया ने सोशल मीडिया पर इसका वीडियो भी साझा किया है, जिसमें वह हजारों लोगों की भीड़ के सामने आक्रामक ढंग से फौज की पोल खोलती दिख रही हैं। अभी फौज ने पाक अधिक्रांत कश्मीर, बलूचिस्तान और सिंध में अपने खिलाफ उठने वाली हर आवाज को दबाने का अभियान चला रखा है। लिहाजा, लोगों का मानना है कि फौजियों की ज्यादतियों से बचने के लिए इशरत ने पुलिस के समक्ष ऐसे बयान दिए हैं। बकौल अजाकिया, सेना में वर्चस्व रखने वाले पंजाबियों ने गैर-पंजाबी इलाके में भयंकर उत्पात मचा रखा है। वे भ्रष्टाचार, अय्याशी में आकंठ डूबे हुए हैं। अगर कोई उनके खिलाफ आवाज उठाता है तो उसे गायब कर दिया जाता है। फिर लावारिस हालत में उसका शव ही मिलता है।

‘वाइस फॉर मिसिंग पर्सन्स आॅफ सिंध’ ट्वीटर हैंडल पर ऐसे 40 लोगों की तस्वीरें साझा की गई हैं जो पीओके, बलूचिस्तान और सिंध से गायब कर दिए गए। इस मामले में मानवाधिकार संगठनों एवं अंतरराष्ट्रीय समुदाय से हस्तक्षेप की मांग की गई है। सामाजिक कार्यकर्ता शाजिया चांदो ने भी सोशल मीडिया पर दो भाइयों प्रियल व जमीन शाह की तस्वीरें डाली हैं, जिसमें वे एक लापता युवक का पोस्टर लिए खड़े हैं। शाजिया लिखती हैं, ‘वो जो पूछते थे लापता लोगों का, वह खुद भी लापता हो गए।’ पाकिस्तान मानवाधिकार आयोग ने हाल में जारी सालाना रिपोर्ट में मानवाधिकारों के दमन पर चिंता जताई है। इसमें जनता एवं मीडिया की आवाज दबाने, अल्पसंख्यकों को प्रताड़ित करने, उनकी नाबालिग बच्चियों के कन्वर्जन और ईशनिंदा कानून के गलत उपयोग की बढ़ती घटनाओं पर चिंता जताई गई है। आयोग के महासचिव हरिस खालिक कहते हैं, ‘राजनीतिक विरोधियों को बहुत व्यवस्थित ढंग से निपटाया जा रहा है।’

इशरत के अलावा एक न्यूज पोर्टल चलाने वाले पत्रकार अहमद नूरानी भी सेना व सरकार के निशाने पर हैं। उन्होंने हाल में इमरान खान के वरिष्ठ सैन्य सलाहाकर एवं सेवानिवृत ले. जनरल असिम सलीम बाजवा और उनके बेटे पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है। कई कड़ियों में प्रकाशित नूरानी की रिपोर्ट में बताया गया है कि दक्षिण कमान के कमांडर रहते बाजवा एवं उनके बेटे 99 कंपनियों के मालिक बन गए। उनके पास 130 कंपनियों की फ्रंचाइजी है तथा वे 13 कमर्शियल संपत्ति तथा दो शॉपिंग सेंटर के मालिक भी हैं। उन्होंने चीन एवं पाकिस्तान सरकार को चूना लगाकर करीब 2000 करोड़ रुपये की अवैध संपत्ति इकट्ठी की है। मगर सच का पता लगाने की बजाए सेना व सरकार उन्हीं के पीछे पड़ी है।

पाकिस्तानी मीडिया उन्हें भारतीय जासूस और देशद्रोही साबित करने पर तुला है। सेना के हिमायती न्यूज चैनल एआरवाई पर नूरानी ने आरोप लगाया है कि उनके खिलाफ चैनल पर रिपोर्ट दिखाने के बाद लोगों से उन्हें धमकियां मिल रही हैं। न्यूज पोर्टल ‘जर्नलिज्म पाकिस्तान’ में छपी रिपोर्ट के अनुसार, एआरवाई ने दावा किया कि नूरानी ने दो पत्रकारों मुबशिर जैदी एवं गुल बुखारी की मदद से बाजवा के खिलाफ मनगढ़ंत खबर तैयार की है। चैनल ने उनकी विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाए हैं। नूरानी ने न्यूज चैनल की रिपोर्ट और धमकियों को लेकर ट्वीट किया है, ‘एक न्यूज चैनल ने मेरी तस्वीर चलाकर मुझे गद्दार और भारतीय एजेंट कहने की कोशिश की। इसके बाद मार देने की धमकियों का सिलसिला शुरू हो गया। पूरे पाकिस्तान में किसी सहाफी, किसी एक सहाफी तंजीम, यहां तक कि इस्लामाबाद प्रेस क्लब को तौफीक न हुई कि एक स्तर की मजम्मत ही कर दे।’ जाहिर है सोची-समझी रणनीति के तहत ही पत्रकार बिरादरी ने खामोशी अख्तियार कर रखी है। सेना की करतूतों का विरोध का मलतब है खुद ही निपट जाना।       
   (लेखक पाकिस्तान मामलों के जानकार हैं)