दिल्ली पुलिस ने एनडीटीवी की खबर को बताया झूठा

    दिनांक 25-सितंबर-2020   
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एनडीटीवी ने कहा कि दिल्ली पुलिस ने भाजपा नेता कपिल मिश्रा को दंगों के लिए जिम्मेदार 'भड़काऊ भाषण वाला व्हिसल ब्लोअर' कहा है। वहीं पुलिस ने इसे झूठी खबर बताया और एनडीटीवी की रिपोर्ट का खंडन किया है

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यह महज संयोग ही था कि 24 सितम्बर को पूर्व पत्रकार वर्तमान यूट्यूबर अजीत अंजुम सुदर्शन चैनल को केन्द्र में रखकर यूट्यूब पर अपना बयान दे रहे थे। सुदर्शन चैनल को लेकर पूर्वाग्रह से ओत—प्रोत होकर उन्होंने केबल टीवी नेटवर्क रुल्स 1964 के नियम 06 का उल्लेख करते हुए कहा कि केन्द्र सरकार के अधिकारियों के पास यह पहले से था लेकिन इसे अपने पास रख कर पहले वे सो रहे थे। या इससे उन्हें फर्क नहीं पड़ता है कि नियम क्या कहता है? एक्ट क्या कहता है? प्रावधान क्या कहता है और चैनल क्या चलाता है?
अजीत अंजुम जब यह नियम पढ़ रहे थे, उन्हें तब तक यह पता नहीं था कि दिल्ली पुलिस ने दिल्ली दंगों से जुड़े एनडीटीवी के फेक न्यूज पर अपनी कोई प्रतिक्रिया दी है। यह खबर उन्हें पहले मिल गई होती तो सुदर्शन पर अपना बयान वे आगे के लिए टाल सकते थे।
अजीत अंजुम ने अपने यूट्यूब कार्यक्रम के बयान में क्या कहा। अजीत अंजुम ने कहा— कोई भी कार्यक्रम जो गुड टेस्ट में न हो। जिसमें कोई अश्लील कंटेंट हो। मानहानि करने वाला या गलत कंटेंट हो। आधा सच बताया जा रहा हो। किसी धर्म या समुदाय पर हमला हो। किसी धार्मिक समूह के बारे में ऐसी बातें जिसमें कही गई हों जिससे साम्प्रदायिक तनाव बढ़े। ऐसा माहौल बने या चीजे बिगड़ें। उसे टेलीकास्ट नहीं किया जा सकता।
24 सितम्बर को जब अजीत अंजुम अपना बयान जारी कर रहे थे, दिल्ली पुलिस मुख्यालय में एक खंडन टाइप किया जा रहा था। एनडीटीवी पर 23 सितम्बर को 'भड़काऊ भाषण वाला व्हिसल ब्लोअर' शीर्षक से चली खबर का खंडन।
24 सितम्बर की घटना पर आने से पहले मार्च के पहले सप्ताह में दिल्ली दंगों पर अपनी स्टोरी एनडीटीवी पर करते हुए चैनल के प्रबंध संपादक श्रीनिवासन जैन ने उत्तर—पूर्वी दिल्ली की सड़क पर चलते हुए एक व्यक्ति को पकड़ा, जिसका नाम संजय गुप्ता बताया और उसे कपिल मिश्रा का मकान मालिक बताकर चैनल पर पेश कर दिया। चैनल पर खबर चल जाने के बाद श्रीनिवासन जैन की आंख खुली कि गुप्ता कभी कपिल मिश्रा का मालिक मकान नहीं रहा।
एनडीटीवी हिन्दी—अंग्रेजी दोनों के ही पत्रकार दिल्ली दंगों के बाद से जिस तरह कपिल मिश्रा के नाम के पीछे पड़े हुए हैं और एक के बाद एक झूठी खबर कपिल के खिलाफ परोस रहे हैं, उससे संदेह यही होता है कि यह किसी तरह का पेड न्यूज तो नहीं चला रहे। चूंकि चैनल की टीआरपी और आर्थिक स्थिति दोनों ही इन दिनों बेहद खराब है।
चैनल ने 'भड़काऊ भाषण वाला व्हिसल ब्लोअर' शीर्षक ने समाचार का प्रसारण 23 सितम्बर को किया। जिसमें एंकर ने कहा— नफरती भाषण देने वाले नेता को दिल्ली पुलिस व्हिसल ब्लोअर बता रही है।
एनडीटीवी पर ही 24 सितम्बर को शाम 5:30 पर पूर्व केंद्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद से सौरभ शुक्ला बातचीत कर रहे थे। जिसमें खुर्शीद ने सौरभ को पूछा कि यदि मैं कहूं कि सारे पत्रकार सरकार के खिलाफ सड़क पर उतर आएं। क्या यह उकसावे वाली बात है? जिसके जवाब में सौरभ कहते हैं — ''नहीं।''
कपिल कहते हैं ट्रम्प के जाने तक यदि स्थिति नहीं संभली तो हम सड़क पर उतरेंगे। जैसे सीएए के विरोध में दिल्ली में लोग सड़क पर उतरे। उसी तरह दूसरे लोगों को भी सड़क पर उतरने का अधिकार है। इसे उकसाने वाला भाषण कैसे कहा जा सकता है? और अपनी बात साबित करने के लिए वह बार—बार झूठी रिपोर्टिंग कर रहा। इससे उनकी मंशा पर संदेह तो होता ही है।
एनडीटीवी द्वारा कपिल मिश्रा को 'भड़काऊ भाषण वाला व्हिसल ब्लोअर' कहे जाने पर दिल्ली पुलिस ने लिखा— यह सत्य से नितांत परे है। दिल्ली पुलिस ने कहीं भी कपिल मिश्रा को व्हिसल ब्लोअर नहीं कहा है। न लिखा है। शायद एंकर का नैरेटिव तब पूरा होता यदि दिल्ली पुलिस ने कपिल मिश्रा का बयान न लिया होता। परंतु अन्वेषण स्टूडियो और कैमरा के सामने नहीं होता। कपिल मिश्रा के विस्तृत बयान के रिकॉर्ड पर आ जाने से एंकर ने सच्चे व्हिसल ब्लोअर्स जो प्रोटेक्टेड विटनेस हैं, नजरअंदाज करते हुए दर्शकों को गुमराह करने का प्रयास किया है।
एनडीटीवी बार—बार इस बात को कई महीनों से कह रहा है कि उत्तर—पूर्वी दिल्ली में पत्थरबाजी कपिल मिश्रा के उकसावे के बाद शुरू हुई। 23 सितम्बर के रिपोर्ट में भी इस बात का जिक्र आता है। इस काल्पनिक रिपोर्टिंग का भी खंडन दिल्ली पुलिस ने किया है। दिल्ली पुलिस ने एनडीटीवी को लिखा है कि एनडीटीवी के रिपोर्ट में कहा गया कि कपिल मिश्रा के मौजपुर में रहते ही पत्थरबाजी शुरू हो गई थी। दिल्ली पुलिस ने तमाम जांच के बाद यह पाया कि दंगे और पत्थरबाजी 23 फरवरी को चांद बाग में दंगाइयों ने सोची समझी साजिश के तहत लगभग ग्यारह बजे सुबह ही शुरू कर दी थी और पहले घायल पीड़ित की एमएलसी 12:15 बजे दिन में अस्पताल में बनी थी। जबकि कपिल मिश्रा 23 तारीख को 3:30 बजे दोपहर मौजपुर आए थे। इससे स्पष्ट है कि पुलिस और पब्लिक पर सीएए विरोधियों द्वारा हमला 23 फरवरी सुबह से ही शुरू हो गया था।
अपने खंडन में दिल्ली पुलिस ने एनडीटीवी के दिल्ली दंगे पर केन्द्रित रिपोर्ट पर सवाल उठाते हुए कहा है कि एंकर ने तथ्यों को छिपाते हुए, एक कहानी रचने की शरारतपूर्ण कोशिश की। परंतु एनडीटीवी के अपने ही रिपोर्टर की यह टिप्पणी कि डीसीपी एंटी रायट गिअर पहने हुए थे और आस—पास पत्थर भी दिखाई दे रहे थे। दिल्ली पुलिस के अनुसार, एनडीटीवी के रिपोर्टर के इस कथन से दिल्ली पुलिस की चार्ज शीट में लिखी इस बात की पुष्टि होती है कि पथराव सुबह ग्यारह बजे ही शुरू हो गए थे।
जब एनडीटीवी का इतना बड़ा झूठ सबके सामने है, जिसे वह थोड़े शब्दों के हेर—फेर के साथ कई महीनों से नमाज की तरह पांच वक्त पढ़ रहा है। ऐसे में यूट्यूबर अजीत अंजुम जैसा कोई जानकार बताए कि केबल टीवी नेटवर्क रुल्स 1964 के नियम 06 के अन्तर्गत कोई कार्रवाई एनडीटीवी के ऊपर हो सकती है या नहीं ?