खत्म किया जाय “द प्लेसेज ऑफ वरशिप एक्ट 1991"- वसीम रिजवी

    दिनांक 29-सितंबर-2020   
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 उत्तर प्रदेश शिया सेंट्रल वक्फ़ बोर्ड के पूर्व चेयरमैन वसीम रिज़वी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर “द प्लेसेज ऑफ वरशिप एक्ट 1991” को खत्म करने की मांग की है. वसीम रिजवी ने मांग की है कि पुराने जमाने में तोड़े गए मंदिरों को हिंदुओं को वापस दिया जाए और मुगलों के पहले की स्थिति बहाल की जाय

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मथुरा को मुक्त कराने का सिविल वाद दायर होने के बाद वसीम रिजवी ने एक मांग करते हुए एक पत्र लिखा, जिसमें उन्होंने कहा, “ कांग्रेस पार्टी की सरकार में 'द प्लेसेज ऑफ वरशिप एक्ट, 1991' बनाया गया था. उस समय यह कानून बना दिया गया कि 1947 के बाद जितने भी धार्मिक स्थल हैं, उनकी यथास्थिति बहाल रहेगी. धार्मिक स्थलों के स्वरूप में परिवर्तन के लिए किसी भी तरह का वाद किसी भी न्यायालय में दायर नहीं किया जा सकेगा.

इस अधिनयम में अयोध्या के मामले को अलग रखा गया था. 'द प्लेसेज ऑफ वरशिप एक्ट, 1991' एक विवादित अधिनियम है, जो किसी एक धर्म के अधिकार और धार्मिक संपत्ति जो उनसे मुस्लिम कट्टरपंथी मुगल शासकों ने ताकत के बल पर छीन कर उस पर अपने मजहबी स्थल बनवा दिए थे, वह सभी प्राचीन धार्मिक स्थल (मंदिर) हिंदुओं के थे. यह धार्मिक स्थल उन्हें वापस न मिलने पाएं, इसलिए इस अधिनियम को बनाया गया था. इस अन्याय को सुरक्षा प्रदान करने के लिए यह अधिनियम बनाया गया था.”


वसीम रिजवी ने देश की 9 मस्जिदों का विवरण पत्र में दिया है, जिसमें केशव मंदिर श्रीकृष्ण जन्मभूमि—मथुरा, अटाला देव मंदिर—जौनपुर, काशी विश्वनाथ मंदिर—वाराणसी, रुद्रा महालया मंदिर— गुजरात, भद्रकाली मंदिर अमदाबाद, आदिना मस्जिद—पश्चिम बंगाल, विजया मंदिर—मध्य प्रदेश, मस्जिद कुवत उल इस्लाम—दिल्ली शामिल है