श्रीकृष्ण जन्मभूमि को मुक्त कराने हेतु अदालत में दायर हुआ मुकदमा

    दिनांक 28-सितंबर-2020
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अयोध्या में श्रीराम लला विराजमान के पक्ष को सभी अदालतों ने सही माना और अंत में उन्हीं की जीत हुई. अब श्रीकृष्ण विराजमान की सखी के तौर पर मथुरा की अदालत में एक सिविल मुकदमा दायर किया गया है. श्रीकृष्ण जन्मभूमि को मुक्त कराने के लिए अदालत से गुहार लगाई गई है

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इस सिविल वाद में 13.37 एकड़ भूमि को श्रीकृष्ण जन्मभूमि बताया गया है. इस भूमि पर स्वामित्व की मांग की गई है. याची ने मांग की है कि श्रीकृष्ण भूमि पर मुगलकाल में कब्ज़ा कर लिया गया था और वहां पर शाही ईदगाह बना दी गई थी. शाही ईदगाह मस्जिद को हटा कर श्रीकृष्ण जन्मभूमि को मुक्त किया जाय. यह सिविल वाद भगवान श्रीकृष्ण विराजमान, कटरा केशव देव खेवट, मौजा मथुरा बाजार की ओर से उनकी अंतरंग सखी के रूप में अधिवक्ता रंजना अग्निहोत्री और छह अन्य भक्तों ने दायर किया है.
उल्लेखनीय है कि मुस्लिम आक्रान्ताओं ने अयोध्या की ही तरह काशी विश्वनाथ मंदिर के स्वरुप में भी बदलाव किया था. आक्रान्ताओं ने सनातन धर्म के अनुयायियों की धार्मिक भावना को ठेस पहुंचाने के लिए इस तरह का कृत्य किया था. देश जब अंग्रेजों की गुलामी के बाद आज़ाद हुआ. उसके बाद भी राजनीतिक परिस्थितियां कुछ ऐसी बनी कि मंदिरों को तोड़ कर जहां - जहां पर मस्जिद का ढांचा बना दिया गया था. उन जगहों पर मंदिर का स्वरुप वापस कराने हेतु हिन्दुओं को लम्बी न्यायिक प्रक्रिया से गुजरना पड़ा. अयोध्या में श्रीराम जन्म भूमि विवाद की लम्बी कानूनी लड़ाई का अंत अभी हाल ही में हुआ है.
इसी प्रकार, हिन्दुओं की तरफ से वर्ष 1991 में वाराणसी के जनपद न्यायालय में वाद दायर किया गया. इस मुकदमे के वाद मित्र ने न्यायालय में अर्जी दाखिल की कि "15 अगस्त 1947 के पहले ज्ञानवापी परिक्षेत्र क्या था, इसका पता लगाने के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण से सर्वे कराया जाय." उक्त अर्जी वाराणसी जनपद न्यायालय में अधिवक्ता विजय शंकर रस्तोगी की तरफ से दायर की गई. उन्होंने यह अर्जी प्राचीन मूर्ति स्वयम्भू ज्योतिर्लिंग भगवान विश्वेश्वर नाथ की ओर से वाद मित्र के तौर पर दाखिल की. इस मुकदमे को वर्ष 1991 में सोमनाथ व्यास और डॉ.राम रंग शर्मा ने दायर किया था. इन दोनों वादकारियों की मृत्यु हो जाने के बाद अदालत ने पूर्व शासकीय अधिवक्ता (सिविल ) विजय शंकर रस्तोगी को मुकदमे का वाद मित्र नियुक्त किया.
वाद मित्र की अर्जी दाखिल होने के बाद सिविल जज (सीनियर डिविजन फास्ट ट्रैक) ने मुक़दमे के विपक्षियों को आपत्ति दायर करने का अवसर दिया था. मुकदमे के वाद मित्र विजय शंकर रस्तोगी के अनुसार, देश भर में बारह ज्योतिर्लिंग हैं. ज्ञानवापी क्षेत्र के विवादित परिसर में स्थापित ज्योतिर्लिंग, उन्हीं बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक हैं. परिसर में ज्ञानवापी नाम का एक कुआं भी है.