पाकिस्तान में अवैध बताकर हिंदुओं के मकान चुन-चुनकर ढहा दिए, मुसलमानों के घर छुए तक नहीं

    दिनांक 19-सितंबर-2020   
Total Views |
हिंदुओं के मकान चुन-चुनकर ढहा दिए गए। जिस ओर नजर डालें मकानों के मलबे के ढेर और उसपर बैठकर विलाप करते लोग नजर आएंगे। यह नजारा है पाकिस्तान के सिंध प्रांत के उमरकोट जिले के चोर इलाके का। प्रशासन ने हिदुओं के मकान अवैध बताकर ढहा दिए, जबकि मुसलमानों के मकानों को हाथ तक नहीं लगाया गया
ma_1  H x W: 0
हिंदुओं के मकान चुन-चुनकर ढहा दिए गए। जिस ओर नजर डालें मकानों के मलबे के ढेर और उसपर बैठकर विलाप्त करते लोग नजर आएंगे। यह नजारा है पाकिस्तान के सिंध प्रांत के उमरकोट जिले के चोर इलाके का। प्रशासन ने हिदुओं के मकान अवैध बताकर ढहा दिए, जबकि मुसलमानों के मकानों को हाथ तक नहीं लगाया गया।
गौरतलब है कि शुक्रवार सुबह से उमर कोट का यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। 42 सेकेंड के इस वीडियो में हर तरफ मकानों का मलबा नजर आ रहा है। इस दौरान वीडियो में एक व्यक्ति कहता सुनाई देता है कि सौ किलोमीटर के दायरे में हिंदुओं के भील एवं कोहली समुदाय के मकान चुन-चुनकर ढहा दिए गए। जबकि मुसलमानों के मकानों को छुआ तक नहीं गया। वीडियो में हिंदुओं के मकानों पर बुल्डोजर चलते दिखता है। इससे पहले मई में प्रशासन ने ऐसी ही एकतरफा कार्रवाई बहावलपुर में पाकिस्तान के गृह मंत्री तारिक बशीर चीमा की निगरानी में की गई थी। चिलचिलाती गर्मी में अल्‍पसंख्‍यक हिंदुओं की पूरी बस्ती पर बुलडोजर चलाकर जमींदोज कर दिया गया था।

ma_1  H x W: 0
पाकिस्तान में कट्टरपंथी ही नहीं उनके प्रभाव में रहने वाले प्रशासनिक अधिकारी एवं समाज सेवी संगठन भी हिन्दू—सिखों के साथ पक्षपातपूर्ण व्यवहार एवं अत्याचार कर रहे हैं। ऐसा न होता तो वर्षों से हिंदुओं की छोटी—छोटी बच्चियों के अपहरण, कन्वर्जन एवं जबरन निकाह की आड़ में शारीरिक शोषण का सिलसिला अब तक नहीं चल रहा होता। पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यकों की जिंदगी बेहद तंग कर दी गई है। उनके इर्दगिर्द ऐसा माहौल बना दिया गया है कि वे देश छोड़ने को मजबूर हो जाएं।

हद यह कि कोरोना संक्रमण के दौरान भी यह सिलसिला नहीं थम रहा है। राशन देने के नाम पर उन्हें कन्वर्जन को मजबूर किया जाता है। पाकिस्तान के अल्पसंख्यकों की स्थिति पर पैनी नजर रखने वाले एक्टिविस्ट राहत आस्टिन कहते हैं कि कोरोना के बाद बाढ़ ने सिंध के लोगों को बहुत अधिक परेशान किया। इस दौरान वहां के अल्पसंख्यकों को अधिक जान—माल का नुकसान हुआ। मगर सरकार एवं सामाजिक संगठनों ने बाढ़ पीड़ितों में राहत सामग्री वितरण में भेदभाव किया। हिंदुओं को राहत सामग्री नहीं दी गई। लाक डॉउन में भी ऐसा नजारा देखने को मिला था।

j_1  H x W: 0 x
पाकिस्तान के सिंध प्रांत में हिंदू खासी संख्या में रहते हैं, जो इस समय हर तरह की प्रताड़ना का शिकार हैं। उनके घरों को तोड़ते समय प्रशासन ने नहीं सोचा कि छतविहीन होने के बाद वे कहां जाएंगे। कोराना महामारी में सोशल डिस्टेंशिंग का पालन कैसे करेंगे ? राहत ऑस्टिन ने इस घटना पर एक के बाद एक कई ट्वीट किए हैं, जिसमें वह कहते हैं कि हाल में आई बाढ़ ने पाकिस्तान में गैर-मुसलमानों के लिए अधिक बुरी स्थिति पैदा कर दी है। राहत ने यह भी कहा है कि हिंदुओं के घरों को गिराने जैसे हथकंडों का इस्तेमाल उन्हें इस्लाम में कन्वर्ट करने के लिए किया जाता है।
गौरतलब है कि इससे पहले मई में पाकिस्तान में सरकार के इशारे पर हिंदुओं की बस्ती उजाड़ दी गई थी। बहावलपुर में इमरान सरकार के मंत्री के नेतृत्व में हिंदुओं के घर जमीदोंज किए गए थे।