अब नेपाल की ज़मीन कब्जाने लगा चीन, कम्युनिस्ट ओली सरकार बनी मूक दर्शक

    दिनांक 24-सितंबर-2020   
Total Views |
तिब्बत—भारत सीमा पर चीन द्वारा विवाद पैदा करने के बाद अब नेपाल—चीन सीमा विवाद भी शुरू हो गया है। नेपाल के कर्णाली राज्य के हुमला जिले में चीनी सैनिकों ने दो किमी अंदर तक अपना कब्जा कर पक्की इमारतें खड़ी कर दी हैं।
1_1  H x W: 0 x

तिब्बत—भारत सीमा पर चीन द्वारा विवाद पैदा करने के बाद अब नेपाल—चीन सीमा विवाद भी शुरू हो गया है। नेपाल के कर्णाली राज्य के हुमला जिले में चीनी सैनिकों ने दो किमी अंदर तक अपना कब्जा कर पक्की इमारते खड़ी कर दी हैं। पिछले कुछ महीनों से नेपाल की सीमा पर चीन के अतिक्रमण की खबरें आ रही हैं। बावजूद इसके नेपाल की ओली सरकार खामोश है। चीन द्वारा किए अतिक्रमण के बाद ओली सरकार को चेताने के लिए राजधानी काठमांडू में चीन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन भी हुए हैं। ऐसे में स्थानीय लोग नेपाल सरकार से सवाल कर रहे हैं कि नेपाल के हुमला जिले के पिल्लर संख्या 11 और 12 कहां गए?


1_1  H x W: 0 x

पुष्ट खबरों के अनुसार ये पिल्लर चीनी सैनिकों ने उखाड़ दिए हैं और दो किमी भीतर तक अपने ठिकाने बना लिए हैं। जानकारी के मुताबिक हुमला जिले के सीडीओ चिरंजीवी गिरी सीमा पर जब हालात का जायजा लेने पहुंचे तो उन्हें भी वहां चीनी सैनिकों ने आने नहीं दिया। सीडीओ के साथ नामखा गांव पालिका अध्यक्ष विष्णु बहादुर लामा स्थानीय लोगों के साथ थे, लेकिन चीनी सैनिकों ने उन्हें भी वापस भागने पर मजबूर कर दिया। विष्णु बहादुर लामा वह व्यक्ति हैं, जिन्होंने नेपाली शासन को इस अतिक्रमण की जानकारी दी थी। जानकारी यह भी निकलकर सामने आ रही है कि हुमला जिले की करनाली नदी, सिजेन नदी के बीच भी नेपाल के इलाके में चीनी सैनिक देखे गए हैं। सामारिक दृष्टि से यह इलाका भारत पर नज़र रखने के लिए महत्वपूर्ण है।
1_1  H x W: 0 x

चीन की चाल में फंसता नेपाल
चीन ने नेपाल के गोरखा जिले के भागडेर खोला में भी घुसपैठ कर पक्के निर्माण कर लिए हैं। नेपाल सीमा पर चीन ने अपने खर्चे से सीसीटीवी कैमरे क्यों और कैसे लगाए यह समझने के लिए काफी है कि वह नेपाल के रास्ते भारत की सीमा पर आकर बैठ गया है।खबरों की मानें तो हुमला के सीडीओ ने चीन की घुसपैठ की रिपोर्ट काठमांडू भेज दी है। इस घटना के बाद से राजधानी काठमांडू में सिविल सोसायटी समूह द्वारा चीन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है, साथ ही ओली सरकार के खिलाफ भी नारेबाज़ी की गई है। सिविल सोसाइटी समूह ने नेपाल सरकार को चीन की विस्तारवादी नीतियों के प्रति आगाह भी किया है।


कम्युनिस्ट दल दुष्प्रचार को दे रहे हवा
नेपाल के कम्युनिस्ट दलों ने भारत के खिलाफ दुष्प्रचार तेज करते हुए 1816 की संगरोली संधि से पूर्व उत्तराखण्ड और हिमाचल को भी गोरखाओं की ज़मीन बताते हुए नेपाल की ज़मीन भारत वापस करे की आवाज़ उठाई है। अभी तक नेपाल भारत के कालापानी क्षेत्र को अपना बता रहा था, अब इसमें और इलाके जोड़कर नया दुष्प्रचार अभियान सोशल मीडिया में शुरू किया गया है।खास बात यह है कि सोशल मीडिया पर इस अभियान में नेपाली प्रधान मंत्री ओली और प्रचंड जैसे नेता भी जुड़े हुए हैं।
1_1  H x W: 0 x

उत्तराखंड के सीमावर्ती धारचूला क्षेत्र के निवासी कृष्णा गर्बियाल बताते हैं कि नेपाल के तिंकुर छंगरु और अन्य सीमावर्ती गांवों के प्रशासनिक अधिकारी भारत के सीमावर्ती गांव के लोगों को नेपाली नागरिकता देने का प्रलोभन दे रहे हैं। यह सब चीन के इशारों पर हो रहा है। तिंकुर गांव के निवासी सूरज सिंह ऐतवाल कहते हैं कि नेपाल ने आज तक हमारी सुध नहीं ली। अगर भारत से राशन न आए तो हम भूखे मर जाएं। तो वहीं गीता बोहरा कहती हैं कि भारत और नेपाल में कोई फर्क नहीं है। हमारे बच्चे भारत में जाकर पढ़ते हैं। उन्हें कोई रोक—टोक नहीं थी। पर अब  पुल बन्द कर देते हैं। इसी तरह मुकेश बोरा कहते हैं कि चीन ने भारत—नेपाल के रिश्तों में आग लगा दी है। नेपाल सरकार ये अच्छा नहीं कर रही है। हमें भारत ने रोजी रोटी दी है।

1_1  H x W: 0 x


बरहाल नेपाल—भारत सीमा के हालात अब पहले जैसे नहीं रहे। कुछ समय से नेपाल की ओली सरकार रोटी—बेटी के रिश्ते को भुलाकर चीन के इशारों पर भारत के खिलाफ नित नए प्रोपेगंडा करती रहती है। ऐसे में नेपाल और भारत की खुली सीमा का फायदा चीन उठाने लगा है। लिहाजा भारत सरकार को भी नेपाल सीमा पर तारबाड़ जैसे सुरक्षा उपायों पर विचार करना चाहिए।